3 करोड़ की गड़बड़ी, फूड कोर्ट पर सवालों की बौछार: अब Additional Commissioner करेंगी जांच
Additional Commissioner बरेली में स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत विकसित किए गए फूड कोर्ट को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। करोड़ों रुपये की लागत से तैयार इस परियोजना पर वित्तीय अनियमितताओं, सरकारी धन के दुरुपयोग और स्ट्रीट वेंडरों के अधिकारों की अनदेखी जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। मामला इतना बढ़ गया कि अब शासन ने इसकी जांच के आदेश दे दिए हैं। शासन के निर्देश पर एडिशनल कमिश्नर प्रीति जायसवाल पूरे मामले की विस्तृत जांच करेंगी और अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेंगी।

जानकारी के अनुसार, स्मार्ट सिटी मिशन के तहत तैयार किए गए फूड कोर्ट का उद्देश्य शहर के रेहड़ी-पटरी और स्ट्रीट वेंडरों को एक व्यवस्थित स्थान उपलब्ध कराना था, ताकि उन्हें बेहतर सुविधाएं मिल सकें और शहर की यातायात व्यवस्था भी सुचारू बनी रहे। लेकिन अब आरोप लग रहे हैं कि इस मूल उद्देश्य से हटकर फूड कोर्ट का इस्तेमाल निजी व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा है।
शिकायतकर्ताओं का दावा है कि जिस परिसर को स्ट्रीट वेंडरों के लिए विकसित किया गया था, वहां रेडीमेड गारमेंट शोरूम और अन्य निजी कारोबारी गतिविधियों की तैयारी की जा रही है। इससे न केवल योजना के मूल उद्देश्य पर सवाल खड़े हो रहे हैं, बल्कि उन हजारों छोटे कारोबारियों और स्ट्रीट वेंडरों के हितों पर भी असर पड़ रहा है, जिनके लिए यह परियोजना बनाई गई थी।
मामले में सबसे गंभीर आरोप करीब 3 करोड़ 2 लाख रुपये की वित्तीय अनियमितता से जुड़े हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि परियोजना के निर्माण और संचालन में नियमों का पालन नहीं किया गया और सरकारी धन के उपयोग में गंभीर गड़बड़ियां हुई हैं। आरोप यह भी है कि इससे नगर निगम को आर्थिक नुकसान पहुंचा है।
विवाद का एक बड़ा कारण नवंबर 2024 में स्मार्ट सिटी लिमिटेड द्वारा एक निजी कंपनी को दिया गया 15 साल का ठेका भी है। व्यापार मंडल और अन्य शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि यह ठेका ऐसे नियमों और शर्तों पर दिया गया है, जिससे नगर निगम को हर साल लाखों रुपये के संभावित राजस्व का नुकसान होगा। उनका कहना है कि यदि परियोजना का संचालन पारदर्शी तरीके से किया जाता तो नगर निगम को कहीं अधिक आय प्राप्त हो सकती थी।
इसके अलावा फूड कोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायत में कहा गया है कि भीड़भाड़ वाले क्षेत्र में विकसित इस परिसर में अग्नि सुरक्षा मानकों का पर्याप्त पालन नहीं किया गया। यदि भविष्य में कोई दुर्घटना होती है तो इससे बड़ी जनहानि हो सकती है। इसलिए सुरक्षा संबंधी पहलुओं की भी जांच की मांग की गई है।
व्यापार मंडल द्वारा शासन स्तर पर शिकायत दर्ज कराए जाने के बाद सरकार ने मामले को गंभीरता से लिया है। शासन ने विस्तृत रिपोर्ट तलब करते हुए जांच के आदेश दिए हैं। एडिशनल कमिश्नर प्रीति जायसवाल अब सभी दस्तावेजों, टेंडर प्रक्रिया, वित्तीय लेन-देन और परियोजना के संचालन से जुड़े पहलुओं की समीक्षा करेंगी।
फिलहाल पूरे मामले पर नगर निगम, स्मार्ट सिटी लिमिटेड और संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। शहर के व्यापारी, स्ट्रीट वेंडर और आम नागरिक भी जांच के नतीजों का इंतजार कर रहे हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि करोड़ों रुपये की लागत से बनाया गया फूड कोर्ट आखिर अपने मूल उद्देश्य यानी स्ट्रीट वेंडरों के हित में काम करेगा या फिर निजी व्यावसायिक हितों का केंद्र बन जाएगा। इस सवाल का जवाब अब जांच रिपोर्ट आने के बाद ही मिल सकेगा, जिस पर पूरे शहर की निगाहें टिकी हुई हैं।

