मंडोर खुली जेल शादी: उम्रकैद की सजा काट रहे मूलाराम और सीमा ने लिए सात फेरे, जेल परिसर में बनी अनोखी मिसाल

मंडोर खुली जेल शादी राजस्थान के जोधपुर से सामने आई एक ऐसी प्रेरणादायक घटना है, जिसने जेल सुधार और पुनर्वास की दिशा में नई मिसाल पेश की है। राजस्थान हाईकोर्ट की अनुमति मिलने के बाद जोधपुर स्थित मंडोर खुली जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे दो बंदी मूलाराम और सीमा विवाह बंधन में बंध गए। जेल परिसर में पूरे धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ दोनों ने सात फेरे लेकर नए जीवन की शुरुआत की।
यह विवाह केवल दो लोगों का मिलन नहीं, बल्कि सुधारात्मक न्याय व्यवस्था और मानवता के प्रति सकारात्मक सोच का भी प्रतीक माना जा रहा है।
मंडोर खुली जेल शादी में जेल परिसर बना विवाह स्थल
जोधपुर की मंडोर खुली जेल में आयोजित इस विशेष विवाह समारोह में मूलाराम दूल्हे और सीमा दुल्हन के रूप में पहुंचे। दोनों ने एक-दूसरे को वरमाला पहनाई और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच सात फेरे लेकर विवाह संपन्न किया।
समारोह सादगीपूर्ण लेकिन भावनात्मक माहौल में आयोजित हुआ। जेल प्रशासन ने सभी आवश्यक व्यवस्थाएं कीं ताकि विवाह शांतिपूर्ण और नियमों के अनुरूप संपन्न हो सके।
21 बारातियों की मौजूदगी में संपन्न हुआ विवाह

मंडोर खुली जेल शादी समारोह में कुल 21 बाराती शामिल हुए। इनमें जेल प्रशासन के अधिकारी, कर्मचारी और सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मी प्रमुख रूप से मौजूद रहे।
कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों ने नवविवाहित जोड़े को शुभकामनाएं दीं। विवाह के बाद मिठाई बांटी गई और सभी ने दोनों के नए जीवन के लिए मंगलकामनाएं व्यक्त कीं।
राजस्थान हाईकोर्ट की अनुमति के बाद मिली शादी की मंजूरी
इस अनोखे विवाह के पीछे राजस्थान हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय रहा। मूलाराम और सीमा दोनों अलग-अलग हत्या के मामलों में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं।
अच्छे आचरण के आधार पर दोनों को मंडोर की खुली जेल में रखा गया था। इसी दौरान दोनों एक-दूसरे के संपर्क में आए और जीवनसाथी बनने का निर्णय लिया।
इसके बाद दोनों ने अदालत से विवाह की अनुमति मांगी। मामले की सुनवाई के बाद राजस्थान हाईकोर्ट ने मानवाधिकार, पुनर्वास और सुधारात्मक न्याय व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए विवाह की अनुमति दी और आवश्यक पैरोल संबंधी निर्देश जारी किए।
मंडोर खुली जेल शादी क्यों बनी खास?
यह विवाह इसलिए भी चर्चा का विषय बना क्योंकि जेल परिसर में इस तरह का आयोजन बहुत कम देखने को मिलता है।
जेल प्रशासन के अनुसार खुली जेल व्यवस्था का उद्देश्य केवल सजा पूरी करवाना नहीं, बल्कि बंदियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना और उनमें सकारात्मक बदलाव लाना भी है।
मूलाराम और सीमा का विवाह इसी सोच को मजबूत करता है कि यदि किसी व्यक्ति में सुधार की भावना हो तो उसे समाज में सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर मिलना चाहिए।
खुली जेल व्यवस्था का उद्देश्य
राजस्थान की खुली जेल व्यवस्था देशभर में एक सफल सुधारात्मक मॉडल मानी जाती है। अच्छे व्यवहार वाले कैदियों को यहां अपेक्षाकृत स्वतंत्र वातावरण में रहने और काम करने का अवसर मिलता है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य कैदियों में जिम्मेदारी की भावना विकसित करना और उन्हें सामान्य जीवन के लिए तैयार करना है। ऐसे प्रयासों से अपराधियों के पुनर्वास और समाज में पुनर्स्थापन की संभावनाएं भी बढ़ती हैं।
जेल सुधार की दिशा में सकारात्मक संदेश
मंडोर खुली जेल शादी केवल एक व्यक्तिगत घटना नहीं बल्कि जेल सुधार प्रणाली के लिए भी प्रेरणादायक उदाहरण मानी जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सुधारात्मक न्याय व्यवस्था का उद्देश्य केवल दंड देना नहीं बल्कि व्यक्ति को बेहतर नागरिक बनने का अवसर देना भी है। इस तरह के निर्णय समाज में सकारात्मक सोच को बढ़ावा देते हैं।
नवविवाहित जोड़े ने शुरू किया नया सफर
विवाह के बाद मूलाराम और सीमा ने एक-दूसरे के साथ जीवनभर रहने का संकल्प लिया। जेल प्रशासन का कहना है कि सजा पूरी होने के बाद दोनों सामान्य नागरिक की तरह अपना जीवन आगे बढ़ा सकेंगे।
समारोह के अंत में उपस्थित अधिकारियों और कर्मचारियों ने नवदंपति को शुभकामनाएं दीं और उनके सुखद भविष्य की कामना की।
मंडोर खुली जेल शादी राजस्थान की जेल सुधार व्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण बनकर सामने आई है। राजस्थान हाईकोर्ट की अनुमति और जेल प्रशासन की पहल से संपन्न यह विवाह बताता है कि सुधार और पुनर्वास की भावना के साथ कानून का पालन करते हुए भी जीवन को नई दिशा दी जा सकती है।

