राजस्थान पुलिस दलित शब्द प्रतिबंध: सरकारी दस्तावेजों में ‘दलित’ शब्द के प्रयोग पर रोक, जानें नए आदेश की पूरी जानकारी

राजस्थान पुलिस दलित शब्द प्रतिबंध को लेकर राज्य पुलिस मुख्यालय ने महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। नए आदेश के अनुसार अब राजस्थान पुलिस के किसी भी सरकारी दस्तावेज, एफआईआर, जांच रिपोर्ट, दैनिक डायरी, पत्राचार या प्रशासनिक रिकॉर्ड में ‘दलित’ शब्द का प्रयोग नहीं किया जाएगा। इसके स्थान पर केवल संविधान और कानून में मान्यता प्राप्त शब्द ‘अनुसूचित जाति’ (Scheduled Caste) का ही उपयोग अनिवार्य होगा।
यह निर्णय गृह विभाग, राजस्थान सरकार के निर्देशों और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पूर्व में जारी दिशा-निर्देशों के अनुपालन में लागू किया गया है। पुलिस मुख्यालय का कहना है कि सभी स्तरों पर एक समान और संवैधानिक शब्दावली का प्रयोग सुनिश्चित करना इस आदेश का मुख्य उद्देश्य है।
राजस्थान पुलिस दलित शब्द प्रतिबंध: सरकारी रिकॉर्ड में अब नहीं लिखा जाएगा ‘दलित’
राजस्थान पुलिस मुख्यालय की ओर से जारी सर्कुलर में स्पष्ट किया गया है कि पुलिस विभाग के सभी कार्यालयों, जिला पुलिस अधीक्षकों, पुलिस आयुक्तालयों और थानों में सरकारी दस्तावेज तैयार करते समय ‘दलित’ शब्द का उपयोग नहीं किया जाएगा।
इसके बजाय प्रत्येक सरकारी अभिलेख, केस डायरी, एफआईआर, जांच रिपोर्ट, नोटशीट, विभागीय पत्राचार और अन्य आधिकारिक रिकॉर्ड में केवल ‘अनुसूचित जाति’ शब्द का ही प्रयोग किया जाएगा।
अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि भविष्य में तैयार होने वाले सभी दस्तावेज इसी मानक के अनुरूप बनाए जाएं।
सुप्रीम कोर्ट और केंद्र सरकार के निर्देशों के अनुरूप फैसला
जारी आदेश में बताया गया है कि यह निर्णय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पूर्व में जारी दिशा-निर्देशों तथा माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों की पालना के तहत लिया गया है।
गृह विभाग की ओर से भी पुलिस विभाग को संवैधानिक शब्दावली का प्रयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए थे। इन्हीं निर्देशों के आधार पर राजस्थान पुलिस मुख्यालय ने सभी इकाइयों को नया सर्कुलर जारी किया है।
केवल ‘अनुसूचित जाति’ शब्द होगा मान्य
नए निर्देशों के अनुसार सरकारी दस्तावेजों में अनुसूचित जाति से संबंधित सभी मामलों में केवल निम्नलिखित शब्दों का प्रयोग किया जाएगा—
- हिंदी में — अनुसूचित जाति
- अंग्रेजी में — Scheduled Caste
यदि किसी अन्य क्षेत्रीय भाषा में दस्तावेज तैयार किया जाता है तो वहां भी उसी का कानूनी एवं अधिकृत अनुवाद ही इस्तेमाल किया जाएगा।
एफआईआर और जांच रिपोर्टों पर भी लागू होगा आदेश
यह आदेश केवल कार्यालयी पत्राचार तक सीमित नहीं रहेगा। पुलिस विभाग के अनुसार इसकी पालना निम्नलिखित सभी दस्तावेजों में अनिवार्य होगी—
- एफआईआर
- केस डायरी
- जांच रिपोर्ट
- दैनिक रोजनामचा
- विभागीय पत्राचार
- विभिन्न आवेदन प्रपत्र
- प्रमाण पत्र
- विभागीय अभिलेख
- प्रशासनिक रिकॉर्ड
अर्थात पुलिस विभाग के पूरे प्रशासनिक ढांचे में एक समान संवैधानिक शब्दावली लागू रहेगी।
सभी जिलों और पुलिस आयुक्तालयों को भेजे गए निर्देश
2 जुलाई 2026 को जारी आदेश की प्रतियां राज्यभर के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को भेजी गई हैं। इनमें पुलिस महानिदेशक कार्यालय, पुलिस आयुक्त जयपुर, पुलिस आयुक्त जोधपुर, सभी जिला पुलिस अधीक्षक (SP), पुलिस उपायुक्त (DCP) तथा अन्य फील्ड अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्र के सभी थानों और कार्यालयों में इस आदेश का पालन सुनिश्चित कराएं।
इसके साथ ही अधीनस्थ अधिकारियों एवं थानाधिकारियों को भी तत्काल प्रभाव से नए निर्देश लागू करने के आदेश दिए गए हैं।
प्रशासनिक व्यवस्था में आएगा बदलाव
इस आदेश के लागू होने के बाद पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली में भाषाई स्तर पर महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिलेगा। अब किसी भी व्यक्ति की सामाजिक श्रेणी का उल्लेख करते समय केवल वही शब्द प्रयोग किए जाएंगे जिन्हें संविधान और कानून में मान्यता प्राप्त है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे सरकारी दस्तावेजों में एकरूपता आएगी और प्रशासनिक प्रक्रिया अधिक स्पष्ट तथा कानूनी रूप से सटीक बनेगी।
आम नागरिकों पर क्या होगा प्रभाव?
राजस्थान पुलिस के इस फैसले का प्रभाव उन सभी लोगों पर पड़ेगा जिनके मामलों का रिकॉर्ड पुलिस विभाग में तैयार किया जाता है। अब शिकायत, एफआईआर, जांच रिपोर्ट और अन्य आधिकारिक दस्तावेजों में वर्ग विशेष के संदर्भ में केवल संवैधानिक शब्दावली का ही उपयोग किया जाएगा।
इससे सरकारी रिकॉर्ड तैयार करने की प्रक्रिया अधिक मानकीकृत होगी और सभी अधिकारियों के लिए समान भाषा का उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा।
आदेश का उद्देश्य क्या है?
पुलिस विभाग के अनुसार इस निर्णय का उद्देश्य सरकारी रिकॉर्ड में संवैधानिक और विधिक रूप से मान्य शब्दों का प्रयोग सुनिश्चित करना है। इससे विभागीय दस्तावेजों में एकरूपता बनी रहेगी और भविष्य में सभी प्रशासनिक एवं कानूनी कार्यवाही एक समान मानकों के अनुसार संचालित की जा सकेगी।
राज्य सरकार और पुलिस मुख्यालय ने सभी अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि आदेश का कड़ाई से पालन किया जाए तथा किसी भी सरकारी दस्तावेज में प्रतिबंधित शब्दावली का उपयोग न किया जाए।
निष्कर्ष
राजस्थान पुलिस दलित शब्द प्रतिबंध से जुड़ा यह नया आदेश पुलिस विभाग के आधिकारिक कामकाज में महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है। अब राज्य के सभी थानों, पुलिस कार्यालयों और प्रशासनिक अभिलेखों में केवल ‘अनुसूचित जाति’ अथवा ‘Scheduled Caste’ शब्द का ही प्रयोग किया जाएगा। यह व्यवस्था गृह विभाग के निर्देशों, केंद्र सरकार की गाइडलाइन और सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप लागू की जा रही है, जिससे सरकारी दस्तावेजों में संवैधानिक शब्दावली का एक समान उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।

