चीनी के बढ़ते दाम ने बढ़ाई चिंता
चीनी के बढ़ते दाम ने आम लोगों के घरेलू बजट पर दबाव बढ़ा दिया है। देश के कई शहरों में चीनी की खुदरा कीमत करीब ₹70 प्रति किलो तक पहुंच गई है। पिछले तीन महीनों में चीनी के दाम लगभग 40 प्रतिशत यानी करीब ₹19 प्रति किलो तक बढ़ने की बात सामने आई है।
बढ़ती कीमतों को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने चीनी के स्टॉक में कमी और विदेश से चीनी आयात करने की स्थिति को लेकर सरकार से जवाब मांगा।
सरकार ने हालांकि चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी के लिए एथेनॉल उत्पादन को मुख्य वजह मानने से इनकार किया है। खाद्य मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक घरेलू उत्पादन में कमी, त्योहारों से पहले बढ़ी मांग, मौसम की वजह से गन्ने की फसल को नुकसान और अंतरराष्ट्रीय बाजार में सप्लाई का दबाव कीमत बढ़ने के प्रमुख कारण हैं।

चीनी के बढ़ते दाम पर खड़गे ने सरकार से पूछे सवाल
मल्लिकार्जुन खड़गे ने शनिवार को चीनी की कीमतों और देश में उपलब्ध स्टॉक को लेकर सरकार से तीन प्रमुख सवाल पूछे।
उन्होंने सवाल उठाया कि भारत दुनिया के बड़े चीनी उत्पादक और निर्यातक देशों में शामिल होने के बावजूद चीनी के आयात की स्थिति में क्यों पहुंच गया। उन्होंने यह भी पूछा कि देश में चीनी का स्टॉक करीब नौ साल के निचले स्तर तक कैसे पहुंच गया।
खड़गे ने 10 लाख टन चीनी को बिना आयात शुल्क के विदेश से मंगाने के फैसले पर भी सवाल उठाया। उनका कहना है कि एक तरफ सरकार आत्मनिर्भर भारत की बात करती है, जबकि दूसरी तरफ घरेलू जरूरत पूरी करने के लिए चीनी का आयात करना पड़ रहा है।
उन्होंने एथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ने के इस्तेमाल को लेकर भी सरकार से सवाल किया है।
10 लाख टन रॉ शुगर आयात की मंजूरी
चीनी की कीमतों को नियंत्रित करने और बाजार में पर्याप्त सप्लाई बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार ने 31 अक्टूबर तक 10 लाख टन रॉ शुगर यानी कच्ची चीनी को बिना आयात शुल्क के मंगाने की मंजूरी दी है।
सरकार को उम्मीद है कि विदेश से आने वाली चीनी को घरेलू मिलों में रिफाइन करके बाजार में उतारा जाएगा। इससे आने वाले दिनों में सप्लाई बढ़ सकती है और कीमतों पर दबाव कम हो सकता है।
भारत ने इससे पहले करीब एक दशक पहले बड़े स्तर पर चीनी का आयात किया था। साल 2017 में करीब 24 लाख टन चीनी आयात की गई थी। इसके बाद अब घरेलू बाजार में सप्लाई की स्थिति को देखते हुए फिर से आयात का सहारा लिया गया है।
चीनी के बढ़ते दाम के पीछे क्या वजह है?
खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा के अनुसार, चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे केवल एथेनॉल उत्पादन को जिम्मेदार नहीं माना जा सकता।
उनके मुताबिक 20 जुलाई को चीनी की औसत खुदरा कीमत करीब ₹48 प्रति किलो थी, जो बढ़कर करीब ₹56 प्रति किलो हो गई। वहीं एक्स-मिल कीमत भी कुछ ही दिनों में ₹47-48 से बढ़कर लगभग ₹62 प्रति किलो तक पहुंच गई।
सरकार ने मिलों की ओर से अचानक कीमतों में बढ़ोतरी को अनुचित बताया है। अधिकारियों के अनुसार घरेलू उत्पादन में कमी, त्योहारों से पहले मांग में बढ़ोतरी, खराब मौसम से गन्ने की फसल को नुकसान और अंतरराष्ट्रीय बाजार में सप्लाई से जुड़े दबाव ने कीमतों को प्रभावित किया है।

तीन महीने में गुड़, चावल और मक्के का आटा भी महंगा
चीनी की कीमतों के साथ कुछ अन्य खाद्य पदार्थों के दाम भी बढ़े हैं। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक पिछले तीन महीनों में गुड़ की कीमत करीब 24 प्रतिशत तक बढ़ी है।
इसी अवधि में चावल करीब 16 प्रतिशत और मक्के का आटा लगभग 11 प्रतिशत तक महंगा हुआ है। इससे खाद्य महंगाई को लेकर भी चिंता बढ़ी है।
चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी की एक वजह मिलों के पास उपलब्ध शुरुआती स्टॉक में कमी भी बताई जा रही है।
मिलों के पास शुरुआती स्टॉक में बड़ी कमी
पिछले सीजन में नई पेराई शुरू होने से पहले चीनी मिलों के पास करीब 47 लाख टन चीनी का स्टॉक मौजूद था। इस बार यह स्टॉक घटकर लगभग 32 लाख टन रह गया है।
स्टॉक में कमी और उत्पादन घटने के कारण बाजार में सप्लाई पर दबाव बढ़ा। इसी बीच मांग बढ़ने से कीमतों में तेजी देखने को मिली।
हालांकि सरकार का कहना है कि देश में घरेलू जरूरत पूरी करने के लिए पर्याप्त चीनी उपलब्ध है और आने वाले महीनों में नई पेराई शुरू होने के बाद बाजार में सप्लाई और बढ़ जाएगी।
एथेनॉल से चीनी के दाम बढ़ने पर सरकार का जवाब
चीनी के बढ़ते दाम को लेकर एथेनॉल उत्पादन पर भी बहस शुरू हो गई है। आरोप लगाया जा रहा है कि गन्ने से चीनी के बजाय एथेनॉल बनाने के कारण बाजार में चीनी की उपलब्धता प्रभावित हुई है।
सरकार ने इस दावे को खारिज किया है। खाद्य सचिव के मुताबिक अब देश में बनने वाले एथेनॉल का लगभग एक-चौथाई हिस्सा ही शुगर आधारित स्रोतों से आता है। बाकी एथेनॉल मुख्य रूप से मक्का जैसे अनाज से बनाया जाता है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार एथेनॉल के लिए डायवर्ट की जाने वाली चीनी की हिस्सेदारी 2022-23 में करीब 12 प्रतिशत थी, जो 2025-26 में घटकर लगभग 9 प्रतिशत रह गई है।
मौजूदा सीजन में एथेनॉल के लिए करीब 28 लाख टन चीनी डायवर्ट किए जाने की जानकारी दी गई है।
चीनी उत्पादन में भी आई कमी
भारत दुनिया के प्रमुख चीनी उत्पादक देशों में शामिल है। लेकिन 2025-26 में देश का चीनी उत्पादन शुरुआती अनुमान से कम रहने की संभावना है।
शुरुआती अनुमान करीब 343 लाख टन था, जबकि अब उत्पादन करीब 306 लाख टन रहने का अनुमान लगाया गया है।
गन्ने की फसल पर रेड रॉट और टॉप बोरर जैसी बीमारियों के साथ-साथ ज्यादा बारिश का भी असर पड़ा। इससे गन्ने की पैदावार और चीनी उत्पादन प्रभावित हुआ।
उत्पादन में कमी के कारण घरेलू बाजार में उपलब्ध स्टॉक पर दबाव बढ़ा और कीमतों में तेजी देखने को मिली।
