Pakistan claim : पाकिस्तान ने चीन को भारत-पाक टकराव रोकने का श्रेय दिया, भारत ने तीसरे पक्ष को नकारा
Pakistan claim : चीन ने मई के भारत-पाक सैन्य टकराव में मध्यस्थता का दावा किया,पाकिस्तान ने समर्थन किया। भारत ने स्पष्ट किया कि तनाव का समाधान सीधे दोनों देशों की सेनाओं के बीच हुआ। विवाद से चीन-पाक करीबी रिश्तों और वैश्विक कूटनीति पर चर्चा तेज हुई।
Pakistan claim : पाकिस्तान ने चीन को संघर्ष रोकने का श्रेय दिया
पाकिस्तान ने चीन के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान मध्यस्थता के दावे का समर्थन किया है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने गुरुवार को प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि चीन के नेता उस समय पाकिस्तान के नेतृत्व के साथ लगातार संपर्क में थे। उन्होंने यह भी कहा कि चीनी नेताओं ने भारतीय नेतृत्व से भी कुछ बातचीत की थी।
पाकिस्तान का बयान चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बयान के बाद आया। वांग यी ने 30 दिसंबर को बीजिंग में कहा था कि चीन दुनिया के कई संघर्षों को सुलझाने में मदद करता रहा है। उन्होंने विशेष रूप से भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव के दौरान अपनी मध्यस्थता का दावा किया।
पहले ट्रम्प को दिया गया संघर्ष सुलझाने का श्रेय

इससे पहले पाकिस्तान(Pakistan ) सरकार ने डोनाल्ड ट्रम्प को भारत-पाक संघर्ष सुलझाने के लिए नोबेल पीस प्राइज के लिए नामित किया था। पाकिस्तानी सरकार का कहना था कि ट्रम्प की कूटनीतिक पहल और मध्यस्थता ने एक बड़े युद्ध को टालने में मदद की।
पाकिस्तानी आधिकारिक बयान में कहा गया था कि ट्रम्प ने नई दिल्ली और इस्लामाबाद दोनों से बात कर संघर्षविराम में अहम भूमिका निभाई। इस पहल से दोनों न्यूक्लियर ताकतों के बीच युद्ध की आशंका टली।
पाकिस्तान ने कश्मीर मुद्दे पर ट्रम्प की मध्यस्थता की पेशकश की सराहना भी की थी।
भारत ने तीसरे पक्ष की भूमिका को स्पष्ट रूप से नकारा

चीन और ट्रम्प के दावों के बावजूद भारत सरकार पहले भी स्पष्ट कर चुकी है कि इस पूरे मामले में किसी भी तीसरे देश की भूमिका नहीं थी। भारत का कहना है कि यह तनाव सीधे भारत और पाकिस्तान की सेनाओं के बीच बातचीत के माध्यम से हल हुआ।
भारत के अनुसार, भारी नुकसान के बाद पाकिस्तान के सैन्य अधिकारियों ने भारतीय अधिकारियों से संपर्क किया।
भारत का कहना है कि पाकिस्तान के डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस (DGMO) ने भारतीय DGMO से बात की। इसके बाद दोनों देशों ने 10 मई से जमीन, हवा और समुद्र में सभी प्रकार की सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति बनाई।
चीन-पाक रिश्तों पर बढ़े सवाल
चीन के नए दावे के बाद उसकी भूमिका को लेकर चर्चा तेज हो गई है। चीन और पाकिस्तान के रिश्ते बेहद करीबी माने जाते हैं। चीन पाकिस्तान को सबसे ज्यादा हथियार देने वाला देश है, इसलिए यह सवाल उठता है कि वह इस मामले में कितना निष्पक्ष रह सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, चीन का यह दावों पर जोर देना उसके वैश्विक कूटनीतिक प्रभुत्व और क्षेत्रीय प्रभाव को दिखाने की कोशिश भी हो सकती है।
मई में भारत-पाक के बीच सैन्य टकराव
चीन का बयान उस समय को लेकर है, जब इस साल मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य टकराव हुआ था।
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भारत ने पाकिस्तान के कई आतंकी और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया।
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कुल मिलाकर पाकिस्तान के 11 एयरबेस को नुकसान हुआ।
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भारत का यह हमला 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में किया गया था, जिसमें 26 पर्यटकों की मौत हुई थी।
इस घटना ने भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव को और जटिल कर दिया था।
दोनों देशों के संवाद और संघर्षविराम
हालांकि, तनाव के बाद दोनों देशों की सेनाओं के बीच प्रत्यक्ष संपर्क हुआ। भारत के मुताबिक, पाकिस्तान की ओर से पहल की गई और DGMO स्तर पर बातचीत के बाद 10 मई से सभी सैन्य गतिविधियों को रोकने पर सहमति बनी।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह सीधा संवाद और सैन्य नियंत्रण ही संघर्ष को बढ़ने से रोकने में सबसे महत्वपूर्ण कारक था।
वैश्विक कूटनीति में चीन की भूमिका
चीन ने अपने बयान में यह दिखाने की कोशिश की कि वह विश्वभर के संघर्षों में मध्यस्थता करता है। वांग यी ने कहा कि भारत-पाक तनाव में भी चीन ने सक्रिय रूप से बातचीत की।
हालांकि, भारत ने स्पष्ट किया कि कोई तीसरा पक्ष इसमें शामिल नहीं था।
विशेषज्ञों का कहना है कि चीन का यह दावें अंतरराष्ट्रीय मीडिया और वैश्विक मंचों पर प्रभाव बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा हो सकते हैं।
पाकिस्तान (Pakistan ) की प्रतिक्रिया और ट्रम्प का संदर्भ
पाकिस्तान ने चीन के दावे का समर्थन करते हुए कहा कि चीन के नेताओं ने पाकिस्तानी नेतृत्व और भारत के साथ संपर्क बनाए रखा।
इसके अलावा, पाकिस्तान ने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प की कूटनीतिक पहल का भी उल्लेख किया। पाकिस्तान का यह कहना है कि ट्रम्प की मध्यस्थता ने भारत-पाक युद्ध की संभावना को टालने में मदद की।
निष्कर्ष
इस विवाद ने भारत, पाकिस्तान और चीन के तीन देशों के रिश्तों और रणनीतिक कूटनीति को लेकर नई बहस शुरू कर दी है।
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भारत लगातार तीसरे पक्ष की भूमिका को नकारता रहा है।
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पाकिस्तान ने चीन और ट्रम्प दोनों की मध्यस्थता को सराहा।
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चीन की दावे और पाकिस्तान का समर्थन, वैश्विक कूटनीति में इसका महत्व दर्शाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत-पाकिस्तान टकराव के दौरान संघर्षविराम और आगे की बातचीत का मुख्य आधार सीधा सैन्य संवाद और नियंत्रण था, न कि किसी तीसरे देश की मध्यस्थता।

