Jodhpur Latest Updates : 200 साल पुराने शीतला माता मंदिर में 10 मार्च से लगेगा मेला
होली के बाद शीतला सप्तमी से होगी मेले की शुरुआत
जोधपुर के नागौरी गेट कागा की पहाड़ियों में स्थित ऐतिहासिक शीतला माता मंदिर कागा में 10 मार्च से भव्य मेले की शुरुआत होगी। होली के बाद शीतला सप्तमी के अवसर पर ध्वजारोहण के साथ मेले का शुभारंभ किया जाएगा। यह मेला अमावस्या तक चलेगा और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।
मंदिर प्रशासन ने मेले को लेकर तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया है। इस बार श्रद्धालुओं की सुविधाओं और स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया गया है।
पॉलीथिन पर पूर्ण प्रतिबंध
कार्यालय अधिकारी कुलदीप गहलोत ने बताया कि ट्रस्ट अध्यक्ष निर्मल कच्छवाहा की मॉनिटरिंग में मंदिर परिसर में कई विकास कार्य कराए गए हैं, ताकि दर्शन व्यवस्था सुचारू रहे और भीड़ प्रबंधन बेहतर तरीके से हो सके।
गंगा मैया और काग ऋषि मंदिर का जीर्णोद्धार
शीतला माता मंदिर के साथ ही परिसर में स्थित गंगा माता मंदिर और काग ऋषि मंदिर का भी भव्य जीर्णोद्धार कराया गया है। इसके अलावा प्राचीन भेरूजी मंदिर में विशेष श्रृंगार और दर्शन की बेहतर व्यवस्था की गई है।
यहां कोडमदेसर और बड़ली वाले भेरूजी की स्थापना है। मान्यता है कि शीतला माता के दर्शन के साथ भेरूजी के दर्शन करना भी आवश्यक माना जाता है।
ऐतिहासिक कथा: महाराजा का फरमान
शीतला माता मंदिर का इतिहास करीब 200 साल पुराना है और यह मारवाड़ के शासकों से जुड़ा हुआ है। वर्ष 1752 में महाराजा विजय सिंह अपने पिता महाराजा बख्त सिंह की मृत्यु के बाद जोधपुर के सिंहासन पर बैठे।
बाद में सत्ता संघर्ष के चलते उन्हें गद्दी से हटाया गया, लेकिन 1772 में दोबारा महाराजा बने। कुछ वर्षों बाद चेचक (माता) की बीमारी से उनके बड़े पुत्र की शीतला सप्तमी के दिन मृत्यु हो गई। इस घटना से आहत होकर महाराजा विजय सिंह ने शीतला माता को शहर से बाहर करने का फरमान जारी किया।
श्मशान घाट की पहाड़ी पर स्थापित हुई प्रतिमा
महाराजा के आदेश के अनुसार जूनी मंडी स्थित शीतला माता मंदिर से माता की प्रतिमा को उठाकर कागा की पहाड़ियों पर स्थापित किया गया। उस समय कागा क्षेत्र श्मशान घाट के रूप में जाना जाता था।
श्मशान के निकट स्थित पहाड़ी पर माता की प्रतिमा स्थापित की गई और वहीं से इस मंदिर का वर्तमान स्वरूप विकसित हुआ। समय के साथ यह स्थान आस्था और श्रद्धा का प्रमुख केंद्र बन गया।
श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्था
मेला अवधि के दौरान श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए सुरक्षा और सुविधा के विशेष इंतजाम किए गए हैं। दर्शन मार्ग, पेयजल, साफ-सफाई और भीड़ नियंत्रण के लिए अतिरिक्त व्यवस्थाएं की गई हैं।
हर वर्ष की तरह इस बार भी हजारों की संख्या में श्रद्धालु शीतला माता के दर्शन के लिए पहुंचेंगे। धार्मिक आस्था और ऐतिहासिक महत्व के कारण यह मेला जोधपुर की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
शीतला सप्तमी के अवसर पर लगने वाला यह मेला न केवल धार्मिक बल्कि ऐतिहासिक दृष्टि से भी विशेष महत्व रखता है। 10 मार्च से शुरू होने वाले इस आयोजन को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखा जा रहा है।