Iran Violence Protests : ईरान हिंसा में 538 मौतें, 10 हजार गिरफ्तार, अमेरिका-इजराइल को ईरान की खुली धमकी
Iran Violence Protests : ईरान में 15 दिन से जारी हिंसक प्रदर्शनों में 538 लोगों की मौत और 10,600 से ज्यादा गिरफ्तारियां हुई हैं। इस बीच ईरान ने अमेरिका और इजराइल को चेतावनी दी है कि हमला हुआ तो कड़ा पलटवार किया जाएगा। जानिए पूरी स्थिति।
Iran Violence Protests : ईरान हिंसा– अब तक 538 लोगों की मौत, 10 हजार अरेस्ट
अमेरिका-इजराइल को ईरान की चेतावनी: हमला किया तो कड़ा पलटवार करेंगे
ईरान में बीते 15 दिनों से जारी हिंसक सरकार विरोधी प्रदर्शनों ने देश को अभूतपूर्व संकट में डाल दिया है। अब तक इन प्रदर्शनों में 538 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 10,600 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया है। यह जानकारी न्यूज एजेंसी AP ने प्रदर्शनकारियों के हवाले से दी है।
रिपोर्ट के मुताबिक, मरने वालों में 490 प्रदर्शनकारी और 48 सुरक्षा कर्मी शामिल हैं। हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं और इसी बीच ईरान ने अमेरिका और इजराइल को सीधी सैन्य चेतावनी दे दी है।
Iran Violence Protests : ईरान की अमेरिका को खुली धमकी

ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर कालीबाफ ने संसद के लाइव सत्र के दौरान कहा कि अगर अमेरिका ने ईरान पर हमला किया, तो क्षेत्र में मौजूद सभी अमेरिकी मिलिट्री बेस, युद्धपोत और इजराइल ईरान के निशाने पर होंगे।
यह बयान ऐसे समय आया है, जब संसद में मौजूद सांसद “डेथ टू अमेरिका” के नारे लगा रहे थे। कालीबाफ ने कहा कि ईरान किसी भी विदेशी आक्रमण का माकूल जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है।
सुरक्षा एजेंसियों की तारीफ, प्रदर्शनकारियों को चेतावनी
कालीबाफ ने ईरान की सुरक्षा एजेंसियों की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने हालात को मजबूती से संभाला है।
उन्होंने प्रदर्शनकारियों को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि गिरफ्तार किए गए लोगों से सबसे कठोर तरीके से निपटा जाएगा और उन्हें कड़ी सजा दी जाएगी।
यह बयान सरकार के सख्त रुख को दर्शाता है, जिससे हालात और ज्यादा तनावपूर्ण हो गए हैं।
Iran Violence Protests : ट्रम्प को ईरान पर हमले का प्लान बताया गया
ईरान में जारी हिंसा के बीच अमेरिकी अधिकारियों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को ईरान पर संभावित सैन्य हमलों के विकल्पों की ब्रीफिंग दी है।
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अगर ईरानी सरकार प्रदर्शनकारियों पर और सख्ती करती है, तो ट्रम्प सैन्य कार्रवाई पर गंभीरता से विचार कर सकते हैं। हालांकि, अभी तक कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है।
ट्रम्प का बयान- अमेरिका मदद को तैयार

डोनाल्ड ट्रम्प ने शनिवार को सोशल मीडिया पर लिखा—
“ईरान आजादी की ओर देख रहा है, जो पहले कभी नहीं हुआ। अमेरिका मदद के लिए तैयार है।”
इसके जवाब में ईरानी संसद के स्पीकर कालीबाफ ने दो टूक कहा कि अगर अमेरिका या इजराइल ने हमला किया, तो दोनों को सख्त जवाब मिलेगा।
Iran Violence Protests : ईरानी राष्ट्रपति का आरोप- अमेरिका-इजराइल दंगे भड़का रहे
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने रविवार को अमेरिका और इजराइल पर गंभीर आरोप लगाए।
उन्होंने कहा कि दोनों देश ईरान में अराजकता और अव्यवस्था फैलाने के लिए दंगे भड़का रहे हैं।
सरकारी टीवी पर प्रसारित इंटरव्यू में पजशकियान ने कहा कि सरकार प्रदर्शनकारियों की बात सुनेगी, लेकिन उन दंगाइयों की नहीं जो पूरे समाज को तबाह करना चाहते हैं।
“दंगाइयों को बख्शा नहीं जाएगा” – राष्ट्रपति
पजशकियान ने कहा—
“हम लोगों की समस्याओं का समाधान करेंगे, लेकिन दंगाइयों को पूरे समाज को खत्म करने की इजाजत नहीं दे सकते।”
यह बयान बताता है कि सरकार बातचीत और सख्ती—दोनों रास्तों पर एक साथ चल रही है।
इजराइल हाई अलर्ट पर

