राज्यसभा चुनाव मामला: सुप्रीम कोर्ट ने मीनाक्षी नटराजन की याचिका खारिज की, चुनाव याचिका दायर करने की दी सलाह
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन को बड़ा झटका देते हुए उनकी याचिका खारिज कर दी। नटराजन ने राज्यसभा चुनाव के लिए अपना नामांकन पत्र रद्द किए जाने के फैसले को चुनौती देते हुए शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मामलों में सीधे रिट याचिका पर सुनवाई नहीं की जा सकती और यदि किसी उम्मीदवार को आपत्ति है तो उसे चुनाव याचिका के माध्यम से ही अपनी बात रखनी होगी।
यह मामला जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एएस चंदूरकर की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आया था। सुनवाई के दौरान अदालत ने संविधान के प्रावधानों का उल्लेख करते हुए कहा कि चुनावी प्रक्रिया में न्यायालयों के हस्तक्षेप की सीमाएं स्पष्ट रूप से तय की गई हैं। संविधान का अनुच्छेद 329 चुनावों से संबंधित विवादों के निपटारे के लिए विशेष व्यवस्था प्रदान करता है और चुनाव प्रक्रिया के दौरान अदालतों के सीधे हस्तक्षेप को सीमित करता है।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि चुनाव से जुड़े विवादों का समाधान चुनाव याचिका के जरिए किया जाना चाहिए। इसलिए इस मामले में दाखिल रिट याचिका सुनवाई योग्य नहीं है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि वह इस बात पर कोई टिप्पणी नहीं कर रही है कि मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द करने का निर्णय सही था या गलत। अदालत का ध्यान केवल इस प्रश्न पर था कि क्या इस मामले में सीधे रिट याचिका पर सुनवाई की जा सकती है।
खंडपीठ ने कहा कि चुनाव संबंधी मामलों के लिए संविधान और कानून में अलग प्रक्रिया निर्धारित की गई है। यदि कोई उम्मीदवार चुनाव अधिकारी या निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़े किसी निर्णय से असंतुष्ट है, तो वह चुनाव परिणाम के बाद चुनाव याचिका दायर कर सकता है। यही उचित और वैधानिक उपाय है। अदालत ने मीनाक्षी नटराजन को भी इसी कानूनी विकल्प का उपयोग करने की सलाह दी।
सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी दोहराया कि चुनाव प्रक्रिया को अनावश्यक न्यायिक हस्तक्षेप से बचाना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए आवश्यक है। चुनावों की निष्पक्षता और समयबद्धता बनाए रखने के लिए संविधान निर्माताओं ने विशेष प्रावधान किए हैं। इसी कारण चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद अधिकांश विवादों को चुनाव याचिका के माध्यम से ही चुनौती दी जाती है।
मीनाक्षी नटराजन की ओर से दायर याचिका में दावा किया गया था कि उनका नामांकन पत्र गलत तरीके से रद्द किया गया है और इस निर्णय की न्यायिक समीक्षा की जानी चाहिए। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील पर विचार करने के बजाय पहले यह देखा कि क्या याचिका संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप है। अदालत ने पाया कि अनुच्छेद 329 के तहत इस तरह के विवादों को सीधे रिट याचिका के माध्यम से नहीं उठाया जा सकता।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला चुनावी कानूनों की स्थापित व्यवस्था के अनुरूप है। पूर्व में भी कई मामलों में अदालतें यह स्पष्ट कर चुकी हैं कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान न्यायिक हस्तक्षेप सीमित होना चाहिए और उम्मीदवारों को उपलब्ध वैधानिक उपायों का ही सहारा लेना चाहिए।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद मीनाक्षी नटराजन के पास चुनाव याचिका दायर करने का विकल्प खुला हुआ है। यदि वह चाहें तो संबंधित कानूनी मंच पर जाकर अपने नामांकन रद्द किए जाने के फैसले को चुनौती दे सकती हैं। वहीं सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय को चुनावी विवादों के निपटारे से जुड़े संवैधानिक सिद्धांतों की पुनर्पुष्टि के रूप में देखा जा रहा है।

