ई-रिक्शा चालकों को राहत, सरकार ने बैटरी हैकिंग से जुड़े 7 मोबाइल ऐप हटाने के दिए आदेश
देशभर में ई-रिक्शा चालकों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने ऐसे सात मोबाइल एप्लिकेशन को ऐप स्टोर से हटाने के निर्देश दिए हैं, जिनका इस्तेमाल कथित तौर पर ई-रिक्शा की बैटरी से अनधिकृत रूप से कनेक्ट होकर उसे बंद करने के लिए किया जा रहा था। इन ऐप्स की वजह से दिल्ली समेत कई शहरों में ई-रिक्शा चालकों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (आईटी मंत्रालय) ने शुक्रवार को इस कार्रवाई की जानकारी दी।
सरकार के अनुसार जिन ऐप्स को हटाने के निर्देश दिए गए हैं, उनमें BAT-BMS, Smart BMS, Losigi और Epoch Li-Ion सहित कुल सात एप्लिकेशन शामिल हैं। इन ऐप्स का उपयोग कुछ लोग ब्लूटूथ के जरिए ई-रिक्शा की बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) से कनेक्ट होने के लिए कर रहे थे। इसके बाद चलते हुए ई-रिक्शा की बैटरी को अचानक बंद कर दिया जाता था, जिससे वाहन बीच सड़क में रुक जाता था और चालक को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता था।

हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर ऐसे कई वीडियो वायरल हुए, जिनमें चलते हुए ई-रिक्शा अचानक बंद हो जाते थे। शुरुआत में कई लोगों ने इसे तकनीकी खराबी समझा, लेकिन बाद में सामने आया कि कुछ लोग मोबाइल ऐप की मदद से ब्लूटूथ के जरिए बैटरी सिस्टम से कनेक्ट होकर उसे बंद कर रहे थे। इसके बाद बड़ी संख्या में ई-रिक्शा चालकों ने इस मामले की शिकायत संबंधित अधिकारियों से की।
आईटी मंत्रालय ने बताया कि इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जांच की गई। जांच में पाया गया कि कुछ ई-रिक्शा में इस्तेमाल होने वाली लीथियम-आयन बैटरियों का बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम पर्याप्त रूप से सुरक्षित नहीं था। कई बैटरियों में ब्लूटूथ कनेक्शन बिना पासवर्ड के उपलब्ध था या फिर बेहद कमजोर सुरक्षा व्यवस्था अपनाई गई थी। इसी कमजोरी का फायदा उठाकर कोई भी व्यक्ति संबंधित ऐप डाउनलोड कर बैटरी से कनेक्ट हो सकता था।
विशेषज्ञों के अनुसार बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम यानी BMS का काम बैटरी की चार्जिंग, डिस्चार्जिंग, तापमान और प्रदर्शन को नियंत्रित करना होता है। यदि इस सिस्टम तक अनधिकृत पहुंच मिल जाए तो बैटरी को बंद करना या उसकी सेटिंग बदलना संभव हो सकता है। यही वजह है कि कमजोर सुरक्षा वाले सिस्टम ई-रिक्शा चालकों के लिए बड़ा खतरा बन गए थे।
हालांकि, विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि यह समस्या केवल कुछ विशेष प्रकार की बैटरियों तक सीमित है। आम कारों और आधुनिक इलेक्ट्रिक वाहनों में इस्तेमाल होने वाले बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम कहीं अधिक सुरक्षित होते हैं। उनमें मजबूत एन्क्रिप्शन, सुरक्षित प्रमाणीकरण (ऑथेंटिकेशन) और मल्टी-लेयर सिक्योरिटी का उपयोग किया जाता है। इसलिए किसी सामान्य मोबाइल ऐप के जरिए उनकी बैटरी से कनेक्ट होना या उसे नियंत्रित करना संभव नहीं होता।
सरकार द्वारा ऐप हटाने के निर्देश दिए जाने के बावजूद फिलहाल कुछ ऐप्स अब भी प्ले स्टोर पर दिखाई दे रहे हैं। माना जा रहा है कि संबंधित प्लेटफॉर्म पर इन ऐप्स को हटाने की प्रक्रिया जारी है और जल्द ही इन्हें पूरी तरह हटा दिया जाएगा। साथ ही बैटरी निर्माता कंपनियों को भी अपने बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम की सुरक्षा मजबूत करने की सलाह दी गई है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
ई-रिक्शा चालकों का कहना है कि इस तरह की घटनाओं से न केवल उनकी रोजी-रोटी प्रभावित होती है, बल्कि सड़क पर उनकी और यात्रियों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ जाती है। अचानक वाहन बंद होने से दुर्घटना का जोखिम भी बढ़ जाता है।
सरकार की इस कार्रवाई को डिजिटल सुरक्षा और साइबर सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब उम्मीद की जा रही है कि ऐप स्टोर से इन एप्लिकेशन को पूरी तरह हटाने, बैटरी सिस्टम की सुरक्षा मजबूत करने और जागरूकता बढ़ाने से ई-रिक्शा चालकों को राहत मिलेगी तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लग सकेगी।

