Mahakal Sawan First Monday 2026: सावन के पहले सोमवार उज्जैन में बाबा महाकाल की शाही सवारी निकली। 8 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। ओंकारेश्वर, पशुपतिनाथ और प्रदेशभर के शिवालयों में भी आस्था का सैलाब उमड़ा।
Mahakal Sawan First Monday 2026: सावन के पहले सोमवार महाकाल की शाही सवारी में उमड़ा जनसैलाब, 8 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने किए दर्शन

Mahakal Sawan First Monday 2026: सावन के पहले सोमवार पर पूरा मध्यप्रदेश भगवान शिव की भक्ति में सराबोर नजर आया। उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। भगवान महाकाल ‘चंद्रमौलेश्वर’ स्वरूप में चांदी की पालकी में सवार होकर नगर भ्रमण पर निकले और भक्तों को दर्शन दिए। इस दौरान मंदिर परिसर और पूरे सवारी मार्ग पर “हर-हर महादेव”, “बोल बम” और “जय श्री महाकाल” के जयघोष लगातार गूंजते रहे।
महाकाल मंदिर प्रशासन के अनुसार सावन के पहले सोमवार को शाम तक करीब 6.13 लाख श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन किए, जबकि 2 लाख से अधिक श्रद्धालु भस्म आरती और शाही सवारी में शामिल हुए। इस प्रकार पूरे दिन में 8 लाख से ज्यादा श्रद्धालु उज्जैन पहुंचे, जिससे शहर पूरी तरह शिवमय दिखाई दिया।
चांदी की पालकी में निकले बाबा महाकाल
हर वर्ष की परंपरा के अनुसार सावन के पहले सोमवार पर भगवान महाकाल ‘चंद्रमौलेश्वर’ स्वरूप में चांदी की भव्य पालकी में विराजमान होकर नगर भ्रमण के लिए निकले। पालकी के पीछे सजे-धजे हाथी पर भगवान मनमहेश की प्रतिमा विराजित रही।
शाही सवारी के स्वागत के लिए पूरे मार्ग को आकर्षक फूलों, रंगोली और धार्मिक सजावट से सजाया गया था। श्रद्धालुओं ने जगह-जगह पुष्प वर्षा कर बाबा महाकाल का स्वागत किया।
शिप्रा तट पर हुआ विशेष पूजन और अभिषेक
निर्धारित मार्ग से गुजरते हुए शाही सवारी पवित्र शिप्रा नदी के तट पर पहुंची। यहां वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान महाकाल का शिप्रा जल से विधि-विधान के साथ अभिषेक और पूजन किया गया।
हजारों श्रद्धालुओं ने घाटों पर खड़े होकर बाबा महाकाल के दर्शन किए और सुख-समृद्धि की कामना की।
महाकाल मंदिर में रात से लगी श्रद्धालुओं की कतार
सावन सोमवार के अवसर पर श्रद्धालु देर रात से ही महाकाल मंदिर पहुंचने लगे थे। नंदी हॉल, कार्तिक मंडपम और मंदिर परिसर के बाहर लंबी-लंबी कतारें देखने को मिलीं।
भस्म आरती में शामिल होने के लिए भी बड़ी संख्या में भक्तों ने पहले से पंजीकरण कराया था। मंदिर प्रशासन और जिला प्रशासन ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए विशेष व्यवस्थाएं की थीं।
ओंकारेश्वर में भी उमड़ी आस्था
खंडवा जिले के प्रसिद्ध ओंकारेश्वर-ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग में भी सावन के पहले सोमवार पर भव्य शाही सवारी निकाली गई।
शाही सवारी गौमुख घाट और कोटितीर्थ पहुंची, जहां वैदिक मंत्रों के बीच पंचामृत अभिषेक और विशेष पूजा-अर्चना संपन्न हुई।
पूरे तीर्थ क्षेत्र में “हर-हर महादेव” और “जय श्री ओंकार” के जयघोष गूंजते रहे। श्रद्धालुओं ने फूलों की वर्षा कर भगवान ओंकारेश्वर का स्वागत किया।
पशुपतिनाथ और भोजपुर में भी उमड़े श्रद्धालु
मंदसौर स्थित विश्व प्रसिद्ध अष्टमुखी भगवान पशुपतिनाथ मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। मंगला आरती के बाद दर्शन और जलाभिषेक का सिलसिला देर तक चलता रहा।
वहीं रायसेन के ऐतिहासिक भोजपुर शिव मंदिर में भी 50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने भगवान भोलेनाथ के दर्शन कर जलाभिषेक किया।
पूरे प्रदेश में शिवालयों में दिखी आस्था
भोपाल, हरदा, उमरिया, ग्वालियर, खजुराहो, बांदकपुर, अचलेश्वर महादेव सहित प्रदेश के प्रमुख शिव मंदिरों में सुबह से भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं।
श्रद्धालुओं ने बेलपत्र, धतूरा, दूध, दही, शहद और गंगाजल से भगवान शिव का अभिषेक कर परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की।
कांवड़ यात्राओं का भी दिखा उत्साह
सावन के पहले सोमवार पर प्रदेशभर में कांवड़ यात्राओं का उत्साह भी चरम पर रहा।
नर्मदापुरम के सेठानी घाट से हजारों कांवड़िए नर्मदा जल लेकर पचमढ़ी स्थित जटाशंकर महादेव के लिए रवाना हुए। इसके अलावा आष्टा, इटारसी, उमरिया, श्योपुर और अन्य जिलों में भी कांवड़ यात्राएं निकाली गईं।
कई स्थानों पर श्रद्धालुओं ने शिव मंदिरों में जलाभिषेक कर धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया।

सुरक्षा और व्यवस्थाओं पर रहा विशेष फोकस
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे। पुलिस, नगर निगम, स्वास्थ्य विभाग और स्वयंसेवकों की टीमें पूरे सवारी मार्ग और मंदिर परिसर में तैनात रहीं।
सीसीटीवी कैमरों, ड्रोन निगरानी और कंट्रोल रूम के माध्यम से पूरे आयोजन पर नजर रखी गई ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
शिवमय हुआ मध्यप्रदेश
सावन के पहले सोमवार पर उज्जैन, ओंकारेश्वर, पशुपतिनाथ, भोजपुर और प्रदेश के अन्य प्रमुख शिवालयों में उमड़ी श्रद्धा ने यह साबित कर दिया कि भगवान शिव के प्रति लोगों की आस्था आज भी उतनी ही गहरी है।
महाकाल की शाही सवारी, कांवड़ यात्राएं और जलाभिषेक जैसे धार्मिक आयोजनों ने पूरे मध्यप्रदेश को शिवभक्ति के रंग में रंग दिया।
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