टोंक जेल कैदी की मौत: पोस्टमॉर्टम से इनकार, SMS मॉर्च्युरी के बाहर परिवार का धरना
टोंक जेल कैदी की मौत के मामले में जयपुर के SMS अस्पताल की मॉर्च्युरी के बाहर परिजनों और समाज के लोगों का प्रदर्शन दूसरे दिन भी जारी रहा। मृतक गणदेव गुर्जर के परिजनों ने पोस्टमॉर्टम कराने से इनकार कर दिया है। उनका कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर प्रशासन की ओर से सहमति नहीं बनती, तब तक वे शव का पोस्टमॉर्टम नहीं होने देंगे।
गणदेव गुर्जर की उम्र 32 साल बताई गई है। वह टोंक जिला जेल में बंद था। जेल में तबीयत बिगड़ने के बाद उसे इलाज के लिए जयपुर रेफर किया गया, लेकिन रास्ते में उसकी मौत हो गई।
परिजनों और प्रशासन के बीच मांगों को लेकर बातचीत जारी है। वहीं, SMS अस्पताल परिसर में किसी तरह की अप्रिय स्थिति से बचने के लिए पुलिस की तैनाती बढ़ा दी गई है।
Table of Contents
- टोंक जेल में कैदी की तबीयत कैसे बिगड़ी?
- जयपुर लाते समय रास्ते में मौत
- पोस्टमॉर्टम से परिवार ने क्यों किया इनकार?
- SMS मॉर्च्युरी के बाहर दूसरे दिन भी धरना
- परिजनों की प्रमुख मांगें
- पुलिस और प्रशासन की बातचीत जारी
- अस्पताल परिसर में बढ़ाई गई सुरक्षा
- मामले में आगे क्या होगा?

टोंक जेल कैदी की मौत के बाद क्या हुआ?
गणदेव गुर्जर टोंक जिला जेल में बंद था। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, 11 अगस्त को उसकी तबीयत खराब हुई। इसके बाद उसे इलाज के लिए अस्पताल ले जाने की प्रक्रिया शुरू की गई।
बुधवार को उसकी हालत को देखते हुए उसे जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल यानी SMS अस्पताल रेफर किया गया। हालांकि जयपुर ले जाते समय रास्ते में ही उसकी मौत हो गई।
मौत की जानकारी मिलने के बाद परिवार के लोग जयपुर पहुंचे और शव को SMS अस्पताल की मॉर्च्युरी में रखा गया।
इसके बाद परिवार ने पोस्टमॉर्टम कराने से इनकार कर दिया और अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठ गया।
जयपुर लाते समय रास्ते में हुई मौत
परिवार के अनुसार, गणदेव की तबीयत बिगड़ने के बाद पहले उसे टोंक के अस्पताल ले जाया गया था। हालत गंभीर होने पर डॉक्टरों ने उसे जयपुर रेफर किया।
लेकिन जयपुर पहुंचने से पहले ही उसकी मौत हो गई।
परिजनों ने कैदी की मौत की परिस्थितियों और इलाज को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि मामले की पूरी जांच होनी चाहिए और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
हालांकि, कैदी की मौत की वास्तविक वजह और इलाज में किसी तरह की लापरवाही हुई या नहीं, यह जांच और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
पोस्टमॉर्टम से परिवार ने क्यों किया इनकार?
