RGHS संकट गहराया: 1300 करोड़ बकाया, निजी अस्पतालों में 20 दिन से इलाज ठप

भुगतान न होने से डॉक्टर नाराज़, मरीजों की परेशानी बढ़ी; IMA ने प्रदर्शन कर चेतावनी दी
राजस्थान सरकार की महत्वाकांक्षी योजना राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) इन दिनों गंभीर वित्तीय संकट से जूझ रही है। योजना के तहत निजी अस्पतालों को मिलने वाला भुगतान लंबे समय से अटका हुआ है, जिसके चलते अब हालात बिगड़ते जा रहे हैं। जानकारी के अनुसार, निजी अस्पतालों का करीब 1300 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया भुगतान लंबित है।
इस बकाया राशि के कारण राज्य के कई निजी अस्पतालों ने RGHS के तहत मरीजों का इलाज करना बंद कर दिया है। पिछले करीब 20 दिनों से मरीजों को इस योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है, जिससे हजारों सरकारी कर्मचारी, पेंशनर्स और उनके परिजन प्रभावित हो रहे हैं।
मरीजों पर पड़ा सीधा असर
RGHS योजना का उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स को कैशलेस इलाज की सुविधा देना था। लेकिन वर्तमान स्थिति में मरीजों को अस्पतालों से लौटाया जा रहा है या उन्हें अपने खर्च पर इलाज कराने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
कई मरीजों ने बताया कि वे इलाज के लिए अस्पताल पहुंचे, लेकिन RGHS कार्ड होने के बावजूद उन्हें भर्ती नहीं किया गया। गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों और उनके परिजनों के लिए यह स्थिति बेहद चिंताजनक बन गई है।
निजी अस्पतालों का रुख सख्त
निजी अस्पताल संचालकों का कहना है कि लंबे समय से भुगतान न मिलने के कारण उनकी आर्थिक स्थिति पर भी असर पड़ा है। अस्पतालों को दवाइयों, उपकरणों और स्टाफ के वेतन के लिए नियमित फंड की आवश्यकता होती है, लेकिन बकाया राशि के चलते वे संकट में हैं।
अस्पताल प्रशासन का कहना है कि कई बार सरकार को इस समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला। इसी कारण मजबूर होकर उन्होंने RGHS के तहत इलाज बंद करने का निर्णय लिया।
IMA का प्रदर्शन और चेतावनी
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने इस मुद्दे को लेकर जोरदार विरोध दर्ज कराया है। IMA के बैनर तले डॉक्टरों और अस्पताल संचालकों ने प्रदर्शन किया और सरकार से जल्द बकाया भुगतान करने की मांग की।
IMA पदाधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही भुगतान नहीं किया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह केवल डॉक्टरों का मुद्दा नहीं है, बल्कि लाखों मरीजों की जिंदगी से जुड़ा सवाल है।
सरकार पर बढ़ा दबाव
इस पूरे मामले को लेकर सरकार पर लगातार दबाव बढ़ रहा है। विपक्ष ने भी इस मुद्दे को उठाते हुए सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि सरकार की लापरवाही के कारण आम जनता को परेशानी झेलनी पड़ रही है।
हालांकि, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बकाया भुगतान की प्रक्रिया जारी है और जल्द ही समाधान निकालने का प्रयास किया जा रहा है। लेकिन अब तक कोई ठोस समयसीमा सामने नहीं आई है।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। निजी अस्पतालों का सहयोग RGHS योजना की रीढ़ है, और उनके बिना इस योजना का संचालन मुश्किल हो जाएगा।
आगे की राह
अब सभी की नजर सरकार के अगले कदम पर टिकी है। यदि जल्द ही बकाया भुगतान नहीं किया गया, तो यह संकट और गहरा सकता है। मरीजों, डॉक्टरों और अस्पतालों—तीनों के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।
Key Points
- RGHS के तहत 1300 करोड़ रुपये का बकाया
- 20 दिनों से निजी अस्पतालों में इलाज बंद
- मरीजों को कैशलेस सुविधा नहीं मिल रही
- IMA ने किया प्रदर्शन, दी आंदोलन की चेतावनी
- सरकार पर समाधान का बढ़ता दबाव
- स्वास्थ्य व्यवस्था पर संकट गहराने की आशंका
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