Kasganj Updates : नदरई में भीमसेन मंदिर पर लगा परंपरागत सांस्कृतिक मेला, पूजा अर्चना कर मांगी मुरादें
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Kasganj Updates : कासगंज के नदरई गांव में भीमसेन मंदिर पर परंपरागत सांस्कृतिक मेले का आयोजन हुआ। हजारों श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना कर मनोकामनाएं मांगी। बच्चों के झूले, चाट-पकौड़ी की दुकानों और सौंदर्य प्रसाधन की स्टॉल से मेला गुलजार रहा। लोगों ने ब्रिटिशकालीन झाल पुल का भी दीदार किया।
Kasganj Updates : नदरई में भीमसेन मंदिर पर लगा परंपरागत सांस्कृतिक मेला, श्रद्धालुओं ने की पूजा-अर्चना
उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले के नदरई गांव में चैत्र मास के अवसर पर भीमसेन मंदिर पर लगने वाला परंपरागत सांस्कृतिक मेला इस वर्ष भी श्रद्धा और उल्लास के साथ आयोजित किया गया। इस मेले में क्षेत्र के हजारों श्रद्धालु पहुंचे और मंदिर में पूजा-अर्चना कर अपनी मनोकामनाएं मांगीं। पूरे दिन मंदिर परिसर और मेला स्थल पर चहल-पहल और उत्सव जैसा माहौल बना रहा।
बसौड़ा पूजन के बाद लगता है मेला
नदरई गांव में यह मेला चैत्र मास में बसौड़ा पूजन के बाद पड़ने वाले मंगलवार को आयोजित किया जाता है। यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और क्षेत्र के लोगों के लिए इसका विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है।
इस दिन आसपास के गांवों और कस्बों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु भीमसेन मंदिर पहुंचते हैं। मंदिर में पूजा-अर्चना कर लोग अपने परिवार की सुख-समृद्धि और स्वास्थ्य के लिए मनौती मांगते हैं। पूरे दिन मंदिर परिसर में भक्तों की भीड़ लगी रहती है।
भीमसेन मंदिर में माता ललिता देवी के दर्शन

नदरई स्थित भीमसेन मंदिर में माता ललिता देवी की प्रतिमा स्थापित है। श्रद्धालु यहां आकर माता के दर्शन करते हैं और नतमस्तक होकर अपनी मनोकामनाएं मांगते हैं। मान्यता है कि माता ललिता देवी की सच्चे मन से पूजा करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
मेले के दौरान श्रद्धालुओं ने मंदिर में स्थित प्रसिद्ध 84 मन के घंटे का भी पूजन किया। यह घंटा मंदिर की विशेष पहचान माना जाता है और श्रद्धालु इसके दर्शन कर विशेष आस्था प्रकट करते हैं।
बच्चों का मुंडन संस्कार भी कराया गया
इस मेले में एक विशेष परंपरा बच्चों के मुंडन संस्कार की भी है। मान्यता है कि भीमसेन मंदिर में बच्चों का मुंडन कराने से वे बीमारियों से दूर रहते हैं और उनका स्वास्थ्य अच्छा बना रहता है।
इसी विश्वास के चलते कई परिवार अपने बच्चों का मुंडन संस्कार कराने के लिए यहां पहुंचे। माता-पिता ने मंदिर में पूजा-अर्चना कर बच्चों के उज्ज्वल भविष्य और अच्छे स्वास्थ्य की कामना की।
Kasganj Updates : माता ललिता देवी की पूजा कर कराया मुर्गा उतारा
मेला स्थल पर श्रद्धालुओं ने माता ललिता देवी की विधिवत पूजा-अर्चना की। इसके बाद बच्चों का “मुर्गा उतारा” भी कराया गया। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार यह परंपरा बच्चों को रोग और नकारात्मक प्रभावों से बचाने के लिए की जाती है।
इस धार्मिक अनुष्ठान में महिलाओं और पुरुषों ने बड़ी श्रद्धा के साथ भाग लिया और माता से अपने परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना की।
बच्चों के लिए झूले बने आकर्षण का केंद्र
मेले में बच्चों के लिए विभिन्न प्रकार के झूले और खेल-खिलौनों की दुकानें लगाई गई थीं। छोटे बच्चों से लेकर बड़े बच्चों तक सभी ने झूलों का आनंद लिया।
इसके अलावा मेले में चाट-पकौड़ी, मिठाई और खाने-पीने की कई दुकानें भी सजी थीं। ग्रामीण परिवेश से जुड़े सौंदर्य प्रसाधनों की भी दर्जनों दुकानें मेले में लगी थीं, जहां महिलाओं ने खरीदारी की।
बच्चों ने जहां झूलों और खिलौनों का आनंद लिया, वहीं बड़ों ने चाट-पकौड़ी और अन्य व्यंजनों का स्वाद लिया।
झाल के पुल पर भी उमड़ी भीड़
नदरई मेले में आने वाले लोग पास में स्थित ऐतिहासिक ब्रिटिशकालीन झाल के पुल को देखने के लिए भी पहुंचे। यह पुल अपनी अनोखी बनावट के कारण काफी प्रसिद्ध है।
इस पुल की खासियत यह है कि इसके ऊपर नहर बहती है, नीचे काली नदी का प्रवाह है और बीच में कोठरियां बनी हुई हैं। इन कोठरियों को “चोर कोठरी” कहा जाता है। मेले में आए लोगों ने इस ऐतिहासिक पुल का भी आनंद लिया और यहां भी मेले जैसा दृश्य देखने को मिला।
झाल के पुल के आसपास भी चाट-पकौड़ी और अन्य खाने-पीने की दुकानों पर लोगों की भीड़ दिखाई दी।
सुरक्षा व्यवस्था के रहे पुख्ता इंतजाम
मेले के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा। मेला स्थल और मंदिर परिसर में पुलिस बल की तैनाती की गई थी ताकि किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या दुर्घटना से बचा जा सके।
पुलिस की निगरानी में मेला शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ और देर शाम तक श्रद्धालु मेले का आनंद लेते रहे।
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