मियाजाकी आम की खेती: सीकर के किसान ने उगाया 3 लाख रुपए किलो वाला आम, 20 बीघा में 35 फलों की खेती
मियाजाकी आम की खेती से सीकर के किसान ने बनाई खास पहचान
मियाजाकी आम की खेती अब राजस्थान के सीकर जिले में भी प्रयोग के तौर पर सफल होती दिखाई दे रही है। जापान की प्रसिद्ध और महंगी आम की किस्म मियाजाकी की खेती कल्याणपुरा निवासी किसान रामावतार बुगालिया अपने ऑर्गेनिक फार्म पर कर रहे हैं।
मियाजाकी आम को दुनिया की महंगी आम की किस्मों में गिना जाता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत कई बार लाखों रुपए प्रति किलो तक पहुंचने की खबरें सामने आती रही हैं। सीकर जैसे अपेक्षाकृत शुष्क इलाके में इस किस्म को उगाना किसान के लिए एक अलग कृषि प्रयोग है।
रामावतार बुगालिया ने कला वर्ग से पढ़ाई की है, लेकिन पिछले करीब 15 वर्षों से वह अपने फार्म पर अलग-अलग फल और सब्जियों की नई किस्मों का परीक्षण करते आ रहे हैं।

मियाजाकी आम की खेती के लिए अपनाई प्राकृतिक तकनीक
किसान ने बताया कि उन्होंने पिछले साल फरवरी में गुजरात के वापी क्षेत्र से मियाजाकी आम के पौधे मंगवाकर अपने फार्म में लगाए थे। अब इन पौधों में फल आना शुरू हो गया है।
खास बात यह है कि किसान खेती में रासायनिक साधनों के बजाय प्राकृतिक तरीकों को प्राथमिकता दे रहे हैं। खाद और पौधों में रोग नियंत्रण के लिए गोमूत्र, छाछ, गुड़ और नीम से तैयार किए गए प्राकृतिक घोल का इस्तेमाल किया जा रहा है।
फार्म पर गिर नस्ल की चार गाय भी हैं, जिनसे प्राकृतिक खेती के लिए जरूरी संसाधन उपलब्ध होते हैं।
20 बीघा के ऑर्गेनिक फार्म में आम की कई किस्में
नवलगढ़ से करीब 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित बुगालिया का ऑर्गेनिक फार्म करीब 20 बीघा क्षेत्र में फैला हुआ है।
फार्म में आम के लगभग 500 पेड़ लगाए गए हैं। इनमें करीब 300 पेड़ केसर आम की किस्म के हैं, जबकि बाकी 200 पेड़ों पर अलग-अलग किस्मों का प्रयोग किया जा रहा है।
इनमें नूरजहां, ब्लैक मैंगो, स्वर्णरेखा, हापुस, लंगड़ा, दशहरी, बनाना मैंगो और आम्रपाली जैसी किस्में शामिल हैं।
किसान का उद्देश्य केवल एक प्रकार के फल की खेती तक सीमित रहना नहीं है। उनके पूरे फार्म में करीब 35 तरह के फलदार पौधे मौजूद हैं।
मियाजाकी आम के साथ 35 तरह के फलों का उत्पादन
फार्म के करीब चार बीघा हिस्से में बेर की अलग-अलग उन्नत किस्मों की खेती की जा रही है। इनमें थाई एप्पल, गोला और सिंदूरी जैसी किस्में शामिल हैं।
इसके अलावा लगभग डेढ़ बीघा जमीन में अन्य फलदार पौधे लगाए गए हैं। किसान लंबे समय से नई-नई किस्मों पर प्रयोग करते रहे हैं और अपने कृषि अनुभव के आधार पर खेती की तकनीकों में बदलाव करते रहते हैं।
फार्म पर तैयार होने वाले उत्पादों को दिल्ली के बाजार तक भी भेजा जाता है।
हर साल 10 से 15 लाख रुपए की आय
बुगालिया के अनुसार, उनके बगीचे से हर साल करीब 10 से 15 लाख रुपए तक की आय हो जाती है। इसके अलावा लगभग दो बीघा क्षेत्र में लगाए गए पपीते से भी उन्हें सालाना करीब 4 से 5 लाख रुपए की आमदनी होती है।
पपीते की बेहतर पैदावार के लिए किसान को राज्य स्तर पर पुरस्कार भी मिल चुका है।
इससे साफ है कि किसान ने पारंपरिक खेती के बजाय अलग-अलग फसलों और फलों की उन्नत किस्मों पर प्रयोग करके अपनी आमदनी के नए रास्ते तैयार किए हैं।
‘अनोखी ढाणी’ बना किसानों के लिए सीख का केंद्र
रामावतार बुगालिया ने अपने फार्म को ‘अनोखी ढाणी’ नाम दिया है। यह फार्म अब केवल खेती का स्थान नहीं रह गया है, बल्कि कृषि प्रयोग और प्राकृतिक खेती को समझने के लिए भी लोगों को आकर्षित कर रहा है।
देश के अलग-अलग हिस्सों से कृषि विशेषज्ञ, किसान, विद्यार्थी और पर्यटक यहां पहुंचकर प्राकृतिक खेती और नई कृषि तकनीकों की जानकारी लेते हैं।
किसान पिछले 15 वर्षों से अपने फार्म पर नई फल और सब्जी किस्मों के ट्रायल कर रहे हैं। इसी अनुभव ने उन्हें मियाजाकी जैसे प्रीमियम आम की किस्म को राजस्थान की परिस्थितियों में उगाने का अवसर दिया।
राजस्थान में प्रीमियम फलों की खेती की बढ़ती संभावनाएं
मियाजाकी आम की खेती का यह प्रयोग राजस्थान के किसानों के लिए भी दिलचस्प माना जा सकता है। हालांकि किसी भी विदेशी या प्रीमियम फल की व्यावसायिक खेती शुरू करने से पहले स्थानीय मिट्टी, मौसम, पानी, पौधों की देखभाल और बाजार की मांग का अध्ययन जरूरी है।
सीकर के किसान का यह फार्म दिखाता है कि सीमित संसाधनों के बावजूद नई किस्मों के साथ प्रयोग और प्राकृतिक खेती की तकनीकों को अपनाकर कृषि में नए अवसर तलाशे जा सकते हैं।
मियाजाकी आम की वास्तविक बाजार कीमत उत्पादन की गुणवत्ता, मांग, बिक्री स्थान और सीजन के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। इसलिए लाखों रुपए प्रति किलो की कीमत को हर किसान की संभावित बिक्री कीमत नहीं माना जाना चाहिए।
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