अब ज्वेलर्स के पास भी जमा कर सकेंगे सोना! सरकार ला रही नई गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम
देश में घरों में रखा निष्क्रिय सोना अब अर्थव्यवस्था के लिए उपयोगी बनाने की दिशा में केंद्र सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, सरकार अगले दो सप्ताह के भीतर गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम (GMS) का नया और अपडेटेड संस्करण लॉन्च कर सकती है। इस नई व्यवस्था में पहली बार सर्राफा व्यापारियों यानी ज्वेलर्स को भी “कलेक्शन पार्टनर” बनाया जा सकता है। इससे आम लोग अपने सोने को केवल बैंकों में ही नहीं, बल्कि अधिकृत ज्वेलर्स के पास भी जमा कर सकेंगे।
अब तक गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम के तहत केवल चुनिंदा बैंक ही लोगों से सोना जमा करने के लिए अधिकृत थे। लेकिन बैंक शाखाओं की सीमित संख्या और जटिल प्रक्रिया के कारण इस योजना को अपेक्षित सफलता नहीं मिल पाई। सरकार अब इस कमी को दूर करने के लिए देशभर के भरोसेमंद सर्राफा व्यापारियों को इस योजना से जोड़ने की तैयारी कर रही है, जिससे लोगों को अधिक सुविधा मिल सके।

नई स्कीम का सबसे बड़ा उद्देश्य घरों और तिजोरियों में वर्षों से रखे निष्क्रिय सोने को वित्तीय प्रणाली में लाना है। भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना उपभोक्ता देशों में शामिल है। अनुमान है कि भारतीय परिवारों और धार्मिक संस्थानों के पास हजारों टन सोना रखा हुआ है, जिसका बड़ा हिस्सा किसी आर्थिक गतिविधि में उपयोग नहीं हो रहा। सरकार चाहती है कि यही सोना देश की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में मदद करे।
सूत्रों के अनुसार, अधिकृत ज्वेलर्स लोगों से सोना स्वीकार करेंगे और तय प्रक्रिया के तहत उसकी शुद्धता की जांच कराकर उसे सरकारी प्रणाली में शामिल किया जाएगा। इसके बदले ग्राहकों को प्रमाणपत्र मिलेगा और जमा किए गए सोने पर तय नियमों के अनुसार ब्याज या अन्य लाभ भी दिए जा सकते हैं। अंतिम नियमों और ब्याज दरों की घोषणा नई योजना के साथ की जाएगी।
नई व्यवस्था में पारदर्शिता और सुरक्षा पर विशेष जोर दिया जाएगा। केवल सरकार द्वारा अधिकृत और निर्धारित मानकों को पूरा करने वाले ज्वेलर्स को ही कलेक्शन पार्टनर बनने की अनुमति मिलेगी। इससे लोगों का भरोसा बढ़ेगा और वे आसानी से अपने घरों में रखा सोना योजना के तहत जमा करा सकेंगे।
ऑल इंडिया ज्वेलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन (AIJGF) का मानना है कि ज्वेलर्स को योजना में शामिल करने से इसकी पहुंच तेजी से बढ़ेगी। देश के लगभग हर शहर और कस्बे में सर्राफा व्यापारी मौजूद हैं, इसलिए लोगों के लिए अपने नजदीकी ज्वेलर के पास सोना जमा करना पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान होगा। इससे योजना में भागीदारी बढ़ने की संभावना है।
फेडरेशन का अनुमान है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद सरकार बाजार से 1000 टन से अधिक सोना जुटाने में सफल हो सकती है। यदि ऐसा होता है तो इससे देश की सोने के आयात पर निर्भरता कम होगी। भारत हर वर्ष बड़ी मात्रा में सोना आयात करता है, जिससे विदेशी मुद्रा पर भारी खर्च होता है। घरेलू स्तर पर उपलब्ध सोने का उपयोग बढ़ने से आयात बिल कम करने में मदद मिल सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस योजना से आम लोगों को भी फायदा होगा। घर में बिना उपयोग के रखा सोना केवल सुरक्षित रखने तक सीमित रहता है, जबकि योजना के तहत जमा करने पर उस पर अतिरिक्त लाभ मिलने की संभावना होगी। साथ ही, सुरक्षित और अधिकृत प्रणाली के कारण चोरी या नुकसान का जोखिम भी कम रहेगा।
हालांकि, योजना की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि सरकार इसके नियम कितने सरल और पारदर्शी बनाती है। लोगों का विश्वास जीतने के लिए शुद्धता जांच, सुरक्षा, ब्याज भुगतान और सोना वापस लेने की प्रक्रिया को आसान बनाना बेहद जरूरी होगा।
यदि सरकार अगले दो सप्ताह में इस नई गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम की घोषणा करती है, तो यह भारत के गोल्ड सेक्टर के लिए एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है। इससे न केवल लोगों को अपने सोने का बेहतर उपयोग करने का अवसर मिलेगा, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करने में मदद मिलेगी। सरकार की यह पहल घरेलू सोने को आर्थिक संसाधन में बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

