Rajasthan News: 17 जिलों की 3.25 करोड़ आबादी को मिलेगा ‘राम जल’, जानें भजनलाल सरकार की मेगा जल परियोजना का पूरा प्लान

Rajasthan News: राजस्थान सरकार ने राज्य के जल संकट को दूर करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए रामजल सेतु लिंक परियोजना (Ramjal Setu Link Project) की प्रगति की समीक्षा की है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने उच्च स्तरीय बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए कि परियोजना के सभी निर्माण कार्य तय समय-सीमा से पहले पूरे किए जाएं ताकि प्रदेश के करोड़ों लोगों को जल्द लाभ मिल सके।
करीब 90 हजार करोड़ रुपये की लागत वाली यह परियोजना राजस्थान की सबसे महत्वाकांक्षी जल योजनाओं में शामिल है। इसके पहले चरण के पूरा होने पर राज्य के 17 जिलों की लगभग 3.25 करोड़ आबादी को पेयजल, सिंचाई और औद्योगिक उपयोग के लिए पानी उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।
पूर्वी राजस्थान के लिए गेम चेंजर साबित हो सकती है योजना
रामजल सेतु लिंक परियोजना का उद्देश्य केवल पानी की उपलब्धता बढ़ाना नहीं है, बल्कि पूर्वी राजस्थान में दीर्घकालिक जल सुरक्षा सुनिश्चित करना भी है।
सरकार का मानना है कि इस परियोजना से उन क्षेत्रों को भी स्थायी राहत मिलेगी, जहां वर्षों से पेयजल संकट और सिंचाई की कमी बनी हुई है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने समीक्षा बैठक में कहा कि यह परियोजना प्रदेश के सामाजिक, आर्थिक और औद्योगिक विकास की मजबूत आधारशिला बनेगी।
प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में आगे बढ़ी परियोजना
राज्य सरकार के अनुसार इस परियोजना को गति देने के लिए वर्ष 2024 में मध्यप्रदेश सरकार के साथ समझौता (MoU) किया गया था।
इसके बाद 17 दिसंबर 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में केंद्र सरकार, राजस्थान और मध्यप्रदेश के बीच त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर हुए, जिससे परियोजना को औपचारिक रूप से आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हुआ।
अब वर्ष 2026 में परियोजना के कई हिस्सों पर निर्माण कार्य तेजी से जारी है।
17 जिलों की 3.25 करोड़ आबादी को मिलेगा लाभ
रामजल सेतु लिंक परियोजना का सबसे बड़ा उद्देश्य राजस्थान के उन क्षेत्रों तक पर्याप्त पानी पहुंचाना है, जहां लंबे समय से जल संकट बना हुआ है।
परियोजना के पहले चरण से—
- लगभग 3 करोड़ 25 लाख लोगों को पेयजल उपलब्ध होगा।
- हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा मिलेगी।
- औद्योगिक क्षेत्रों के लिए जल आपूर्ति मजबूत होगी।
- ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों को दीर्घकालिक जल सुरक्षा मिलेगी।
सरकार का दावा है कि इससे प्रदेश के जल संसाधनों का बेहतर प्रबंधन संभव होगा।
24 हजार करोड़ रुपये के कार्य प्रगति पर
जल संसाधन विभाग की समीक्षा के दौरान अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि वर्तमान में 24 हजार करोड़ रुपये से अधिक लागत के निर्माण कार्य विभिन्न चरणों में चल रहे हैं।
इन परियोजनाओं में बैराज, बांध, फीडर नहर, पाइपलाइन नेटवर्क, पंपिंग स्टेशन और एक्वाडक्ट जैसी प्रमुख संरचनाओं का निर्माण शामिल है।
सरकार ने संबंधित एजेंसियों को निर्माण कार्य में गुणवत्ता और समय-सीमा दोनों का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए हैं।
नवनेरा बैराज और ईसरदा बांध का निर्माण पूरा
परियोजना की प्रमुख उपलब्धियों में नवनेरा बैराज और ईसरदा बांध का निर्माण कार्य पूरा होना शामिल है।
इन दोनों संरचनाओं को परियोजना की आधारभूत कड़ी माना जा रहा है, क्योंकि आगे इन्हीं के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों तक पानी पहुंचाया जाएगा।
इसके अलावा रामगढ़ बैराज और महलपुर बैराज के निर्माण कार्य भी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
Rajasthan News: चंबल एक्वाडक्ट परियोजना पर तेजी से काम
परियोजना के पहले चरण के पैकेज-2 के अंतर्गत लगभग 2,330 करोड़ रुपये की लागत से चंबल एक्वाडक्ट बनाया जा रहा है।
