55 साल तक क्यों निष्क्रिय रहीं ऑर्डिनेंस फैक्ट्रियां ? जोधपुर में बोले केंद्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत
केंद्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने जोधपुर में सवाल उठाया कि 55 वर्षों तक ऑर्डिनेंस फैक्ट्रियां क्यों निष्क्रिय रहीं। उन्होंने भारत की सैन्य आत्मनिर्भरता, तकनीकी युद्ध, आर्थिक प्रगति और विकसित भारत-2047 के विजन पर विस्तार से प्रकाश डाला।
55 साल तक क्यों निष्क्रिय हुईं ऑर्डिनेंस फैक्ट्रियां: शेखावत
केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने भारत की रक्षा उत्पादन क्षमता, ऐतिहासिक सैन्य गौरव और भविष्य के तकनीकी युद्धों को लेकर बड़ा सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जब मित्र राष्ट्रों की सेनाएं लाखों गोलियां चला रही थीं, तब उनमें से 80 प्रतिशत बुलेट्स की मैन्युफैक्चरिंग हिंदुस्तान की ऑर्डिनेंस फैक्ट्रियों में होती थी, लेकिन आजादी के बाद आखिर ऐसा क्या हुआ कि भारत 55 वर्षों तक रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में निष्क्रिय होता चला गया और 100 प्रतिशत आयात पर निर्भर बन गया।
अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद के कार्यक्रम में दिया उद्बोधन
मंगलवार को जोधपुर में अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद, जोधपुर प्रांत के तत्वावधान में आयोजित पश्चिमी राजस्थान उद्योग हस्तशिल्प उत्सव-2026 में केंद्रीय मंत्री शेखावत मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम में उन्होंने सैनिकों, पूर्व सैनिकों और आम नागरिकों को संबोधित करते हुए भारत की सैन्य शक्ति, ऐतिहासिक चेतना और विकसित भारत-2047 के आर्थिक रोडमैप पर विस्तार से विचार रखे।
द्वितीय विश्व युद्ध में भारत था मैन्युफैक्चरिंग हब
केंद्रीय मंत्री शेखावत ने कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध के समय भारत दुनिया के सबसे बड़े रक्षा मैन्युफैक्चरिंग केंद्रों में से एक था।
उन्होंने कहा—
“द्वितीय विश्व युद्ध में अंग्रेजों के साथ जो मित्र देश खड़े थे, उनकी सेनाओं द्वारा फायर की गई कुल बुलेट्स में से 80 प्रतिशत की मैन्युफैक्चरिंग ऑर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड द्वारा हिंदुस्तान में होती थी।”
उन्होंने सवाल उठाया कि इतना मजबूत औद्योगिक आधार होने के बावजूद भारत कैसे धीरे-धीरे रक्षा उत्पादन में पिछड़ता चला गया।
55 वर्षों तक क्यों चरमराती रहीं व्यवस्थाएं?
शेखावत ने कहा कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण रहा कि आजादी के बाद लगभग 55 वर्षों तक ऑर्डिनेंस फैक्ट्रियों और रक्षा उत्पादन की व्यवस्थाएं बंद और कमजोर होती चली गईं।
उन्होंने कहा—
“जो देश रॉकेट बना सकता था, मिसाइल बना सकता था, ब्रह्मोस बना सकता था, वही देश इंसास की गोली तक नहीं बना पा रहा था। यह कितना दुर्भाग्यपूर्ण था।”
उन्होंने इस स्थिति को नीति और दृष्टिकोण की कमी का परिणाम बताया।
अब बदली व्यवस्था, बदला समय
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अब परिस्थितियां पूरी तरह बदल चुकी हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने का स्पष्ट संकल्प लिया है।
उन्होंने बताया कि अब भारत ने एक नेगेटिव लिस्ट तैयार की है, जिसमें केवल सीमित रक्षा उपकरणों का आयात किया जाएगा, जबकि बाकी सभी रक्षा सामग्री का निर्माण देश में ही किया जा रहा है।
तेजस से ब्रह्मोस तक, भारत की तकनीक पर दुनिया की नजर
शेखावत ने कहा कि आज भारत की रक्षा तकनीक पर पूरी दुनिया की नजर है।
उन्होंने कहा—
“तेजस से लेकर ब्रह्मोस, एंटी मिसाइल सिस्टम सहित हमारी तकनीक को खरीदने के लिए आज पूरी दुनिया लाइन लगाकर खड़ी है।”
उन्होंने इसे भारत की बदलती सैन्य और तकनीकी ताकत का प्रमाण बताया।
अब युद्ध सीमाओं पर नहीं, तकनीक पर होते हैं
भविष्य के युद्धों की प्रकृति पर बोलते हुए केंद्रीय मंत्री शेखावत ने कहा कि अब युद्ध केवल सीमाओं पर सैनिकों द्वारा नहीं लड़े जाते।
उन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध और ईरान-इजराइल तनाव का उदाहरण देते हुए कहा—
“तीन साल से रूस-यूक्रेन युद्ध चल रहा है। ईरान और इजराइल की भौगोलिक सीमाएं भी नहीं मिलतीं, फिर भी युद्ध हुआ। एक भी गोली नहीं चली, लेकिन तकनीक के आधार पर युद्ध हुआ।”
उन्होंने कहा कि आज Anything and Anything can be weaponized, यानी किसी भी चीज को हथियार बनाया जा सकता है।
तकनीक में समृद्ध होना राष्ट्रीय आवश्यकता
शेखावत ने कहा कि आने वाले समय में भारत को तकनीकी दृष्टिकोण से और अधिक समृद्ध होना होगा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि—
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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)
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ड्रोन टेक्नोलॉजी
