घूंघट प्रथा पर रुचि गुर्जर का बड़ा बयान, जयपुर में छिड़ी नई Controversy
कांस से लेकर जयपुर तक चर्चा में रुचि गुर्जर, घूंघट बयान बना Controversy का केंद्र
जयपुर से एक बड़ा सामाजिक और सांस्कृतिक मुद्दा सामने आया है, जहां मॉडल और अभिनेत्री रुचि गुर्जर ने घूंघट प्रथा को लेकर अपने विचार खुलकर रखे हैं। उन्होंने कहा कि पर्दा प्रथा या घूंघट मुगलों के समय से आया है और इससे पहले यह भारतीय संस्कृति का हिस्सा नहीं रहा। उनके इस बयान के बाद एक बार फिर घूंघट प्रथा पर बहस तेज हो गई है। इस पूरे मुद्दे को अब एक Controversy के रूप में देखा जा रहा है।

जयपुर में मीडिया से बातचीत के दौरान रुचि गुर्जर ने कहा कि देवी-देवताओं की किसी भी छवि या ग्रंथों में घूंघट का कोई उल्लेख नहीं मिलता। उन्होंने कहा कि यह परंपरा हमारे मूल कल्चर का हिस्सा नहीं है, बल्कि समय के साथ सामाजिक दबाव में विकसित हुई एक प्रथा है। उनके अनुसार, आज भी कई जगहों पर महिलाओं को जबरन घूंघट में रहने के लिए मजबूर किया जाता है, जिसे वह सम्मान का प्रतीक मानने से इनकार करती हैं। यह बयान एक बड़ी Controversy को जन्म दे रहा है।
रुचि गुर्जर ने बताया कि उन्होंने अपने परिवार से ही इस बदलाव की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि उनकी भाभी पिछले चार साल से घूंघट में रहती थीं, लेकिन उन्होंने उनका घूंघट हटवाया। इसी तरह उनकी मां भी घूंघट करती थीं, जिन्हें भी उन्होंने इसके लिए प्रेरित किया कि वे इस प्रथा से बाहर आएं। उनका मानना है कि सामाजिक बदलाव की शुरुआत घर से होती है और यही उनकी इस Controversy का आधार भी बन गया है।
कांस फिल्म फेस्टिवल 2026 में अपने अनोखे अंदाज को लेकर चर्चा में आईं रुचि गुर्जर ने राजस्थान की पारंपरिक पोशाक और घूंघट के साथ रेड कारपेट पर कदम रखा था। उन्होंने बताया कि उनका उद्देश्य किसी संस्कृति का अपमान करना नहीं था, बल्कि महिलाओं को उनकी स्वतंत्रता और पसंद का अधिकार दिलाना था। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर इस मुद्दे को उठाकर वह दुनिया का ध्यान इस सामाजिक कुप्रथा की ओर आकर्षित करना चाहती थीं, जिससे यह Controversy और बढ़ गई।
उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी भी राजनीतिक प्रचार से जुड़ा नहीं था। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यदि उनके प्रयासों से सरकार तक यह मुद्दा पहुंचता है और इस दिशा में सुधार होता है, तो यह उनके लिए बड़ी सफलता होगी। इस बयान के बाद भी यह Controversy लगातार चर्चा में बनी हुई है।

मीडिया से बातचीत में उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग इसे संस्कृति मानते हैं, उन्हें यह समझना चाहिए कि अगर यह वास्तव में गर्व की बात है तो महिलाओं को इसे अपनाने के लिए मजबूर क्यों किया जाता है। वहीं अगर यह गलत है तो इसे समाप्त क्यों नहीं किया जाता। इस सवाल ने भी इस Controversy को और गहरा कर दिया है।
रुचि गुर्जर ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने राजस्थान की संस्कृति का सम्मान करते हुए ही पारंपरिक पोशाक पहनी थी। उन्होंने कहा कि वह राजस्थान की बेटी हैं और अपनी संस्कृति पर गर्व करती हैं। उनका विरोध केवल घूंघट प्रथा को लेकर है, न कि किसी परंपरा या संस्कृति को लेकर। इसके बावजूद यह पूरा मामला एक बड़ी Controversy बन चुका है।

सोशल मीडिया पर उनकी इस टिप्पणी के बाद मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग उनके विचारों का समर्थन कर रहे हैं और इसे महिलाओं की स्वतंत्रता की दिशा में एक साहसिक कदम बता रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसे परंपरा के खिलाफ मानते हुए आलोचना भी कर रहे हैं। यही कारण है कि यह मामला एक व्यापक Controversy बन गया है।

रुचि गुर्जर ने कहा कि कांस फिल्म फेस्टिवल में उन्होंने कमल का फूल भी पहना था, जिसके बाद कुछ लोगों ने यह अनुमान लगाया कि वह किसी राजनीतिक पार्टी से जुड़ी हैं। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका किसी भी राजनीतिक दल से कोई संबंध नहीं है और उनका उद्देश्य केवल सामाजिक मुद्दों को उठाना था। फिर भी यह Controversy खत्म होने का नाम नहीं ले रही।
उन्होंने कहा कि वह चाहती हैं कि महिलाएं खुलकर जीवन जी सकें और किसी भी तरह के सामाजिक दबाव से मुक्त हों। उनके अनुसार, सम्मान का आधार व्यक्ति का व्यवहार और सोच होनी चाहिए, न कि कोई बाहरी परंपरा या प्रतीक। यह विचार भी इस Controversy को नया आयाम दे रहा है।
जयपुर में दिए गए उनके इस बयान के बाद यह मुद्दा फिर से चर्चा में आ गया है कि क्या घूंघट वास्तव में संस्कृति का हिस्सा है या समय के साथ विकसित हुई एक सामाजिक प्रथा। इस पर समाज में अलग-अलग राय देखने को मिल रही है और यह पूरा विषय एक बड़ी Controversy के रूप में उभरकर सामने आया है।
फिलहाल रुचि गुर्जर के बयान ने एक नई बहस को जन्म दे दिया है और यह विषय सोशल मीडिया से लेकर सामाजिक चर्चाओं तक लगातार चर्चा में बना हुआ है। यह पूरी स्थिति अब एक राष्ट्रीय स्तर की Controversy का रूप लेती दिख रही है।
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