भारत ने GreenEnergy सेक्टर में रचा इतिहास, दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा BESS सिस्टम शुरू
Hydrogen Train और BESS से बदलेगा भारत, GreenEnergy सेक्टर में नई क्रांति
भारत लगातार तकनीक और ऊर्जा के क्षेत्र में नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है। अब देश ने GreenEnergy सेक्टर में एक और बड़ी छलांग लगाई है। गुजरात के कच्छ सीमा पर स्थित खवड़ा में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा Battery Energy Storage System यानी BESS शुरू किया गया है। इस प्रोजेक्ट को Adani Green Energy Limited ने विकसित किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि GreenEnergy को बढ़ावा देने की दिशा में यह परियोजना भारत के लिए गेम चेंजर साबित हो सकती है।
26 मई को शुरू किए गए इस Battery Energy Storage System की कुल क्षमता 3.37 गीगावॉट/घंटे है। इस सिस्टम के जरिए सौर और पवन ऊर्जा से पैदा हुई बिजली को स्टोर किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर शहरों तक सप्लाई की जाएगी। GreenEnergy के क्षेत्र में यह भारत की अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धियों में गिनी जा रही है।

बताया जा रहा है कि यह BESS सिस्टम केवल 10 महीनों में तैयार किया गया है। इसकी क्षमता इतनी ज्यादा है कि इससे गोवा, इंदौर और चंडीगढ़ जैसे पूरे शहरों को बिजली सप्लाई की जा सकती है। इतना ही नहीं, यह सिस्टम लगभग 1.2 करोड़ एलईडी बल्बों को लगातार 10 घंटे तक जलाकर रखने की क्षमता रखता है। GreenEnergy स्टोरेज की यह ताकत भारत को दुनिया में नई पहचान दिला रही है।
Battery Energy Storage System यानी BESS ऐसी तकनीक है जिसमें बिजली को रिचार्जेबल बैटरियों में स्टोर किया जाता है। बाद में जरूरत पड़ने पर उसी ऊर्जा का उपयोग किया जाता है। Utility स्तर की परियोजनाओं में मुख्य रूप से Lithium-Ion बैटरियों, पावर कन्वर्जन सिस्टम और आधुनिक ऊर्जा प्रबंधन तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है। आने वाले समय में GreenEnergy सेक्टर के विस्तार में यह तकनीक बेहद अहम मानी जा रही है।
भारत अब इस क्षेत्र में चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश बन गया है। चीन ने इनर मंगोलिया और शिनजियांग प्रांतों में दुनिया के सबसे बड़े बैटरी प्रोजेक्ट स्थापित किए हैं। हालांकि भारत की यह उपलब्धि बताती है कि देश तेजी से GreenEnergy टेक्नोलॉजी में आगे बढ़ रहा है।

इसी बीच भारतीय रेलवे ने भी GreenEnergy को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। रेलवे बोर्ड ने भारत की पहली Hydrogen Fuel Cell DEMU ट्रेन को मंजूरी दे दी है। यह ट्रेन हरियाणा के जींद-सोनीपत रूट पर चलाई जाएगी। Hydrogen ट्रेनें पूरी तरह प्रदूषण मुक्त मानी जाती हैं क्योंकि इनमें से केवल जल वाष्प निकलती है। GreenEnergy आधारित यह तकनीक भारत को दुनिया के चुनिंदा देशों की सूची में शामिल कर रही है।
रेल मंत्रालय के मुताबिक यह परियोजना भारत के Net Zero Carbon Emission लक्ष्य को पूरा करने में मदद करेगी। इससे डीजल की खपत कम होगी और विदेशी मुद्रा की भी बचत होगी। GreenEnergy को बढ़ावा देने के लिए रेलवे लगातार नई तकनीकों पर काम कर रहा है। आने वाले वर्षों में ऐसी और परियोजनाएं शुरू होने की संभावना है।
दूसरी ओर केंद्र सरकार ने Coal India में अपनी 2% हिस्सेदारी बेचने का फैसला लिया है। सरकार यह हिस्सेदारी Offer For Sale यानी OFS के जरिए 412 रुपए प्रति शेयर के न्यूनतम मूल्य पर बेच रही है। इससे सरकार को करीब 5 हजार करोड़ रुपए मिलने की उम्मीद है। सरकार का उद्देश्य विनिवेश के जरिए अपने आर्थिक लक्ष्य पूरे करना है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि कोयले के साथ-साथ GreenEnergy सेक्टर में भी सरकार तेजी से निवेश बढ़ा रही है।
खेल जगत में भी भारत को बड़ी उपलब्धि मिली है। केंद्रीय खेल मंत्रालय ने घोषणा की है कि Commonwealth Games 2030 में Yogasana को शामिल किया जाएगा। पहली World Yogasana Championship जून 2026 में अहमदाबाद में आयोजित होगी। इसमें 75 से ज्यादा देशों के खिलाड़ी हिस्सा लेंगे। भारत की यह पहल दुनिया में भारतीय संस्कृति और GreenEnergy आधारित स्वस्थ जीवनशैली दोनों को नई पहचान दे रही है।
इसके अलावा एशियाई अंडर-23 कुश्ती चैंपियनशिप में भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया। कुमार मोहित और चंद्रमोहन ने गोल्ड मेडल जीतकर देश का नाम रोशन किया। वहीं भारत को एशियाई खेलों में शूटिंग का पहला गोल्ड दिलाने वाले रणधीर सिंह के निधन से खेल जगत में शोक की लहर है। अभिनेता रमाकांत दायमा के निधन से फिल्म इंडस्ट्री में भी दुख का माहौल है।
भारत अब टेक्नोलॉजी, रेलवे, खेल और ऊर्जा के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। खासकर GreenEnergy सेक्टर में हो रहे बड़े निवेश और नई परियोजनाएं आने वाले समय में देश को वैश्विक स्तर पर मजबूत पहचान दिला सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि GreenEnergy ही भविष्य की सबसे बड़ी ताकत बनने जा रही है और भारत इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
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