राजस्थान में 8 दिन की देरी से पहुंचेगा मानसून, अगले 48 घंटे में होगी एंट्री, कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट
राजस्थान में भीषण गर्मी और उमस से परेशान लोगों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। मौसम विभाग और मौसम विशेषज्ञों के अनुसार इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून अगले 48 घंटों के भीतर राजस्थान में प्रवेश कर सकता है। हालांकि इस बार मानसून तय समय से करीब 8 दिन की देरी से पहुंच रहा है। पिछले 13 वर्षों में यह तीसरी बार होगा जब मानसून जुलाई महीने में राजस्थान में दस्तक देगा। सामान्य तौर पर मानसून जून के अंतिम सप्ताह तक राज्य के अधिकांश हिस्सों में पहुंच जाता है, लेकिन इस बार इसकी रफ्तार धीमी रहने के कारण इंतजार लंबा हो गया।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार मानसून के प्रवेश के साथ ही राज्य के कई हिस्सों में बारिश की गतिविधियां तेज होने की संभावना है। सबसे पहले कोटा और उदयपुर संभाग के कई जिलों में अच्छी बारिश होने का अनुमान है। इन क्षेत्रों में कुछ स्थानों पर भारी बारिश भी हो सकती है। इसके बाद धीरे-धीरे मानसून पूरे प्रदेश में सक्रिय होगा और 6 जुलाई तक राज्य के अधिकांश जिलों में बारिश का सिलसिला शुरू होने की उम्मीद जताई गई है।

हालांकि मानसून की एंट्री राहत लेकर आएगी, लेकिन जुलाई महीने को लेकर मौसम विशेषज्ञों का अनुमान पूरी तरह उत्साहजनक नहीं है। इस बार जुलाई में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना जताई गई है। यदि ऐसा होता है तो कृषि क्षेत्र पर इसका असर पड़ सकता है। राजस्थान के कई हिस्सों में खेती पूरी तरह मानसूनी बारिश पर निर्भर रहती है। ऐसे में किसानों की नजर अब मानसून की सक्रियता और आगामी वर्षा पर टिकी हुई है।
मानसून के पहुंचने से पहले भी मौसम का मिजाज पूरी तरह बदला हुआ है। आज राज्य के 24 जिलों में तेज आंधी और बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग ने कई स्थानों पर गरज-चमक के साथ तेज बारिश, बिजली गिरने और तेज हवाएं चलने की संभावना व्यक्त की है। कुछ इलाकों में हवा की रफ्तार काफी तेज हो सकती है, जिससे पेड़ गिरने, बिजली लाइनों को नुकसान पहुंचने और यातायात प्रभावित होने की आशंका है।
मौसम विभाग ने अगले तीन दिनों तक अंधड़ की भी चेतावनी जारी की है। तेज हवाओं के साथ धूल भरी आंधी चल सकती है, जिसके बाद कई क्षेत्रों में बारिश होने की संभावना है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह प्री-मानसून गतिविधियों का हिस्सा है और इसी के बाद मानसून तेजी से आगे बढ़ेगा।
राजस्थान के दक्षिणी और दक्षिण-पूर्वी जिलों में सबसे पहले मानसून का असर दिखाई देगा। कोटा, उदयपुर, बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़, झालावाड़ और आसपास के क्षेत्रों में अच्छी बारिश होने की संभावना है। इसके बाद जयपुर, अजमेर, भरतपुर, जोधपुर, बीकानेर, सीकर, अलवर और अन्य जिलों में भी बारिश का दायरा बढ़ने की उम्मीद है।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून की देरी से खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित हो सकती है। हालांकि यदि जुलाई के पहले सप्ताह में अच्छी बारिश होती है तो किसान समय रहते खेती का कार्य शुरू कर सकेंगे। राज्य में बाजरा, सोयाबीन, मक्का, मूंग, उड़द, कपास और तिल जैसी खरीफ फसलें मानसून पर ही निर्भर करती हैं।
मौसम विभाग ने लोगों को सावधानी बरतने की सलाह भी दी है। तेज आंधी, बिजली गिरने और भारी बारिश के दौरान खुले स्थानों पर जाने से बचने, कमजोर पेड़ों और बिजली के खंभों से दूरी बनाए रखने तथा आवश्यक होने पर ही यात्रा करने की सलाह दी गई है। वाहन चालकों से भी खराब मौसम के दौरान अतिरिक्त सतर्कता बरतने को कहा गया है।
फिलहाल पूरे राजस्थान की नजर मानसून की पहली बारिश पर टिकी हुई है। लंबे इंतजार के बाद अगले 48 घंटों में मानसून की दस्तक से गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार मानसून की चाल सामान्य से कुछ अलग रह सकती है, इसलिए आने वाले दिनों में मौसम की गतिविधियों पर लगातार नजर रखना जरूरी होगा। किसानों, आम लोगों और प्रशासन सभी के लिए अगले कुछ दिन बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

