14 राज्यों में सुरक्षा एजेंसियों की बड़ी कार्रवाई: ISI समर्थित शाहजाद भट्टी नेटवर्क के 253 संदिग्ध हिरासत में
![]()
स्वतंत्रता दिवस से ठीक पहले चलाए गए बहु-राज्यीय अभियान में सुरक्षा बलों ने बड़े आतंकी सिंडिकेट का पर्दाफाश किया, हथियारों का जखीरा बरामद
14 राज्यों में सुरक्षा एजेंसियों की बड़ी कार्रवाई: ISI समर्थित शाहजाद भट्टी नेटवर्क के 253 संदिग्ध हिरासत में
देश की सुरक्षा एजेंसियों ने स्वतंत्रता दिवस से पहले एक बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI (इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस) समर्थित शाहजाद भट्टी नेटवर्क (एसबीएन) के खिलाफ देशव्यापी कार्रवाई को अंजाम दिया है। इस समन्वित अभियान में देश के 14 राज्यों से 253 संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है, जबकि नेटवर्क के खिलाफ अब तक 80 से ज्यादा प्राथमिकियां (FIR) दर्ज की जा चुकी हैं। गृह मंत्रालय के मुताबिक इस कार्रवाई में अब तक 200 से अधिक गिरफ्तारियां भी हो चुकी हैं।
क्यों की गई यह कार्रवाई?
गृह मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, यह ऑपरेशन 12 अगस्त को शुरू किया गया था, ताकि 15 अगस्त यानी स्वतंत्रता दिवस के आसपास होने वाली किसी भी देशविरोधी साजिश या सुरक्षा चूक को पहले ही नाकाम कर दिया जाए। एजेंसियों को इनपुट मिला था कि एसबीएन से जुड़े ऑपरेटिव देश के अलग-अलग हिस्सों में तोड़फोड़ की गतिविधियों की योजना बना रहे थे। इसी आधार पर केंद्रीय खुफिया एजेंसियों ने राज्य पुलिस बलों के साथ मिलकर रियल-टाइम इंटेलिजेंस-शेयरिंग सिस्टम के जरिए एक साथ कई राज्यों में छापेमारी की।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में यह कार्रवाई सीमा-पार आतंकवाद के प्रति सरकार की “जीरो टॉलरेंस” नीति के तहत की गई। गृह मंत्री ने खुद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए इस बड़ी कामयाबी की जानकारी साझा की और सुरक्षा बलों की सराहना की।
किन राज्यों में हुई सबसे ज्यादा कार्रवाई?
इस मल्टी-स्टेट ऑपरेशन में उत्तर प्रदेश सबसे आगे रहा, जहां सबसे ज्यादा 62 संदिग्धों को हिरासत में लिया गया। इसके बाद हरियाणा में 52, दिल्ली में 51 और पंजाब में 44 लोगों को पकड़ा गया। राजस्थान से 15, महाराष्ट्र से 8 और उत्तराखंड से 5 संदिग्ध हिरासत में लिए गए। इनके अलावा कर्नाटक, गुजरात सहित अन्य राज्यों में भी छोटी संख्या में गिरफ्तारियां और हिरासतें दर्ज की गईं। यह आंकड़े साफ दिखाते हैं कि नेटवर्क का जाल उत्तर भारत के साथ-साथ देश के कई अन्य हिस्सों तक फैला हुआ था।
क्या है शाहजाद भट्टी नेटवर्क?
