Next Iran Supreme Leader : Ayatollah Ali Khamenei के बाद सत्ता का सवाल
सरकारी मीडिया और अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स में उनके बेटे Mojtaba Khamenei का नाम प्रमुख दावेदार के रूप में सामने आ रहा है।
88 मौलवियों की असेंबली करेगी फैसला
ईरान में सुप्रीम लीडर का चुनाव Assembly of Experts करती है, जिसमें 88 धर्मगुरु शामिल होते हैं। जनता हर 8 साल में इनका चुनाव करती है।
यही असेंबली रहबर को चुनती है और जरूरत पड़ने पर उन्हें हटा भी सकती है। अंतिम निर्णय इसी संस्था के हाथ में होता है।
क्या मुजतबा पहले से तैयार थे?
रिपोर्ट्स के मुताबिक मुजतबा पिछले दो साल से सत्ता संभालने की तैयारी कर रहे थे। कहा जाता है कि खामेनेई की बीमारी के दौरान उन्हें उत्तराधिकारी के रूप में तैयार किया गया।
हालांकि उनकी नियुक्ति की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई थी, लेकिन अंदरूनी हलकों में उन्हें मजबूत दावेदार माना जा रहा था।
इस्लामिक मामलों के जानकार, लेकिन रहस्यमयी व्यक्तित्व
मुजतबा खामेनेई इस्लामिक मामलों के जानकार माने जाते हैं। वे 2009 के ‘ग्रीन मूवमेंट’ के दौरान चर्चा में आए थे, जब चुनावी विवाद के बाद बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए।
उन पर आरोप लगा कि उन्होंने आंदोलन को सख्ती से दबाने में भूमिका निभाई। हालांकि वे कभी किसी आधिकारिक सरकारी पद पर नहीं रहे और सार्वजनिक भाषण भी कम देते हैं।
ईरान की सत्ता संरचना समझिए
ईरान की राजनीतिक व्यवस्था में पांच प्रमुख संस्थाएं सबसे ताकतवर मानी जाती हैं:
1. रहबर (सुप्रीम लीडर)
देश की सेना, विदेश नीति और प्रमुख फैसलों पर अंतिम अधिकार।
2. Assembly of Experts
88 सदस्यीय धार्मिक संस्था, जो रहबर का चुनाव करती है।
3. राष्ट्रपति
सरकार चलाते हैं, लेकिन अंतिम फैसला रहबर का होता है।
4. गार्डियन काउंसिल
6 धर्मगुरु और 6 जज शामिल। संसद के कानूनों की समीक्षा करती है।
5. संसद
290 सदस्यीय संस्था, जो कानून और बजट पास करती है।
37 साल तक सत्ता में रहे खामेनेई
अयातुल्ला अली खामेनेई 1989 से ईरान के सुप्रीम लीडर थे। वे Ruhollah Khomeini के निधन के बाद इस पद पर आए थे।
1979 की इस्लामिक क्रांति में उन्होंने अहम भूमिका निभाई थी। इससे पहले वे ईरान के राष्ट्रपति भी रह चुके थे।
आगे क्या होगा?
अब पूरी दुनिया की नजर ईरान की असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स पर है। यदि मुजतबा को रहबर चुना जाता है, तो यह ईरान की राजनीति में एक बड़ा बदलाव होगा।
ईरान और इजराइल के बीच जारी तनाव के बीच नया सुप्रीम लीडर देश की सैन्य और विदेश नीति को किस दिशा में ले जाएगा, यह आने वाले दिनों में साफ होगा।
फिलहाल 88 मौलवियों का फैसला ही तय करेगा कि ईरान का अगला ‘रहबर’ कौन होगा।