BRICS बैठक जयपुर: वैश्विक वित्तीय सुधार और डिजिटल करेंसी पर बड़े फैसलों पर मंथन
BRICS बैठक जयपुर में वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक के गवर्नरों की दो दिवसीय अहम बैठक शुरू हो गई है। बैठक में भारत समेत BRICS समूह के सदस्य देशों के प्रतिनिधि वैश्विक अर्थव्यवस्था, वित्तीय स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण भी बैठक में शामिल होने के लिए जयपुर पहुंचीं। उनके जयपुर पहुंचने पर राजस्थान की उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी और मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने रेलवे स्टेशन पर उनका स्वागत किया।
बैठक में वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों के साथ-साथ विकासशील देशों के लिए वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता, स्थानीय मुद्राओं में कारोबार, डिजिटल करेंसी और सीमा पार भुगतान को आसान बनाने जैसे मुद्दे प्रमुख रहेंगे।
BRICS बैठक जयपुर में किन मुद्दों पर होगी चर्चा?
BRICS बैठक जयपुर का प्रमुख उद्देश्य सदस्य देशों के बीच आर्थिक और वित्तीय सहयोग को मजबूत करना है। बदलते वैश्विक आर्थिक माहौल के बीच वित्तीय स्थिरता बनाए रखने और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने पर प्रतिनिधियों के बीच विचार-विमर्श होगा।
बैठक में विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के सामने मौजूद वित्तीय चुनौतियों पर भी चर्चा की जाएगी। इसके अलावा विकास परियोजनाओं के लिए पूंजी जुटाने, निजी निवेश को बढ़ावा देने और विकास वित्त को मजबूत करने के तरीकों पर मंथन होगा।
अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों में सुधार भी बैठक के महत्वपूर्ण एजेंडे में शामिल है। विकासशील देशों का वैश्विक वित्तीय निर्णय प्रक्रिया में प्रतिनिधित्व और उनकी जरूरतों को अधिक महत्व देने से जुड़े विषयों पर भी चर्चा होने की उम्मीद है।


निर्मला सीतारमण और RBI गवर्नर करेंगे संबोधित
बैठक की शुरुआत औपचारिक उद्घाटन सत्र से होगी। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा प्रतिनिधियों को संबोधित करेंगे।
इसके बाद वित्त मंत्रालयों और केंद्रीय बैंकों से जुड़े साझा मुद्दों पर अलग-अलग सत्र आयोजित किए जाएंगे। BRICS देशों के प्रतिनिधि अपने-अपने देशों की आर्थिक स्थिति और वित्तीय नीतियों से जुड़े अनुभव साझा करेंगे।
बैठक के दौरान प्रतिनिधियों के बीच वैश्विक अर्थव्यवस्था में आ रहे बदलावों और उनके संभावित प्रभावों पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा।
ईरान का प्रतिनिधिमंडल भी जयपुर पहुंचा
BRICS बैठक में हिस्सा लेने के लिए ईरान का उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी जयपुर पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल में ईरान के केंद्रीय बैंक के गवर्नर डॉ. अब्दुल नासिर हिम्मती शामिल हैं।
जयपुर पहुंचने पर ईरान के राजदूत डॉ. मोहम्मद फत्ताली और डिप्टी एम्बेसडर मोहम्मद जावेद हुसैनी ने प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया।
ईरान की भागीदारी से BRICS के भीतर वित्तीय और आर्थिक सहयोग के दायरे को लेकर चर्चा और महत्वपूर्ण हो सकती है।
सीमा पार भुगतान को आसान बनाने पर जोर
BRICS बैठक जयपुर में सीमा पार भुगतान व्यवस्था को अधिक आसान और कम लागत वाला बनाने पर भी चर्चा महत्वपूर्ण रहेगी।
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बैठक से पहले BRICS देशों के फास्ट पेमेंट सिस्टम और केंद्रीय बैंक डिजिटल करेंसी यानी CBDC को आपस में जोड़ने की संभावनाओं पर चर्चा की जानकारी दी थी।
अगर अलग-अलग देशों के डिजिटल भुगतान ढांचे के बीच बेहतर कनेक्टिविटी विकसित होती है, तो अंतरराष्ट्रीय लेनदेन को अधिक तेज और आसान बनाने में मदद मिल सकती है।
इसके साथ ही BRICS देशों के बीच स्थानीय मुद्राओं के इस्तेमाल को बढ़ावा देने से जुड़े मुद्दे भी बैठक के एजेंडे में महत्वपूर्ण हैं।
स्थानीय मुद्रा और रुपये के अंतरराष्ट्रीय इस्तेमाल पर नजर
BRICS देशों के बीच स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने का मुद्दा भी आर्थिक सहयोग के लिहाज से अहम है। इसका उद्देश्य कुछ अंतरराष्ट्रीय लेनदेन में प्रमुख वैश्विक मुद्राओं पर निर्भरता को कम करना और सदस्य देशों के बीच सीधे भुगतान के विकल्पों को मजबूत करना है।
भारत के लिए रुपये के अंतरराष्ट्रीय इस्तेमाल को बढ़ावा देना भी एक महत्वपूर्ण आर्थिक लक्ष्य रहा है। ऐसे में BRICS मंच पर स्थानीय मुद्राओं और सीमा पार भुगतान से जुड़े समाधान पर होने वाली चर्चा को खास महत्व दिया जा रहा है।
डिजिटल करेंसी से क्या बदल सकता है?