शाहजाद भट्टी नेटवर्क एक पाकिस्तान-आधारित आतंकी सिंडिकेट है, जिसे ISI का सीधा समर्थन प्राप्त बताया जा रहा है। जांच एजेंसियों के अनुसार, यह नेटवर्क भारत में ग्रेनेड हमलों, IED (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) विस्फोटों, पेट्रोल बम अटैक और टारगेटेड किलिंग जैसी वारदातों में शामिल रहा है। नेटवर्क का तरीका काफी संगठित बताया जा रहा है — यह स्थानीय स्तर पर पैसों का लालच देकर युवाओं को अपने साथ जोड़ता था और उनसे पुलिस थानों, सैन्य ठिकानों और धार्मिक स्थलों की रेकी करवाता था।
इसके अलावा, नेटवर्क जासूसी गतिविधियों के लिए संवेदनशील इलाकों में गुप्त रूप से CCTV कैमरे भी लगवाता था, ताकि सुरक्षाबलों की गतिविधियों पर नजर रखी जा सके। छापेमारी के दौरान बरामद सामग्री में IED, हैंड ग्रेनेड, पिस्तौल और जिंदा कारतूस शामिल हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि बरामद ग्रेनेड पर पाकिस्तान ऑर्डनेंस फैक्ट्री की मार्किंग पाई गई, जो इस नेटवर्क के सीमा-पार संबंधों की पुष्टि करती है।
जांच एजेंसियों की रणनीति
सुरक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, इस बार की कार्रवाई पहले की तुलना में कहीं ज्यादा समन्वित और तकनीकी रूप से मजबूत रही। केंद्रीय एजेंसियों ने राज्य पुलिस बलों के साथ रियल-टाइम डेटा शेयरिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया, जिससे एक साथ कई राज्यों में छापेमारी को अंजाम देना संभव हो सका। इससे संदिग्धों को भागने या सबूत मिटाने का मौका नहीं मिला। यह ऑपरेशन दिखाता है कि भारत की खुफिया एजेंसियां अब पहले से कहीं अधिक तालमेल के साथ काम कर रही हैं, खासकर संवेदनशील मौकों जैसे स्वतंत्रता दिवस से पहले।
आगे की कार्रवाई और सरकार का रुख
गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह अभियान अभी खत्म नहीं हुआ है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। हिरासत में लिए गए संदिग्धों से पूछताछ जारी है, ताकि नेटवर्क के अन्य सदस्यों, फंडिंग के स्रोतों और भविष्य की किसी भी साजिश के बारे में जानकारी जुटाई जा सके। एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क के तार देश के किन-किन हिस्सों और किन अन्य आतंकी संगठनों से जुड़े हैं।
सरकार की तरफ से यह भी संकेत दिया गया है कि सीमा-पार आतंकवाद और उसे मिलने वाली किसी भी तरह की मदद के खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह ऑपरेशन आने वाले समय में देश की आंतरिक सुरक्षा नीति के लिए एक अहम मिसाल बन सकता है, खासकर उस तरीके के लिहाज से जिसमें केंद्र और राज्य एजेंसियों ने मिलकर बेहद कम समय में इतने बड़े पैमाने पर कार्रवाई को अंजाम दिया।
क्यों है यह खबर महत्वपूर्ण?
यह कार्रवाई कई मायनों में अहम है। पहला, यह दिखाती है कि भारत की सुरक्षा एजेंसियां संवेदनशील मौकों से पहले सक्रिय रूप से खतरों की पहचान कर उन्हें बेअसर करने में सक्षम हैं। दूसरा, इतने बड़े पैमाने पर बरामद हथियार और विस्फोटक सामग्री यह संकेत देते हैं कि नेटवर्क बड़े हमलों की तैयारी में था, जिसे समय रहते नाकाम कर दिया गया। तीसरा, यह ऑपरेशन भारत-पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को लेकर चल रही चिंताओं को एक बार फिर सामने लाता है और सुरक्षा नीति में सख्ती की जरूरत को रेखांकित करता है।
आम नागरिकों के लिए यह खबर आश्वासन देने वाली है कि सुरक्षा तंत्र संभावित खतरों को लेकर सतर्क और सक्रिय है, वहीं यह भी याद दिलाती है कि सीमा-पार आतंकवाद का खतरा अब भी बना हुआ है और इससे निपटने के लिए निरंतर सतर्कता जरूरी है।
MORE READ: दरबारे खास रेस्टोरेंट विवादः क्लीन चिट पर उठे गंभीर सवाल, वीडियो और CCTV की जांच जरूरी

