Labour Law Protest : नए लेबर लॉ के खिलाफ मध्यप्रदेश में हड़ताल, कई शहरों में कर्मचारी सड़कों पर उतरे
Labour Law Protest : मध्यप्रदेश के इंदौर, भोपाल, ग्वालियर, सतना और मंदसौर समेत कई शहरों में नए लेबर लॉ के विरोध में कर्मचारियों ने हड़ताल और प्रदर्शन किया। चारों श्रम संहिताएं रद्द करने, मनरेगा बहाली और अन्य विधेयकों को वापस लेने की मांग उठी। ट्रेड यूनियनों ने चरणबद्ध आंदोलन की चेतावनी दी।
Labour Law Protest : मध्यप्रदेश में नए लेबर लॉ के खिलाफ हड़ताल, कई शहरों में प्रदर्शन
नए लेबर लॉ और चारों श्रम संहिताओं के विरोध में मध्यप्रदेश के कई शहरों में केंद्रीय श्रमिक संगठनों ने हड़ताल की। इंदौर, भोपाल, जबलपुर, कटनी, इटारसी, ग्वालियर, सतना, भिंड और मंदसौर सहित कई जिलों में कर्मचारी सड़कों पर उतरे और सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया।
ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मोर्चे ने चारों श्रम संहिताओं को रद्द करने की मांग प्रमुखता से उठाई। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि नए श्रम कानून श्रमिकों के हितों के खिलाफ हैं और इससे रोजगार सुरक्षा कमजोर होगी।
डिफेंस फैक्टरियों और बैंकों के सामने प्रदर्शन
जबलपुर, कटनी और इटारसी में डिफेंस फैक्टरियों के बाहर कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया। इटारसी में कर्मचारियों ने एक घंटे तक विरोध जताया, जिसके बाद वे काम पर लौट गए।
हड़ताल में आईएनटीयूसी, एआईटीयूसी, एचएमएस, सीटू, एआईयूटीयूसी, सेवा, बैंक, बीमा, केंद्रीय कर्मचारी और बीएसएनएल संगठनों ने भाग लिया।
मध्य प्रदेश बैंक एम्प्लॉइज एसोसिएशन के को-ऑर्डिनेटर वीके शर्मा ने बताया कि सरकारी और निजी बैंक दोनों के कर्मचारी हड़ताल में शामिल हैं। हालांकि भारतीय स्टेट बैंक यूनियन ने हड़ताल का समर्थन किया है, लेकिन वह सीधे तौर पर इसमें शामिल नहीं है।
बीमा, बीएसएनएल और डाक विभाग में असर

Life Insurance Corporation of India (एलआईसी) के कर्मचारी भी हड़ताल में शामिल रहे।
इसके अलावा बीएसएनएल और डाक विभाग में भी कामकाज प्रभावित होने की खबरें हैं। कई जगहों पर बैंकिंग सेवाओं और बीमा कार्यों पर आंशिक असर देखा गया।
चारों श्रम संहिताएं रद्द करने की मांग
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें इस प्रकार रहीं:
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चारों श्रम संहिताओं (लेबर कोड्स) और उनसे जुड़े नियमों को रद्द किया जाए।
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ड्राफ्ट सीड बिल वापस लिया जाए।
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बिजली संशोधन विधेयक निरस्त किया जाए।
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SHANTI Act (न्यूक्लियर एनर्जी से संबंधित कानून) वापस लिया जाए।
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मनरेगा की बहाली की जाए।
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विकसित भारत-रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) अधिनियम 2025 को रद्द किया जाए।
संगठनों का कहना है कि ये नीतियां मजदूर और किसान हितों के खिलाफ हैं।
ग्वालियर में धरना, दिल्ली कूच की चेतावनी
ग्वालियर में ट्रेड यूनियनों ने लक्ष्मीबाई समाधि स्थल के सामने धरना दिया। प्रदर्शन के दौरान चारों श्रम संहिताओं को रद्द करने और भारत-अमेरिका ट्रेड डील समाप्त करने की मांग की गई।
यूनियन नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने मांगें नहीं मानीं तो चरणबद्ध आंदोलन करते हुए दिल्ली कूच किया जाएगा।
सतना में आमसभा, भिंड में किसान मोर्चा सक्रिय
सतना में भारत बंद का असर सीमित रहा। बाजार खुले रहे, लेकिन संयुक्त ट्रेड यूनियनों ने शांतिपूर्ण आमसभा कर सरकार की नीतियों की आलोचना की।
भिंड में सीटू के नेतृत्व में संयुक्त किसान मोर्चा और अखिल भारतीय किसान महासभा ने कलेक्टोरेट गेट पर धरना दिया। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के समर्थन में रैली भी निकाली गई।
मंदसौर में सैकड़ों मजदूरों का प्रदर्शन
मंदसौर में महाराणा प्रताप चौराहा स्थित अभिव्यक्ति स्थल पर विभिन्न श्रमिक संगठनों ने प्रदर्शन किया। मध्य प्रदेश बैंक एम्प्लाइज एसोसिएशन, मेडिकल एवं सेल्स रिप्रेजेंटेटिव यूनियन, सफाई कामगार मोर्चा और आशा-उषा-आशा सहयोगिनी एकता यूनियन सहित कई संगठनों के कार्यकर्ता मौजूद रहे।
नेताओं ने दावा किया कि यह देशव्यापी हड़ताल है, जिसमें लगभग 30 करोड़ मजदूर शामिल हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
आगे क्या?
ट्रेड यूनियनों का कहना है कि यदि सरकार ने श्रम संहिताओं पर पुनर्विचार नहीं किया तो चरणबद्ध आंदोलन जारी रहेगा। फिलहाल राज्यभर में धरना, प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपने का सिलसिला जारी है।
अब देखना होगा कि केंद्र और राज्य सरकार इस विरोध पर क्या रुख अपनाती हैं और क्या श्रमिक संगठनों की मांगों पर कोई ठोस पहल की जाती है।

