बरेली में चीनी के बढ़े दाम से बाजार में हलचल
बरेली में चीनी के बढ़े दाम ने आम उपभोक्ताओं के साथ-साथ मिठाई कारोबारियों, चाय विक्रेताओं, होटल-रेस्टोरेंट संचालकों और अन्य खाद्य कारोबारियों की चिंता बढ़ा दी है। बाजार में चीनी की कीमत पिछले कुछ दिनों में तेजी से बढ़ने का दावा किया जा रहा है। स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के मुताबिक, करीब पांच दिनों में चीनी का भाव लगभग ₹50 प्रति किलो से बढ़कर ₹65 प्रति किलो तक पहुंच गया है।
कीमतों में अचानक आई इस तेजी के बीच जिला प्रशासन ने बाजार में चीनी की उपलब्धता और स्टॉक की स्थिति पर निगरानी बढ़ा दी है। प्रशासन की ओर से स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी स्तर पर कृत्रिम कमी पैदा करने, निर्धारित सीमा से अधिक स्टॉक रखने या उपभोक्ताओं से अधिक कीमत वसूलने की शिकायत मिलती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
बरेली जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार अविनाश सिंह वर्तमान में बरेली के जिलाधिकारी हैं।

डीएम ने स्टॉकिस्टों के साथ की समीक्षा बैठक
चीनी की कीमतों में तेजी और बाजार में उपलब्धता को लेकर जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने अधिकारियों तथा चीनी स्टॉकिस्टों के साथ समीक्षा बैठक की। बैठक में चीनी के मौजूदा स्टॉक, बाजार में सप्लाई और बिक्री की स्थिति पर चर्चा की गई।
बैठक में पुलिस, खाद्य एवं रसद विभाग, एआर को-ऑपरेटिव, एआरएमओ, जिला पूर्ति अधिकारी सहित संबंधित विभागों के अधिकारियों और प्रमुख स्टॉकिस्टों की मौजूदगी रही। प्रशासन ने बाजार में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने और किसी भी तरह की अनियमितता पर तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए।
प्रशासन का कहना है कि जिले में चीनी की उपलब्धता को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है। बाजार में किसी तरह की कृत्रिम कमी पैदा करने की कोशिश को गंभीरता से लिया जाएगा।
ओवररेटिंग और जमाखोरी पर होगी कार्रवाई
बरेली में चीनी के बढ़े दाम के बीच प्रशासन का सबसे ज्यादा फोकस ओवररेटिंग, कालाबाजारी और जमाखोरी पर है। अधिकारियों को थोक और फुटकर बाजारों में नियमित जांच करने के निर्देश दिए गए हैं।
जांच के दौरान दुकानदारों और स्टॉकिस्टों के स्टॉक रजिस्टर, खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड और उपलब्ध माल की स्थिति की जांच की जाएगी। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि कहीं मांग बढ़ने की आशंका के बीच जानबूझकर चीनी का स्टॉक रोककर बाजार में कृत्रिम कमी तो नहीं बनाई जा रही।
आगामी त्योहारों को देखते हुए भी प्रशासन ने निगरानी बढ़ाने का फैसला किया है। त्योहारों के दौरान मिठाई और अन्य खाद्य उत्पादों की मांग बढ़ने के कारण चीनी की खपत भी बढ़ सकती है। ऐसे में प्रशासन सप्लाई व्यवस्था को सामान्य बनाए रखने पर जोर दे रहा है।

4 हजार क्विंटल से अधिक स्टॉक पर कानूनी कार्रवाई
बैठक में प्रशासन की ओर से यह भी बताया गया कि निर्धारित सीमा से अधिक चीनी का स्टॉक रखने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन के अनुसार 4 हजार क्विंटल से अधिक स्टॉक पाए जाने की स्थिति में संबंधित व्यापारी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि बाजार में स्टॉक की वास्तविक स्थिति की जांच की जाए और रिकॉर्ड के आधार पर कार्रवाई की जाए। इस दौरान खरीद और बिक्री से जुड़े दस्तावेजों का भी सत्यापन किया जाएगा।
