Jaipur JDA vs Forest Department: 19 अधिकारी-कर्मचारी APO, मानसून में पौधारोपण पर संकट

Jaipur JDA vs Forest Department विवाद एक बार फिर चर्चा में है। हाल ही में हुए प्रशासनिक तबादलों के बाद जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) और वन विभाग के बीच समन्वय को लेकर खींचतान खुलकर सामने आ गई है। वन विभाग ने प्रतिनियुक्ति पर JDA की उद्यान शाखा में कार्यरत 19 अधिकारी और कर्मचारियों को एक साथ एपीओ (Awaiting Posting Order) कर मुख्यालय बुला लिया है। इस फैसले से JDA की उद्यान शाखा में कार्य प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है, खासकर ऐसे समय में जब मानसून के दौरान बड़े स्तर पर पौधारोपण अभियान चलाया जाता है।
वन विभाग की ओर से जारी आदेशों के बाद संबंधित सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रधान मुख्य वन संरक्षक (PCCF/HoFF) कार्यालय में रिपोर्ट करने के निर्देश दिए गए हैं। इस कार्रवाई में लंबे समय से प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत कर्मचारी भी शामिल हैं, जबकि 10 जुलाई की तबादला सूची में JDA भेजे गए कुछ अधिकारी भी वापस बुला लिए गए हैं।
Jaipur JDA vs Forest Department: क्यों बढ़ा विवाद?
सूत्रों के अनुसार, हालिया तबादलों के बाद दोनों विभागों के बीच प्रतिनियुक्ति व्यवस्था को लेकर मतभेद सामने आए हैं। वन विभाग का कहना है कि विभिन्न विभागों में कई अधिकारी आवश्यकता से अधिक समय से प्रतिनियुक्ति पर कार्य कर रहे थे। इसी समीक्षा के बाद उन्हें वापस बुलाने का निर्णय लिया गया।
दूसरी ओर, JDA की उद्यान शाखा में एक साथ बड़ी संख्या में कर्मचारियों के हटने से विभाग के नियमित कार्यों पर असर पड़ने की संभावना है।
किन अधिकारियों और कर्मचारियों को किया गया APO?
वन विभाग द्वारा जारी आदेशों में कुल 19 अधिकारी और कर्मचारियों को प्रतिनियुक्ति से वापस बुलाया गया है।
उप वन संरक्षक (DCF)
- गुलजारी लाल
सहायक वन संरक्षक (ACF)
- नीलोफर
- निखिल शर्मा
- मयंक महारिया
क्षेत्रीय वन अधिकारी (RFO)
- विकास शर्मा
- पृथ्वीराज मीणा
- इंद्रेश यादव
- राहुल शर्मा
- जितेंद्र सिंह राठौड़
- हर्ष कुमार शर्मा
- रामकरण मीणा
वनपाल
- महेंद्र टारिया
- चेतराम
- दयानंद यादव
सहायक वनपाल
- श्याम श्री शर्मा
- राजाराम मीणा
- कालूराम मौर्य
वनरक्षक
- होशियार सिंह
- दिनेश कुमार शर्मा
मानसून में पौधारोपण अभियान पर क्या पड़ेगा असर?
Jaipur JDA vs Forest Department विवाद का सबसे बड़ा असर मानसून के दौरान चलने वाले पौधारोपण कार्यक्रमों पर पड़ सकता है।
उद्यान शाखा ही शहर में—
- पौधारोपण अभियान
- पौधों का वितरण
- पार्कों का रखरखाव
- हरित पट्टियों की निगरानी
- वृक्ष संरक्षण
जैसे महत्वपूर्ण कार्यों की जिम्मेदारी संभालती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि कर्मचारियों की अचानक कमी से इन कार्यों की गति प्रभावित हो सकती है।
वन विभाग ने क्या कहा?
प्रधान मुख्य वन संरक्षक (HoFF) अरिजीत बनर्जी ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई किसी विशेष विभाग को ध्यान में रखकर नहीं की गई है।
उन्होंने कहा कि विभिन्न विभागों में प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत कर्मचारियों की समीक्षा की गई है। कई अधिकारी लंबे समय से एक ही स्थान पर कार्यरत थे, इसलिए उन्हें मुख्यालय बुलाया गया है। आवश्यकता के अनुसार आगे दोबारा प्रतिनियुक्ति दी जा सकती है।
JDA प्रशासन का क्या कहना है?
JDA की अतिरिक्त आयुक्त (प्रशासन) प्रतिभा पारीक ने कहा कि उन्हें फिलहाल इस मामले की विस्तृत जानकारी नहीं है।
उन्होंने बताया कि संबंधित शाखा के अधिकारियों से जानकारी लेने के बाद ही इस विषय पर आधिकारिक प्रतिक्रिया दी जा सकेगी।
प्रतिनियुक्ति से वापस बुलाने के क्या हो सकते हैं कारण?
प्रशासनिक विशेषज्ञों के अनुसार इस प्रकार की कार्रवाई कई कारणों से की जा सकती है—
- लंबे समय से एक ही विभाग में प्रतिनियुक्ति।
- विभागीय पुनर्गठन।
- मानव संसाधन का पुनर्वितरण।
- मुख्यालय में अधिकारियों की आवश्यकता।
- प्रशासनिक समीक्षा के बाद नई तैनाती।
हालांकि इस मामले में वन विभाग ने केवल प्रशासनिक आवश्यकता का हवाला दिया है।
आगे क्या होगा?
अब सभी अधिकारी प्रधान मुख्य वन संरक्षक कार्यालय में रिपोर्ट करेंगे। इसके बाद विभागीय आवश्यकता के अनुसार नई पोस्टिंग या पुनः प्रतिनियुक्ति के आदेश जारी किए जा सकते हैं।
वहीं JDA को अपनी उद्यान शाखा के कार्यों को सुचारु बनाए रखने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ सकती है।
Jaipur JDA vs Forest Department विवाद ने प्रशासनिक समन्वय को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। एक साथ 19 अधिकारियों और कर्मचारियों को APO किए जाने से JDA की उद्यान शाखा पर तत्काल प्रभाव पड़ना तय माना जा रहा है। हालांकि वन विभाग का कहना है कि यह पूरी तरह प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है और आवश्यकता के अनुसार आगे नई तैनातियां की जाएंगी।
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