Bhilwara Maternal Death: भीलवाड़ा में दो प्रसूताओं की मौत, एक मां दूसरी संतान को नहीं देख सकी, दूसरी की पहली किलकारी मातम में बदली

Bhilwara Maternal Death ने एक बार फिर मातृ स्वास्थ्य सेवाओं और गर्भावस्था के दौरान समय पर जांच एवं उपचार की आवश्यकता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। भीलवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल की मातृ एवं शिशु इकाई (एमसीएच) में अलग-अलग मामलों में दो प्रसूताओं की मौत हो गई। एक महिला अपने दूसरे बच्चे को जन्म देने के बाद नवजात को ठीक से देख भी नहीं सकी, जबकि दूसरी महिला की पहली संतान की खुशी कुछ ही घंटों में मातम में बदल गई।
दोनों घटनाओं ने न केवल परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं की नियमित स्वास्थ्य जांच, पोषण और समय पर रेफरल व्यवस्था की अहमियत को भी सामने ला दिया है।
दूसरे बच्चे के जन्म के बाद नहीं बच सकी सुगना
Bhilwara Maternal Death के पहले मामले में कोटड़ी क्षेत्र के दांतड़ा गांव निवासी 22 वर्षीय सुगना बैरवा ने शाहपुरा सेटेलाइट अस्पताल में सामान्य प्रसव के जरिए दूसरे बच्चे को जन्म दिया। प्रसव के बाद अचानक उसकी तबीयत बिगड़ने लगी और अत्यधिक रक्तस्राव शुरू हो गया।
स्थिति गंभीर होने पर चिकित्सकों ने उसे तत्काल महात्मा गांधी अस्पताल, भीलवाड़ा रेफर कर दिया। अस्पताल पहुंचने तक उसकी हालत अत्यंत नाजुक हो चुकी थी। चिकित्सकों के अनुसार उसकी पल्स और ब्लड प्रेशर नहीं मिल रहे थे।
जांच में पता चला कि—
- हीमोग्लोबिन केवल 1.8 ग्राम था।
- प्लेटलेट्स की संख्या लगभग 4 हजार रह गई थी।
- शरीर में अत्यधिक रक्तस्राव हो चुका था।
डॉक्टरों ने तुरंत आईसीयू में भर्ती कर वेंटिलेटर सपोर्ट दिया। रक्त और प्लेटलेट्स चढ़ाए गए तथा विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने लगातार इलाज किया, लेकिन अत्यधिक रक्तस्राव के कारण महिला की जान नहीं बचाई जा सकी।
पहली संतान की खुशी कुछ ही घंटों में मातम में बदली
Bhilwara Maternal Death का दूसरा मामला कोटड़ी क्षेत्र के कोठाज गांव से जुड़ा है। वर्तमान में पटेल नगर में रह रही 18 वर्षीय रानी बंजारा पहली बार मां बनी थीं।
एमसीएच यूनिट में उनका सामान्य प्रसव हुआ और स्वस्थ नवजात के जन्म से परिवार में खुशी का माहौल बन गया। लेकिन प्रसव के लगभग एक घंटे बाद अचानक उन्हें भारी रक्तस्राव शुरू हो गया।
चिकित्सकों ने तत्काल उपचार शुरू किया, लेकिन इलाज के दौरान गंभीर चिकित्सीय जटिलता (एम्बोलिज्म) सामने आई।
विशेषज्ञ डॉक्टरों ने लगातार प्रयास किए, लेकिन उनकी भी मृत्यु हो गई।
पहली बार मां बनने का सपना कुछ ही घंटों में अधूरा रह गया।
दो परिवारों की खुशियां एक साथ उजड़ गईं
दो अलग-अलग परिवारों में बच्चों के जन्म का इंतजार समाप्त हुआ था।
एक घर में दूसरे बच्चे के आने की खुशी थी।
दूसरे घर में पहली बार नवजात की किलकारी गूंजी थी।
लेकिन कुछ ही घंटों के भीतर दोनों परिवारों में मातम छा गया। नवजात बच्चों ने जन्म तो लिया, लेकिन अपनी मां का स्नेह नहीं पा सके।
अत्यधिक रक्तस्राव बना मौत का कारण
विशेषज्ञों के अनुसार प्रसव के दौरान या उसके तुरंत बाद अत्यधिक रक्तस्राव (Postpartum Hemorrhage) मातृ मृत्यु के सबसे बड़े कारणों में से एक माना जाता है।
यदि समय रहते इसकी पहचान और उपचार हो जाए तो अधिकांश मामलों में मरीज की जान बचाई जा सकती है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि गर्भावस्था के दौरान नियमित जांच, हीमोग्लोबिन स्तर की निगरानी और हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी की पहचान बेहद जरूरी होती है।
विशेषज्ञों ने बताई सबसे बड़ी जरूरत
वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत बनाने की आवश्यकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार—
- हाई-रिस्क गर्भावस्था की शुरुआती पहचान हो।
- आशा एवं एएनएम कार्यकर्ताओं को बेहतर प्रशिक्षण मिले।
- गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच सुनिश्चित हो।
- समय पर रेफरल व्यवस्था सक्रिय रहे।
- मेडिकल कॉलेजों में आपातकालीन मातृ उपचार की सुविधाएं लगातार मजबूत की जाएं।
गर्भवती महिलाओं के पोषण पर विशेष ध्यान जरूरी
विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में कई महिलाएं पर्याप्त पोषण नहीं ले पातीं, जिससे एनीमिया जैसी गंभीर समस्याएं बढ़ जाती हैं।
उन्होंने सलाह दी कि—
- दिन में 5 से 6 बार पौष्टिक भोजन दिया जाए।
- दूध, हरी सब्जियां और फल नियमित रूप से शामिल हों।
- आयरन और फोलिक एसिड की दवाएं समय पर ली जाएं।
- सभी प्रसव पूर्व जांचें निर्धारित समय पर कराई जाएं।
रेफरल नेटवर्क मजबूत होना समय की मांग
विशेषज्ञों का कहना है कि सब-सेंटर, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और मेडिकल कॉलेज के बीच रेफरल सिस्टम जितना मजबूत होगा, उतनी ही अधिक माताओं की जान बचाई जा सकेगी।
समय पर मरीज को उच्च चिकित्सा केंद्र तक पहुंचाना मातृ मृत्यु दर कम करने में सबसे महत्वपूर्ण कदम माना जाता है।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल
Bhilwara Maternal Death के इन दो मामलों के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि—
- ग्रामीण क्षेत्रों में नियमित मॉनिटरिंग बढ़नी चाहिए।
- प्रसव के बाद कम से कम 24 घंटे तक विशेष निगरानी जरूरी है।
- रक्त की उपलब्धता और आपातकालीन सुविधाएं हर समय तैयार रहनी चाहिए।
Bhilwara Maternal Death की ये दोनों घटनाएं बेहद दुखद हैं। दो परिवारों की खुशियां मातम में बदल गईं और दो नवजात बच्चों ने जन्म लेते ही अपनी मां को खो दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि गर्भावस्था के दौरान नियमित जांच, पर्याप्त पोषण, हाई-रिस्क मामलों की समय रहते पहचान और मजबूत रेफरल सिस्टम से ऐसी घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है। अब आवश्यकता इस बात की है कि मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाया जाए ताकि भविष्य में किसी परिवार को ऐसी त्रासदी का सामना न करना पड़े।