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साइबर डिफेंस
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एडवांस्ड मिसाइल सिस्टम
भविष्य के युद्धों की दिशा तय करेंगे। इसलिए अब केवल सैनिक ही नहीं, बल्कि तकनीक पर काम करने वाला हर नागरिक राष्ट्र की सुरक्षा में सहभागी है।
हथियार उत्पादन में आत्मनिर्भर बनता भारत
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत जो कभी दुनिया का सबसे बड़ा रक्षा आयातक था, आज शीर्ष 10 रक्षा निर्यातक देशों में शामिल हो चुका है।
उन्होंने ऑर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड के कायाकल्प और स्वदेशी रक्षा परियोजनाओं को इसका मुख्य कारण बताया।
भारत की आर्थिक प्रगति पर विस्तृत दृष्टि
अपने संबोधन में शेखावत ने भारत की आर्थिक प्रगति पर भी विस्तार से चर्चा की।
उन्होंने कहा कि भारत पिछले चार वर्षों से दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बना हुआ है।
उन्होंने बीटीआई और ब्लूमबर्ग रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि भारत की विकास दर 7 से 8.2 प्रतिशत के बीच बनी हुई है।
निवेश में 200 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि
शेखावत ने कहा कि अमेरिका और रूस जैसी वैश्विक कंपनियों ने भारत में निवेश को पिछले वर्षों की तुलना में 200 प्रतिशत से अधिक बढ़ाया है।
उन्होंने विश्वास जताया कि—
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वर्तमान 4 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था
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2032 तक 8 ट्रिलियन
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2040 तक 16 ट्रिलियन
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और 2047 तक 32 ट्रिलियन डॉलर
की महाशक्ति बनेगी।
विकास के जमीनी बदलावों का उल्लेख
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि 2 से 4 ट्रिलियन डॉलर के सफर में ही देश में—
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आधुनिक सड़कों का विस्तार
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वंदे भारत ट्रेनों की शुरुआत
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ब्रॉडबैंड और डिजिटल कनेक्टिविटी
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हर घर बिजली
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गैस चूल्हा
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और 12.5 लाख रुपये तक टैक्स छूट
जैसे बड़े बदलाव देखने को मिले हैं।
इतिहास पराजय का नहीं, पराक्रम का है
इतिहास पर बोलते हुए शेखावत ने कहा कि भारत का इतिहास पराजय का नहीं, बल्कि पराक्रम और बलिदान का रहा है।
उन्होंने राजस्थान की वीर परंपरा का उल्लेख करते हुए प्रसिद्ध राजस्थानी लोरी की पंक्तियां दोहराईं—
“इला न देणी आपणी, हालरिया हुलराय…”
उन्होंने कहा कि यह धरती हजारों वर्षों से आक्रांताओं को चुनौती देने वाले बलिदानियों की रही है।
सैनिकों का इतिहास कर्तव्य और संस्कारों की गाथा
शेखावत ने कहा कि भारतीय सैनिकों का इतिहास केवल युद्ध जीतने की कहानी नहीं है, बल्कि कर्तव्य, चरित्र और संस्कारों की जीवंत गाथा है।
उन्होंने कहा कि जो संस्कार सैनिकों को पालने में मिलते हैं, वही संस्कार वे रणभूमि में भी निभाते हैं।
अब भारत घर में घुसकर मारता है
सैन्य शक्ति पर बोलते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि 1947 से कारगिल तक भारत की शांति को कमजोरी समझा गया, लेकिन अब ऐसा नहीं है।
उन्होंने सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक का उल्लेख करते हुए कहा—
“अब नया भारत है। अब भारत घर में घुसकर मारता है।”
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की आवाज को अब दुनिया के किसी मंच पर दबाया नहीं जा सकता।
वीरों और वीर माताओं का सम्मान
अपने संबोधन के अंत में शेखावत ने वीर सैनिकों और वीर माताओं के सम्मान पर भावुक शब्द कहे।
उन्होंने कहा कि यह आयोजन केवल औपचारिक सम्मान नहीं, बल्कि राष्ट्र द्वारा वीर परिवारों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का प्रयास है।
उन्होंने सैन्य परिवार से जुड़े अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि युद्ध के मैदान में सैनिक जितना साहस दिखाता है, उतना ही धैर्य और संयम पीछे घर में वीर नारी भी दिखाती है।
निष्कर्ष
केंद्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत का यह संबोधन भारत की सैन्य आत्मनिर्भरता, तकनीकी युद्ध, आर्थिक शक्ति और ऐतिहासिक चेतना को एक सूत्र में पिरोता हुआ संदेश है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत अब न केवल अपने अतीत पर गर्व करता है, बल्कि भविष्य की चुनौतियों के लिए पूरी तरह तैयार भी है।





