राजस्थान में बड़े अपराधियों पर कसेगा शिकंजा, डीजीपी बोले- अवैध संपत्तियां होंगी कुर्क, स्मार्ट पुलिसिंग पर रहेगा फोकस
जयपुर। राजस्थान पुलिस अब अपराध होने के बाद केवल कार्रवाई करने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि अपराध की रोकथाम, अपराधियों की आर्थिक कमर तोड़ने और तकनीक आधारित स्मार्ट पुलिसिंग को अपनी प्राथमिकता बनाएगी। यह बात राजस्थान पुलिस अकादमी में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान महानिदेशक पुलिस (डीजीपी) राजीव कुमार शर्मा ने कही। उन्होंने पिछले छह महीनों में पुलिस विभाग की उपलब्धियों का रिपोर्ट कार्ड भी पेश किया और भविष्य की रणनीति साझा की।
डीजीपी राजीव कुमार शर्मा ने स्पष्ट कहा कि प्रदेश में सक्रिय बड़े ड्रग माफिया, संगठित अपराधियों और गैंगस्टर्स के खिलाफ अभियान को और तेज किया जाएगा। ऐसे अपराधियों की अवैध रूप से अर्जित संपत्तियों की पहचान कर उन्हें कुर्क करने की कार्रवाई प्राथमिकता के आधार पर होगी। उनका कहना था कि जब तक अपराधियों की आर्थिक ताकत खत्म नहीं होगी, तब तक अपराध पर पूरी तरह नियंत्रण संभव नहीं है। इसलिए अब पुलिस आर्थिक अपराधों और अवैध संपत्तियों पर विशेष फोकस करेगी।

उन्होंने कहा कि राजस्थान पुलिस ने पिछले छह महीनों में अपराध नियंत्रण, कानून-व्यवस्था, साइबर अपराध, महिला सुरक्षा और आधुनिक तकनीक आधारित पुलिसिंग के क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। राज्य में गंभीर अपराधों में 4.65 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है, जो पुलिस की प्रभावी रणनीति और सतत कार्रवाई का परिणाम है। इसके अलावा पेपर लीक जैसे संगठित अपराधों पर भी प्रभावी अंकुश लगाया गया है और इस नेटवर्क से जुड़े आरोपियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की गई है।
डीजीपी शर्मा ने कहा कि नशा तस्करों के खिलाफ भी व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। पुलिस केवल छोटे स्तर के तस्करों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए बड़े सरगनाओं तक पहुंचेगी। ड्रग्स की सप्लाई चेन को तोड़ने के लिए विभिन्न एजेंसियों के साथ समन्वय बनाकर कार्रवाई की जा रही है। साथ ही गैंगस्टर्स और संगठित अपराधियों के खिलाफ भी लगातार अभियान जारी रहेगा ताकि प्रदेश में अपराध का ग्राफ और कम किया जा सके।
साइबर अपराधों को लेकर भी राजस्थान पुलिस नई रणनीति पर काम कर रही है। डीजीपी ने बताया कि डिजिटल युग में साइबर ठगी के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, इसलिए तकनीकी संसाधनों को मजबूत किया जा रहा है। साइबर पुलिस स्टेशनों को आधुनिक उपकरणों से लैस किया जा रहा है और पुलिसकर्मियों को नई तकनीकों का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है ताकि ऑनलाइन धोखाधड़ी और साइबर अपराधों की जांच तेजी और प्रभावी तरीके से की जा सके।
महिला सुरक्षा को लेकर भी राजस्थान पुलिस ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। डीजीपी ने कहा कि महिलाओं और बालिकाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है। महिला हेल्पलाइन, साइबर सुरक्षा जागरूकता अभियान और संवेदनशील मामलों की मॉनिटरिंग को और मजबूत बनाया गया है। पुलिस का उद्देश्य केवल अपराधियों को गिरफ्तार करना नहीं, बल्कि महिलाओं में सुरक्षा का विश्वास पैदा करना भी है।
डीजीपी शर्मा ने बताया कि पुलिसिंग को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और आधुनिक बनाने के लिए तकनीक का व्यापक उपयोग किया जा रहा है। डिजिटल मॉनिटरिंग, डेटा एनालिसिस, सीसीटीवी नेटवर्क, ऑनलाइन शिकायत प्रणाली और स्मार्ट सर्विलांस जैसी व्यवस्थाओं को और मजबूत किया जाएगा। इससे अपराध की रोकथाम के साथ-साथ मामलों की जांच में भी तेजी आएगी।
उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना राजस्थान पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकता है। पुलिस मुख्यालय से लेकर जिला स्तर तक लगातार समीक्षा की जा रही है और अपराध की प्रकृति के अनुसार विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। संगठित अपराध, नशा तस्करी, साइबर फ्रॉड, गैंगवार और अन्य गंभीर अपराधों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई गई है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के अंत में डीजीपी राजीव कुमार शर्मा ने कहा कि राजस्थान पुलिस आने वाले समय में और अधिक प्रोफेशनल, तकनीक आधारित तथा जनता के प्रति जवाबदेह पुलिसिंग मॉडल पर काम करेगी। अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, अवैध संपत्तियों की कुर्की, आधुनिक जांच प्रणाली और जनता के सहयोग से प्रदेश में कानून-व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाया जाएगा, ताकि राजस्थान को सुरक्षित और अपराध मुक्त राज्य बनाने के लक्ष्य को प्रभावी ढंग से हासिल किया जा सके।

