जोधपुर उम्मेद अस्पताल: पांच प्रसूताओं की बिगड़ी तबीयत, गलत ब्लड चढ़ाने के मामले की जांच शुरू

जोधपुर उम्मेद अस्पताल एक बार फिर गंभीर चिकित्सा लापरवाही के आरोपों को लेकर चर्चा में है। पावटा जिला अस्पताल में प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ने की घटना के कुछ ही सप्ताह बाद अब जोधपुर के उम्मेद अस्पताल में सिजेरियन प्रसव के बाद पांच महिलाओं की हालत खराब होने का मामला सामने आया है। इनमें दो महिलाओं की स्थिति गंभीर होने पर उन्हें वेंटिलेटर पर रखना पड़ा, जबकि तीन अन्य का इलाज आईसीयू में जारी है। इसी बीच अस्पताल में एक प्रसूता को कथित रूप से गलत ब्लड ग्रुप चढ़ाने का मामला भी सामने आया है, जिसकी जांच शुरू कर दी गई है।
घटना ने प्रदेश की सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं और ब्लड ट्रांसफ्यूजन व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अस्पताल प्रशासन ने पूरे मामले की जांच के लिए कमेटी गठित की है।
सिजेरियन प्रसव के बाद पांच महिलाओं की तबीयत बिगड़ी
जोधपुर उम्मेद अस्पताल में पिछले दो दिनों के दौरान सिजेरियन डिलीवरी कराने वाली पांच महिलाओं की तबीयत अचानक बिगड़ गई।
जानकारी के अनुसार शुक्रवार को ऑपरेशन के बाद दो महिलाओं की हालत गंभीर हो गई, जिसके बाद उन्हें तत्काल वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया। इससे पहले तीन अन्य महिलाओं में अत्यधिक रक्तस्राव की शिकायत सामने आई, जिसके कारण उन्हें आईसीयू में भर्ती करना पड़ा।
चिकित्सकों का कहना है कि प्रसव के बाद अत्यधिक रक्तस्राव (Postpartum Hemorrhage) एक गंभीर चिकित्सीय स्थिति होती है, जिसमें समय पर उपचार न मिलने पर मरीज की जान को खतरा हो सकता है।
एक प्रसूता को कथित रूप से गलत ब्लड चढ़ाया गया
घटना का सबसे गंभीर पहलू एक महिला को कथित रूप से गलत ब्लड ग्रुप चढ़ाया जाना है।
परिजनों के अनुसार धापू नाम की महिला का 11 जुलाई को सामान्य प्रसव हुआ था। रक्त की कमी होने पर उसे उम्मेद अस्पताल रेफर किया गया, जहां पहली बार ओ पॉजिटिव ब्लड चढ़ाया गया और उसकी स्थिति सामान्य रही।
आरोप है कि अगले दिन दूसरी बार गलती से बी पॉजिटिव ब्लड चढ़ा दिया गया। इसके बाद महिला की तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी। उसे कंपकंपी आने लगी और पेशाब में खून आने जैसी शिकायत सामने आई। बाद में उसे महात्मा गांधी अस्पताल रेफर किया गया, जहां उसका उपचार जारी है।
प्रारंभिक जांच में कर्मचारियों की लापरवाही सामने आई
जोधपुर उम्मेद अस्पताल प्रशासन द्वारा गठित जांच समिति ने प्रारंभिक जांच में ब्लड यूनिट की पहचान में चूक की पुष्टि की है।
रिपोर्ट के अनुसार—
- ब्लड यूनिट की पहचान में त्रुटि हुई।
- ओ पॉजिटिव की जगह बी पॉजिटिव रक्त चढ़ा दिया गया।
- दोनों मरीजों की पहचान संबंधी जानकारी अलग-अलग दर्ज थी।
- ब्लड बैंक स्तर पर सत्यापन प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही बरती गई।
हालांकि अंतिम जांच रिपोर्ट आने के बाद ही जिम्मेदारी तय की जाएगी।
महात्मा गांधी अस्पताल में चल रहा इलाज
गलत ब्लड चढ़ाने के बाद महिला की हालत बिगड़ने पर उसे तुरंत महात्मा गांधी अस्पताल भेजा गया।
परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रशासन ने समय पर उन्हें पूरी जानकारी नहीं दी और यह भी स्पष्ट नहीं किया कि महिला की तबीयत आखिर क्यों बिगड़ी।
डॉक्टरों की निगरानी में महिला का उपचार जारी है।
पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
यह पहली बार नहीं है जब जोधपुर में ब्लड ट्रांसफ्यूजन को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं।
कुछ समय पहले एम्स जोधपुर में भी गलत ब्लड ग्रुप चढ़ाने के मामले में एक मरीज की मौत हो चुकी थी। ऐसे मामलों के बाद स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों को लेकर लगातार चिंता जताई जाती रही है।
अस्पताल प्रशासन ने शुरू की विस्तृत जांच
अस्पताल प्रशासन का कहना है कि पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जांच की जा रही है।
जांच में निम्न बिंदुओं की पड़ताल की जा रही है—
- ब्लड बैंक की कार्यप्रणाली
- मरीजों की पहचान प्रक्रिया
- ब्लड यूनिट मिलान प्रणाली
- ऑपरेशन के बाद मरीजों की निगरानी
- जिम्मेदार कर्मचारियों की भूमिका
जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
विशेषज्ञों के अनुसार ब्लड ट्रांसफ्यूजन से पहले मरीज की पहचान और ब्लड ग्रुप का दो स्तर पर मिलान किया जाना अनिवार्य होता है।
यदि इस प्रक्रिया में जरा सी भी चूक होती है तो मरीज की जान पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है। इसलिए अस्पतालों में सुरक्षा प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन आवश्यक माना जाता है।
निष्कर्ष
जोधपुर उम्मेद अस्पताल में प्रसूताओं की बिगड़ती तबीयत और कथित गलत ब्लड ट्रांसफ्यूजन का मामला सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है। जहां एक ओर पांच महिलाओं का इलाज जारी है, वहीं दूसरी ओर जांच समिति ब्लड बैंक और अस्पताल स्टाफ की भूमिका की पड़ताल कर रही है। अब सभी की नजर प्रशासन की अंतिम जांच रिपोर्ट और संभावित कार्रवाई पर टिकी हुई है।