केंद्रीय बैंक डिजिटल करेंसी यानी CBDC डिजिटल रूप में जारी की जाने वाली केंद्रीय बैंक की मुद्रा है। BRICS देशों के बीच CBDC से जुड़े सहयोग पर चर्चा होने से भविष्य में सीमा पार डिजिटल भुगतान के नए विकल्प विकसित हो सकते हैं।
हालांकि, अलग-अलग देशों की भुगतान प्रणालियों, नियमों और तकनीकी ढांचे को एक साथ जोड़ना एक जटिल प्रक्रिया है। इसलिए इस दिशा में सहयोग के लिए तकनीकी मानकों, सुरक्षा और नियामकीय व्यवस्था पर भी ध्यान देना जरूरी होगा।

विकासशील देशों के लिए वित्तीय सहयोग पर फोकस
बैठक में विकासशील देशों के लिए वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता बढ़ाने पर भी विचार किया जा रहा है। वैश्विक स्तर पर बदलती आर्थिक परिस्थितियों के बीच विकासशील अर्थव्यवस्थाओं को निवेश और विकास परियोजनाओं के लिए पर्याप्त पूंजी उपलब्ध कराना एक बड़ी चुनौती है।
BRICS मंच पर इस मुद्दे को लेकर सदस्य देश आपसी सहयोग बढ़ाने, निवेश के नए अवसर तलाशने और विकास वित्त को मजबूत करने के विकल्पों पर चर्चा कर सकते हैं।
इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों की कार्यप्रणाली में सुधार और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं को अधिक प्रभावी प्रतिनिधित्व देने का मुद्दा भी चर्चा के केंद्र में रहेगा।
BRICS बैठक जयपुर क्यों है महत्वपूर्ण?
BRICS बैठक जयपुर ऐसे समय हो रही है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था कई बदलावों से गुजर रही है। व्यापार, निवेश, डिजिटल भुगतान और वित्तीय तकनीक तेजी से बदल रहे हैं।
ऐसे में BRICS देशों के बीच वित्तीय सहयोग को मजबूत करने की कोशिशों का असर आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय भुगतान व्यवस्था और विकास वित्त के क्षेत्र में दिखाई दे सकता है।
भारत के लिए यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां वैश्विक वित्तीय सुधार, स्थानीय मुद्राओं के उपयोग, डिजिटल भुगतान और CBDC जैसे मुद्दों पर अपनी प्राथमिकताओं को सामने रखने का अवसर मिल रहा है।
आगे क्या होगा?
दो दिवसीय बैठक के दौरान विभिन्न विषयों पर प्रतिनिधियों के बीच विस्तृत चर्चा होगी। बैठकों में वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों, वित्तीय स्थिरता, विकास वित्त, निवेश और डिजिटल भुगतान से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।
बैठक के निष्कर्षों से BRICS देशों के बीच भविष्य के वित्तीय सहयोग की दिशा तय करने में मदद मिल सकती है। खास तौर पर सीमा पार भुगतान और डिजिटल करेंसी को लेकर होने वाली चर्चा पर आर्थिक जगत की नजर रहेगी।
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