Gold हुआ महंगा, 10 ग्राम का भाव 1.61 लाख के पार
गोल्ड-चांदी की कीमतों में बड़ा उतार-चढ़ाव, सरकार की ड्यूटी बढ़ी
Gold और चांदी की कीमतों में एक बार फिर बड़ा उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। 14 मई को सोने की कीमत में तेजी दर्ज की गई, जबकि चांदी के दाम में गिरावट आई। 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का भाव 382 रुपए बढ़कर 1.61 लाख रुपए तक पहुंच गया। वहीं 1 किलो चांदी की कीमत 370 रुपए घटकर 2.87 लाख रुपए पर आ गई। लगातार बदलते दामों के कारण निवेशकों, ज्वेलर्स और आम लोगों की नजरें सर्राफा बाजार पर बनी हुई हैं।

साल 2026 में सोने और चांदी की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिला है। आंकड़ों के अनुसार इस साल अब तक Gold करीब 28 हजार रुपए महंगा हो चुका है। वहीं चांदी में भी लगभग 57 हजार रुपए की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 31 दिसंबर 2025 को 10 ग्राम सोने का भाव करीब 1.33 लाख रुपए था, जो अब बढ़कर 1.61 लाख रुपए तक पहुंच चुका है। इसी तरह चांदी की कीमत 2.30 लाख रुपए प्रति किलो से बढ़कर 2.81 लाख रुपए के आसपास पहुंच गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक अस्थिरता, डॉलर में उतार-चढ़ाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती मांग के कारण सोने-चांदी की कीमतों में तेजी बनी हुई है। निवेशक अस्थिर आर्थिक परिस्थितियों में सोने को सुरक्षित निवेश मानते हैं, जिसके चलते इसकी मांग लगातार बढ़ रही है।
इस दौरान सोने और चांदी ने अपने ऑलटाइम हाई स्तर भी छुए। 29 जनवरी को सोने का भाव 1.76 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया था, जबकि चांदी 3.86 लाख रुपए प्रति किलो के रिकॉर्ड स्तर तक चली गई थी। हालांकि बाद में कीमतों में कुछ गिरावट देखने को मिली, लेकिन बाजार अभी भी बेहद अस्थिर बना हुआ है।

सोने-चांदी की बढ़ती कीमतों के पीछे केंद्र सरकार की नई आयात नीति को भी बड़ा कारण माना जा रहा है। सरकार ने हाल ही में सोने और चांदी पर लगने वाली इंपोर्ट ड्यूटी को 6% से बढ़ाकर 15% कर दिया है। सरकार ने सोने पर 10% बेसिक कस्टम ड्यूटी और 5% एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट सेस यानी AIDC लागू किया है। इससे विदेशी बाजार से आने वाला Gold और चांदी महंगे हो गए हैं, जिसका सीधा असर घरेलू बाजार पर देखने को मिल रहा है।
सरकार का कहना है कि इस फैसले का उद्देश्य विदेशी मुद्रा की बचत करना और आयात पर निर्भरता कम करना है। भारत दुनिया के सबसे बड़े Gold आयात करने वाले देशों में शामिल है। हर साल बड़ी मात्रा में सोने का आयात किया जाता है, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव पड़ता है।

इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी देशवासियों से Gold खरीदने को लेकर अपील की है। पीएम मोदी लगातार दो दिन यानी 10 और 11 मई को लोगों से एक साल तक सोने के गहने न खरीदने का आग्रह कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि देशहित में विदेशी मुद्रा बचाना जरूरी है और इसके लिए नागरिकों को भी सहयोग करना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि पहले देश संकट के समय लोग सोना दान तक कर देते थे। आज दान की जरूरत नहीं है, लेकिन देश के आर्थिक हित को देखते हुए लोगों को कुछ समय के लिए Gold खरीदने से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह देशभक्ति दिखाने का समय है और विदेशी मुद्रा बचाने में हर नागरिक की भूमिका महत्वपूर्ण है।
सोने की बढ़ती कीमतों के बावजूद शादी और त्योहारों के सीजन में इसकी मांग बनी हुई है। हालांकि कई लोग अब हल्के वजन के गहने या फिर डिजिटल गोल्ड और गोल्ड बॉन्ड जैसे विकल्पों की ओर भी रुख कर रहे हैं। निवेशकों का मानना है कि लंबी अवधि में सोना अब भी सुरक्षित निवेश माना जाता है।

ज्वेलर्स और विशेषज्ञों ने ग्राहकों को सोना खरीदते समय सावधानी बरतने की सलाह दी है। सबसे पहले हमेशा BIS हॉलमार्क वाला सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदना चाहिए। हॉलमार्क से यह पता चलता है कि सोना कितने कैरेट का है और उसकी शुद्धता कितनी है। बिना हॉलमार्क वाला सोना खरीदने पर धोखाधड़ी की संभावना रहती है।
इसके अलावा ग्राहकों को सोने की कीमत खरीदने से पहले अलग-अलग स्रोतों से जांच लेनी चाहिए। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन जैसी संस्थाओं की वेबसाइट पर रोजाना सोने और चांदी के भाव जारी किए जाते हैं। 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट सोने की कीमतें अलग-अलग होती हैं, इसलिए खरीदारी से पहले सही जानकारी लेना जरूरी है।
फिलहाल सर्राफा बाजार में उतार-चढ़ाव जारी है और आने वाले समय में वैश्विक परिस्थितियों के अनुसार कीमतों में और बदलाव देखने को मिल सकता है। ऐसे में निवेशकों और ग्राहकों को बाजार की स्थिति को समझकर ही फैसला लेने की सलाह दी जा रही है।
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