टोंक जेल कैदी की मौत के बाद परिवार ने पोस्टमॉर्टम को लेकर सहमति नहीं दी। परिजन चाहते हैं कि उनकी मांगों पर प्रशासन पहले फैसला करे।
मृतक के परिवार और टोंक-सवाई माधोपुर से पहुंचे समाज के लोगों ने SMS अस्पताल की मॉर्च्युरी के बाहर धरना शुरू कर दिया।
परिजन जेल प्रबंधन को हटाने, परिवार को आर्थिक सहायता देने और मामले में जिम्मेदारी तय करने जैसी मांगों को लेकर अड़े हुए हैं।
उनका कहना है कि जब तक प्रशासन उनकी मांगों पर ठोस आश्वासन नहीं देता, वे पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ने देंगे।
SMS मॉर्च्युरी के बाहर दूसरे दिन भी धरना
गुरुवार को भी बड़ी संख्या में लोग SMS अस्पताल की मॉर्च्युरी के बाहर मौजूद रहे। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में पोस्टर लेकर अपनी मांगें उठाईं और नारेबाजी की।
मौके पर पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। प्रशासनिक अधिकारी भी लगातार प्रदर्शन कर रहे लोगों से बातचीत कर रहे हैं।
दोनों पक्षों के बीच कई दौर की चर्चा हुई, लेकिन समाचार लिखे जाने तक किसी अंतिम समाधान पर सहमति नहीं बन सकी थी।
मॉर्च्युरी के बाहर लोगों की भीड़ को देखते हुए पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है।








परिजनों की प्रमुख मांगें
परिवार और समाज के लोगों की ओर से प्रशासन के सामने कई मांगें रखी गई हैं। इनमें प्रमुख रूप से जेल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई, जिम्मेदार अधिकारियों को हटाने और परिवार को आर्थिक सहायता देने की मांग शामिल है।
परिजन यह भी चाहते हैं कि गणदेव की मौत की परिस्थितियों की निष्पक्ष जांच हो।
उनका कहना है कि पूरे मामले में यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
पुलिस और प्रशासन की बातचीत जारी
धरने को देखते हुए पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी लगातार परिजनों से बातचीत कर रहे हैं। अधिकारियों की कोशिश है कि बातचीत के जरिए विवाद का समाधान निकाला जाए और पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया पूरी हो सके।
प्रशासन की ओर से प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं, परिवार अपनी मांगों पर कायम है।
फिलहाल किसी भी पक्ष की ओर से अंतिम सहमति की जानकारी सामने नहीं आई है।
अस्पताल परिसर में बढ़ाई गई सुरक्षा
SMS अस्पताल की मॉर्च्युरी के बाहर प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस ने सुरक्षा बढ़ा दी है। बड़ी संख्या में लोग मौके पर मौजूद हैं, इसलिए प्रशासन किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति को रोकने के लिए सतर्क है।
पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में परिवार और प्रशासन के बीच बातचीत चल रही है।
प्रशासन की प्राथमिकता शव का पोस्टमॉर्टम कराकर आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी करना है, जबकि परिवार पहले अपनी मांगों पर आश्वासन चाहता है।
मामले में आगे क्या होगा?
टोंक जेल कैदी की मौत के मामले में आगे की कार्रवाई पोस्टमॉर्टम और जांच से जुड़ी रिपोर्ट पर निर्भर करेगी। पोस्टमॉर्टम से मौत के कारणों की पुष्टि करने में मदद मिलेगी।
इसके साथ ही जेल में गणदेव की तबीयत बिगड़ने से लेकर अस्पताल पहुंचाने और जयपुर रेफर किए जाने तक की पूरी प्रक्रिया की जांच महत्वपूर्ण होगी।
परिजनों के आरोपों और प्रशासन के पक्ष की भी जांच की जाएगी। यदि जांच में किसी तरह की लापरवाही सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों या कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय की जा सकती है।
फिलहाल परिवार का धरना जारी है और प्रशासन दोनों पक्षों के बीच सहमति बनाने की कोशिश कर रहा है।
निष्कर्ष
टोंक जिला जेल में बंद गणदेव गुर्जर की मौत के बाद मामला गंभीर विवाद में बदल गया है। जयपुर के SMS अस्पताल की मॉर्च्युरी के बाहर परिवार और समाज के लोगों का धरना दूसरे दिन भी जारी रहा।
परिजनों ने पोस्टमॉर्टम से इनकार करते हुए जेल प्रबंधन पर कार्रवाई और आर्थिक सहायता समेत कई मांगें रखी हैं। दूसरी ओर पुलिस और प्रशासन बातचीत के जरिए समाधान निकालने में जुटे हैं।
मौत की वास्तविक वजह और किसी संभावित लापरवाही की पुष्टि जांच और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के बाद ही हो सकेगी।
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