यह संरचना कोटा जिले के दीगोद क्षेत्र को बूंदी जिले के इन्द्रगढ़ क्षेत्र से जोड़ेगी।
अधिकारियों के अनुसार—
- 5,060 पाइलों में से लगभग 3,700 का कार्य पूरा हो चुका है।
- निर्माण कार्य युद्धस्तर पर जारी है।
- एक्वाडक्ट के माध्यम से नवनेरा बैराज का पानी मेज नदी तक पहुंचाया जाएगा।
इसके बाद यही पानी आगे विभिन्न जलाशयों और बांधों तक पहुंचाया जाएगा।
कैसे पहुंचेगा पानी? समझिए पूरा नेटवर्क
रामजल सेतु लिंक परियोजना के तहत राजस्थान में कई प्रमुख बांधों और जलाशयों को फीडर नहरों तथा पाइपलाइन नेटवर्क के माध्यम से जोड़ा जा रहा है।
नवनेरा बैराज से मेज एनीकट
करीब 19 किलोमीटर लंबी फीडर नहर बनाई जा रही है।
अब तक लगभग 8 किलोमीटर कार्य पूरा किया जा चुका है।
ईसरदा से बंध बारेठा
ईसरदा बांध से भरतपुर के बंध बारेठा तक लगभग 180 किलोमीटर लंबी नहर विकसित की जा रही है।
इस परियोजना के तहत हेड रेगुलेटर का निर्माण कार्य जारी है।
बीसलपुर से मोर सागर
बीसलपुर बांध से मोर सागर जलाशय तक पानी पहुंचाने के लिए नए पंप हाउस और नियंत्रण प्रणाली विकसित की जा रही है।
यह व्यवस्था अजमेर सहित आसपास के क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
ईसरदा से रामगढ़ बांध
जयपुर की जल आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से ईसरदा बांध से रामगढ़ बांध तक पाइपलाइन बिछाने की योजना बनाई गई है।
इसका रूट सर्वे और अलाइनमेंट अंतिम चरण में बताया गया है।
अलवर और अन्य क्षेत्रों को भी मिलेगा लाभ
परियोजना के तहत जयसमंद बांध और ब्राह्मणी बैराज जैसे जल स्रोतों को भी इस नेटवर्क से जोड़ने की तैयारी चल रही है।
वन स्वीकृति और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रियाएं भी विभिन्न चरणों में जारी हैं।
किसानों को मिलेगा बड़ा फायदा
विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना केवल पेयजल तक सीमित नहीं रहेगी।
इसके माध्यम से—
- सिंचाई क्षमता बढ़ेगी।
- खेती का रकबा बढ़ेगा।
- भूजल पर निर्भरता कम होगी।
- सूखे की स्थिति में राहत मिलेगी।
- किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।
पूर्वी राजस्थान के कई इलाकों में कृषि उत्पादन पर इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना है।
उद्योगों और शहरों को भी मिलेगा लाभ
राजस्थान में तेजी से बढ़ते औद्योगिक विकास को देखते हुए जल उपलब्धता एक बड़ी चुनौती रही है।
रामजल सेतु लिंक परियोजना के माध्यम से उद्योगों, नगर निकायों और शहरी क्षेत्रों को भी दीर्घकालिक जल आपूर्ति सुनिश्चित करने की योजना बनाई गई है।
इससे भविष्य में औद्योगिक निवेश को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
पुनर्वास और मुआवजे पर मुख्यमंत्री के निर्देश
समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने परियोजना से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और मुआवजे पर विशेष जोर दिया।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि—
- प्रभावित परिवारों को समय पर मुआवजा मिले।
- पुनर्वास प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता से हो।
- किसानों और ग्रामीणों को अनावश्यक परेशानी न उठानी पड़े।
- सभी मामलों का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास कार्यों के साथ-साथ प्रभावित लोगों के हितों की रक्षा करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
निष्कर्ष
Rajasthan News के तहत सामने आई रामजल सेतु लिंक परियोजना राजस्थान की सबसे बड़ी जल अवसंरचना योजनाओं में से एक है। लगभग 90 हजार करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना का उद्देश्य 17 जिलों की 3.25 करोड़ आबादी तक पेयजल, सिंचाई और औद्योगिक उपयोग के लिए पर्याप्त पानी पहुंचाना है।
नवनेरा बैराज, ईसरदा बांध, चंबल एक्वाडक्ट और फीडर नहरों का निर्माण तेजी से जारी है। यदि परियोजना निर्धारित समय में पूरी होती है, तो यह पूर्वी राजस्थान के जल संकट को कम करने और प्रदेश के आर्थिक एवं कृषि विकास को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