अक्टूबर से बाजार में बढ़ सकती है चीनी की सप्लाई
सरकार को उम्मीद है कि अक्टूबर से चीनी की उपलब्धता बढ़ सकती है। इस बार चीनी मिलों में नए सीजन की पेराई करीब 15 अक्टूबर के आसपास शुरू होने की संभावना है।
सरकार के अनुमान के मुताबिक अक्टूबर में करीब 10 से 12 लाख टन अतिरिक्त चीनी बाजार में आ सकती है। इससे घरेलू मांग पूरी करने में मदद मिलेगी।
सरकार का दावा है कि त्योहारों के दौरान चीनी की कमी नहीं होने दी जाएगी और बाजार में पर्याप्त सप्लाई बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।
जमाखोरी रोकने के लिए स्टॉक लिमिट
चीनी की कीमतों पर नियंत्रण रखने के लिए सरकार ने जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के उद्देश्य से स्टॉक लिमिट भी लागू की है।
डीलर्स के लिए 400 टन तक चीनी रखने की सीमा निर्धारित की गई है। वहीं 1 सितंबर से बड़े थोक खरीदार अपनी 15 दिन की खपत से ज्यादा चीनी का स्टॉक नहीं रख सकेंगे।
सरकार का उद्देश्य है कि बाजार में कृत्रिम कमी पैदा करके कीमतों को बढ़ाने की कोशिशों पर रोक लगाई जा सके।
भारत बना चीनी आयात करने को मजबूर
भारत 2021-22 में रिकॉर्ड करीब 1.1 करोड़ टन चीनी का निर्यात कर चुका है। लेकिन इसके बाद चीनी का निर्यात लगातार कम हुआ है।
भारत ब्राजील के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक देश है। इसके बावजूद घरेलू उत्पादन और स्टॉक में कमी के चलते अब सरकार को विदेशी बाजार से कच्ची चीनी मंगाने का फैसला करना पड़ा है।
सरकार का कहना है कि यह कदम घरेलू बाजार में सप्लाई बनाए रखने और कीमतों को नियंत्रित करने के लिए उठाया गया है।
क्या चीनी के दाम और बढ़ेंगे?
आने वाले दिनों में चीनी की कीमतों का रुख घरेलू उत्पादन, बाजार में उपलब्ध स्टॉक, मांग और आयातित चीनी की सप्लाई पर निर्भर करेगा।
अगर 10 लाख टन रॉ शुगर की सप्लाई समय पर बाजार में आती है और अक्टूबर में नई पेराई शुरू होने के बाद उत्पादन बढ़ता है, तो कीमतों पर दबाव कम हो सकता है।
हालांकि, त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने की स्थिति में कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। सरकार की ओर से स्टॉक लिमिट और आयात जैसे कदमों का असर आने वाले हफ्तों में दिखाई दे सकता है।
निष्कर्ष
चीनी के बढ़ते दाम फिलहाल आम उपभोक्ताओं के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं। कई शहरों में कीमत ₹70 प्रति किलो तक पहुंचने और तीन महीने में करीब 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी ने घरेलू बजट पर असर डाला है।
एक तरफ विपक्ष सरकार से चीनी की कीमतों और आयात को लेकर सवाल पूछ रहा है, तो दूसरी तरफ केंद्र सरकार का कहना है कि एथेनॉल उत्पादन इसके लिए जिम्मेदार नहीं है। सरकार घरेलू उत्पादन में कमी, मौसम, बढ़ी मांग और अंतरराष्ट्रीय बाजार की परिस्थितियों को कीमत बढ़ने की प्रमुख वजह बता रही है।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि 10 लाख टन रॉ शुगर के आयात और अक्टूबर में शुरू होने वाली नई पेराई के बाद बाजार में चीनी की सप्लाई कितनी बढ़ती है और आम लोगों को बढ़ी कीमतों से कितनी राहत मिलती है।
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