महेश दीक्षित बने नए आईबी प्रमुख, दो साल संभालेंगे देश की आंतरिक सुरक्षा जिम्मेदारी
केंद्र सरकार ने देश की सबसे महत्वपूर्ण आंतरिक खुफिया एजेंसी इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) के नए प्रमुख के रूप में वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी महेश दीक्षित की नियुक्ति की है। वे 30 जून 2026 को सेवानिवृत्त हो रहे मौजूदा आईबी डायरेक्टर तपन कुमार डेका का स्थान लेंगे। सरकार ने महेश दीक्षित को दो वर्ष के कार्यकाल के लिए इंटेलिजेंस ब्यूरो का निदेशक नियुक्त किया है। यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब देश के सामने आतंकवाद, साइबर अपराध, सीमा पार से होने वाली घुसपैठ और आंतरिक सुरक्षा से जुड़ी कई बड़ी चुनौतियां मौजूद हैं। ऐसे में महेश दीक्षित के अनुभव को देखते हुए सरकार ने उन्हें यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है।
महेश दीक्षित 1993 बैच के आंध्र प्रदेश कैडर के भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी हैं। वर्तमान में वे इंटेलिजेंस ब्यूरो में स्पेशल डायरेक्टर के पद पर कार्यरत थे और एजेंसी के दूसरे सबसे वरिष्ठ अधिकारी माने जाते थे। लंबे समय से खुफिया तंत्र में कार्य करने के कारण उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कई संवेदनशील मामलों का व्यापक अनुभव है। उन्होंने देश के विभिन्न हिस्सों में कई अहम जिम्मेदारियां निभाई हैं और उनकी पहचान एक कुशल तथा अनुभवी खुफिया अधिकारी के रूप में की जाती है।
महेश दीक्षित इससे पहले जम्मू-कश्मीर में सब्सिडियरी इंटेलिजेंस ब्यूरो (एसआईबी) के प्रमुख भी रह चुके हैं। जम्मू-कश्मीर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में सेवा के दौरान उन्होंने आतंकवाद विरोधी अभियानों, सीमा सुरक्षा, अलगाववादी गतिविधियों और आतंकी नेटवर्क की निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने और समय पर खुफिया सूचनाएं उपलब्ध कराने में भी उनका योगदान उल्लेखनीय माना जाता है। इसी अनुभव को देखते हुए उन्हें देश की सबसे बड़ी आंतरिक खुफिया एजेंसी का नेतृत्व सौंपा गया है।
आईबी भारत की सबसे पुरानी और प्रमुख खुफिया एजेंसियों में शामिल है। इसका मुख्य कार्य देश की आंतरिक सुरक्षा से जुड़े खतरों की निगरानी करना, आतंकवादी गतिविधियों पर नजर रखना, जासूसी नेटवर्क का पता लगाना, संगठित अपराधों की जानकारी जुटाना और सरकार को समय-समय पर महत्वपूर्ण खुफिया इनपुट उपलब्ध कराना है। बदलते सुरक्षा परिदृश्य में साइबर सुरक्षा, डिजिटल निगरानी और तकनीकी खुफिया जानकारी जुटाने की जिम्मेदारी भी लगातार बढ़ती जा रही है। ऐसे में नए निदेशक के सामने कई महत्वपूर्ण चुनौतियां होंगी।
मौजूदा आईबी प्रमुख तपन कुमार डेका का कार्यकाल 30 जून 2026 को समाप्त हो रहा है। वे 1988 बैच के हिमाचल प्रदेश कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं और जुलाई 2022 में इंटेलिजेंस ब्यूरो के निदेशक बने थे। उनके कार्यकाल के दौरान देश में कई बड़े सुरक्षा अभियानों को सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया। आतंकवाद विरोधी रणनीतियों को मजबूत करने, सीमा पार से होने वाली घुसपैठ पर नजर रखने और विभिन्न राज्यों की सुरक्षा एजेंसियों के साथ बेहतर तालमेल स्थापित करने में उनकी भूमिका अहम रही।
तपन कुमार डेका के कार्यकाल को देखते हुए केंद्र सरकार ने उन्हें दो बार सेवा विस्तार भी दिया था। उनके नेतृत्व में आईबी ने कई संवेदनशील मामलों में महत्वपूर्ण खुफिया सूचनाएं जुटाईं, जिनकी मदद से सुरक्षा एजेंसियों ने कई संभावित आतंकी साजिशों को समय रहते विफल किया। उनके कार्यकाल को देश की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
महेश दीक्षित के सामने अब देश की बदलती सुरक्षा चुनौतियों से निपटने की जिम्मेदारी होगी। आतंकवाद के साथ-साथ साइबर हमले, फेक न्यूज, डिजिटल जासूसी, सीमा पार से ड्रोन गतिविधियां और संगठित अपराध जैसे नए खतरे लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए खुफिया तंत्र को और अधिक मजबूत बनाना उनकी प्राथमिकता होगी।
सरकार को उम्मीद है कि महेश दीक्षित के नेतृत्व में इंटेलिजेंस ब्यूरो देश की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था को और प्रभावी बनाएगा। उनके लंबे अनुभव, पेशेवर कार्यशैली और आतंकवाद विरोधी अभियानों में विशेषज्ञता का लाभ देश की सुरक्षा एजेंसियों को मिलेगा। आने वाले दो वर्षों में उनकी भूमिका भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा को और मजबूत बनाने में बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

