होली के अवसर पर जयपुर के ब्रह्मपुरी स्थित छोटा अखाड़ा एक बार फिर लोकनाट्य की रंगत से सराबोर हो उठा। यहां जयपुर की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर जयपुर तमाशा की भव्य प्रस्तुति ‘रांझा-हीर’ का सफल मंचन किया गया। दर्शकों की उल्लेखनीय उपस्थिति ने आयोजन को उत्सव का रूप दे दिया।
पंडित बंशीधर भट्ट की अमर रचना का मंचन
‘रांझा-हीर’ की यह प्रस्तुति प्रसिद्ध रचनाकार पंडित बंशीधर भट्ट द्वारा लिखित अमर प्रेमाख्यान पर आधारित थी। पारंपरिक गायन शैली, प्रभावशाली संवाद और लोक वाद्यों की सजीव संगत ने इसे विशेष बना दिया।
निर्देशन की कमान प्रख्यात लोकनाट्य गुरु पंडित वासुदेव भट्ट के हाथों में रही। उनके सधे मार्गदर्शन में प्रस्तुति ने परंपरा और समसामयिकता का सुंदर संतुलन स्थापित किया। उन्होंने बताया कि यह मंचन जयपुर तमाशा परिवार की छठी और सातवीं पीढ़ी द्वारा प्रस्तुत किया गया, जो परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण प्रयास है।
jaipur Updates : प्रभावी अभिनय और सजीव संगीत ने बांधा समां
मुख्य भूमिका में रांझा का किरदार तपन भट्ट ने निभाया, जबकि हीर के रूप में विनत भट्ट ने भावपूर्ण अभिनय से दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया। चितरंगा की भूमिका में विशाल भट्ट प्रभावी रहे। रांझा की प्रेमिकाओं के रूप में अभिनय भट्ट और संवाद भट्ट ने सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई।
कार्यक्रम का शुभारंभ गणेश वंदना से हुआ, जिसे डॉ. सौरभ भट्ट और डॉ. कपिल शर्मा ने स्वर दिया। बारहमासी गायन में रिमझिम भट्ट और झिलमिल भट्ट की मधुर प्रस्तुति ने वातावरण को संगीतमय बना दिया। कोरस में पाखी भट्ट और अंकन भट्ट ने सहयोग दिया।
तबले पर शैलेन्द्र शर्मा और अनुज भट्ट की संगत तथा सारंगी पर फ़िरदौस खान की मधुर ध्वनि ने प्रस्तुति को ऊंचाई प्रदान की। पारंपरिक वाद्यों की जीवंत प्रस्तुति ने दर्शकों को लोकनाट्य की मूल आत्मा से जोड़े रखा।
व्यंग्य के माध्यम से समसामयिक मुद्दों पर प्रहार
जयपुर तमाशा की विशेषता रही है कि इसमें प्रेमगाथा के साथ-साथ समसामयिक मुद्दों को भी व्यंग्य के माध्यम से पिरोया जाता है। इस प्रस्तुति में पहलगाम हमले, ऑपरेशन सिंदूर, ट्रंप टैरिफ, बिना छपी किताब विवाद, एप्सटीन मुद्दा और एसआईआर विवाद जैसे विषयों पर तीखे व्यंग्य प्रस्तुत किए गए।
लोकनाट्य की पारंपरिक शैली में इन विषयों को प्रस्तुत करते हुए कलाकारों ने मनोरंजन के साथ-साथ दर्शकों को सोचने पर भी मजबूर किया। यही तमाशा की जीवंतता और प्रासंगिकता का प्रमाण है।
jaipur Updates : कलाकार सम्मान श्रृंखला में विशिष्ट सम्मान
इस अवसर पर कलाकार सम्मान श्रृंखला के अंतर्गत प्रख्यात धुपद गायिका मधु भट्ट तैलंग, सारंगी वादक फिरदौस खान और वरिष्ठ रंगकर्मी सुरेश कौल का सम्मान किया गया। यह सम्मान लोककला और रंगमंच के प्रति उनके योगदान के लिए प्रदान किया गया।
सातवीं पीढ़ी ने संभाली परंपरा की मशाल
जयपुर तमाशा की यह प्रस्तुति इस बात का प्रमाण है कि सदियों पुरानी लोकनाट्य शैली आज भी उतनी ही प्रभावशाली है, जितनी अपने आरंभिक दौर में थी। सातवीं पीढ़ी के कलाकारों ने मंच पर अपनी प्रतिभा और समर्पण से यह सिद्ध कर दिया कि परंपरा केवल विरासत नहीं, बल्कि जीवंत संस्कृति है।
होली के रंगों के बीच ब्रह्मपुरी में गूंजा ‘रांझा-हीर’ तमाशा दर्शकों के लिए यादगार बन गया और यह आयोजन लोकनाट्य की निरंतरता का सशक्त उदाहरण साबित हुआ।