ईरान पर संभावित अमेरिकी हमले की आशंका को देखते हुए इजराइल हाई अलर्ट पर है।
रॉयटर्स के मुताबिक, इजराइली सुरक्षा एजेंसियों ने सतर्कता बढ़ा दी है।
याद दिला दें कि जून में ईरान और इजराइल के बीच 12 दिन की जंग हो चुकी है, जिसमें अमेरिका ने इजराइल के साथ मिलकर हवाई हमले किए थे।
नेतन्याहू और रुबियो के बीच बातचीत
शनिवार को इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के बीच फोन पर बातचीत हुई।
रिपोर्ट के मुताबिक, इस बातचीत में ईरान में अमेरिकी दखल की संभावना पर चर्चा हुई।
अमेरिकी अधिकारियों ने कॉल की पुष्टि की, लेकिन बातचीत के ब्योरे सार्वजनिक नहीं किए गए।
प्रदर्शनकारियों को फांसी की धमकी
ईरान में सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सख्त रुख अपना लिया है।
ईरान के अटॉर्नी जनरल मोहम्मद मोवाहेदी आजाद ने चेतावनी दी कि प्रदर्शनकारियों को ‘खुदा का दुश्मन’ माना जाएगा, जिसके तहत मौत की सजा दी जा सकती है।

लंदन में ईरानी दूतावास पर प्रदर्शन
ब्रिटेन की राजधानी लंदन में ईरानी दूतावास के बाहर भी विरोध प्रदर्शन हुए।
एक प्रदर्शनकारी ने दूतावास से ईरान का मौजूदा झंडा हटाकर 1979 से पहले का शेर और सूरज वाला झंडा फहरा दिया।
यह झंडा कुछ मिनटों तक फहरता रहा, जिसके बाद उसे हटा दिया गया।

लंदन पुलिस की कार्रवाई
लंदन पुलिस ने बताया कि इस घटना के बाद सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
अब तक 3 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि एक अन्य संदिग्ध की तलाश जारी है।
प्रदर्शन के दौरान ‘Free Iran’ और ‘Democracy for Iran’ के नारे लगाए गए।
रजा पहलवी की जनता से अपील

ईरान के निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी ने वीडियो संदेश जारी कर जनता से फिर सड़कों पर उतरने की अपील की है।
उन्होंने शाम 6 बजे बड़े समूहों में मुख्य सड़कों पर आने को कहा है।
पहलवी ने दावा किया कि लगातार प्रदर्शनों से खामेनेई का दमनकारी तंत्र कमजोर हो रहा है।
सुरक्षा बलों की कमी का दावा
रजा पहलवी के मुताबिक, उन्हें रिपोर्ट मिली हैं कि इस्लामी गणराज्य के पास प्रदर्शनकारियों से निपटने के लिए पर्याप्त सुरक्षा बल नहीं हैं।
कई सुरक्षाकर्मी अपने पद छोड़ चुके हैं और जनता के खिलाफ कार्रवाई से इनकार कर रहे हैं।
देश लौटने की तैयारी में रजा पहलवी
65 वर्षीय रजा पहलवी ने कहा है कि वे देश लौटने की तैयारी कर रहे हैं।
सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने लिखा—
“मैं अपनी राष्ट्रीय क्रांति की जीत के समय ईरान की महान जनता के साथ खड़ा होना चाहता हूं।”
क्यों उठ रही है सत्ता सौंपने की मांग
ईरान में 47 साल से धार्मिक शासन कायम है।
आर्थिक संकट, बेरोजगारी, महंगाई, प्रतिबंध और व्यक्तिगत आजादी की कमी से जनता नाराज है।
इसी कारण रजा पहलवी को धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक विकल्प के रूप में देखा जा रहा है, खासकर युवाओं और GenZ द्वारा।
महंगाई और आर्थिक संकट ने भड़काया गुस्सा
दिसंबर 2025 में ईरानी मुद्रा रियाल गिरकर 1.45 मिलियन प्रति डॉलर पहुंच गई।
खाद्य वस्तुओं की कीमतों में 72% और दवाओं में 50% की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
इसके अलावा 2026 के बजट में 62% टैक्स बढ़ाने के प्रस्ताव ने आग में घी डाल दिया।
खामेनेई का बयान- विदेशी एजेंट जिम्मेदार
सुप्रीम लीडर खामेनेई ने कहा कि प्रदर्शन विदेशी एजेंटों द्वारा प्रायोजित हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग अमेरिकी राष्ट्रपति को खुश करने के लिए देश को बर्बाद करना चाहते हैं।
खामेनेई ने कहा—
“इस्लामिक रिपब्लिक कभी अपने दुश्मनों के सामने नहीं झुकेगी।”
ईरान की अर्थव्यवस्था तेल पर निर्भर
2024 में ईरान का कुल निर्यात 22.18 बिलियन डॉलर और आयात 34.65 बिलियन डॉलर रहा।
2025 में व्यापार घाटा बढ़कर 15 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया।
ईरान का 90% तेल चीन को जाता है, लेकिन प्रतिबंधों के कारण अर्थव्यवस्था लगातार दबाव में है।