प्रशासन की कोशिश है कि थोक बाजार से लेकर फुटकर दुकानों तक चीनी की सप्लाई सामान्य बनी रहे और उपभोक्ताओं को अनावश्यक रूप से बढ़ी कीमतों का सामना न करना पड़े।
चीनी मिलों को तत्काल डिलीवरी के निर्देश
बाजार में आपूर्ति को सामान्य बनाए रखने के लिए चीनी मिलों को भी निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन ने कहा है कि जिन कारोबारियों के नाम पहले ही चीनी की बिक्री दर्ज हो चुकी है, उन्हें माल की डिलीवरी जल्द से जल्द उपलब्ध कराई जाए।
प्रशासन का मानना है कि समय पर डिलीवरी होने से बाजार में उपलब्धता बढ़ेगी और सप्लाई में देरी के कारण कीमतों पर बनने वाला अतिरिक्त दबाव कम किया जा सकेगा।
उत्तर प्रदेश में चीनी उद्योग राज्य की अर्थव्यवस्था और कृषि क्षेत्र से भी जुड़ा हुआ है। राज्य सरकार की आधिकारिक सामग्री में चीनी उद्योग और गन्ना क्षेत्र को लेकर विभिन्न नीतिगत एवं प्रशासनिक व्यवस्थाओं का उल्लेख मिलता है।
थोक और फुटकर बाजारों में लगातार होगी चेकिंग
डीएम ने संबंधित अधिकारियों को थोक और फुटकर बाजारों में नियमित निरीक्षण करने के निर्देश दिए हैं। जांच टीमों को यह भी देखने के लिए कहा गया है कि बाजार में चीनी किस कीमत पर खरीदी और बेची जा रही है।
यदि किसी व्यापारी द्वारा जानबूझकर माल रोककर कीमत बढ़ाने, निर्धारित सीमा से अधिक भंडारण करने या ग्राहकों से अनुचित कीमत वसूलने का मामला सामने आता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
इस कार्रवाई का उद्देश्य केवल कीमतों पर नियंत्रण रखना नहीं, बल्कि बाजार में चीनी की आपूर्ति को पारदर्शी और सुचारु बनाए रखना भी है।
उपभोक्ताओं और कारोबारियों पर असर
चीनी के दाम बढ़ने का सीधा असर घरेलू बजट पर पड़ सकता है। इसके अलावा मिठाई, चाय, बेकरी, होटल और रेस्टोरेंट जैसे कारोबारों में भी चीनी एक महत्वपूर्ण कच्चा माल है। ऐसे में कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से इन कारोबारों की लागत बढ़ सकती है।
व्यापारियों का कहना है कि थोक बाजार में भाव बढ़ने और सप्लाई में देरी होने पर फुटकर कीमतों पर भी असर पड़ता है। हालांकि, प्रशासन ने पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध होने की बात कही है और बाजार में किसी भी तरह की कृत्रिम कमी को रोकने के लिए निगरानी तेज कर दी है।
प्रशासन की अपील
प्रशासन ने व्यापारियों से नियमों का पालन करने और चीनी की बिक्री एवं स्टॉक से संबंधित रिकॉर्ड सही रखने की अपील की है। वहीं उपभोक्ताओं से भी अपील है कि वे खरीदारी के दौरान निर्धारित और उचित कीमत की जानकारी रखें तथा ओवररेटिंग या जमाखोरी से जुड़ी शिकायत होने पर संबंधित प्रशासनिक विभाग को जानकारी दें।
फिलहाल बरेली में चीनी के बढ़े दाम को लेकर प्रशासन अलर्ट मोड पर है। आने वाले दिनों में बाजारों की जांच और स्टॉक की निगरानी के जरिए स्थिति पर नजर रखी जाएगी।
जरूरी जानकारी एक नजर में
- चीनी की कीमत करीब पांच दिनों में ₹50 से ₹65 प्रति किलो तक पहुंचने का दावा।
- डीएम अविनाश सिंह ने अधिकारियों और स्टॉकिस्टों के साथ समीक्षा बैठक की।
- ओवररेटिंग, कालाबाजारी और जमाखोरी पर कार्रवाई के निर्देश।
- थोक और फुटकर बाजारों में नियमित चेकिंग होगी।
- 4 हजार क्विंटल से अधिक स्टॉक मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की बात।
- चीनी मिलों को पहले से बिक चुके माल की तत्काल डिलीवरी के निर्देश।
- आगामी त्योहारों को देखते हुए प्रशासन ने निगरानी बढ़ाई।
Watch More :- https://youtu.be/jfXxAQ0ylEs

