Russia India Oil Import : रूस से भारत का तेल आयात घटा, ट्रम्प बोले- मोदी ने मुझे खुश करने के लिए किया
Russia India Oil Import :अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत के रूस से तेल आयात घटाने पर प्रतिक्रिया दी। भारत ने नवंबर से दिसंबर में रूसी तेल आयात घटाया, जिससे अमेरिका के साथ टैरिफ विवाद और ऊर्जा सप्लाई रणनीति पर असर पड़ा। नई व्यापार वार्ता में समाधान की उम्मीद है।
Russia India Oil Import :रूस से भारत का तेल आयात घटा, ट्रम्प ने जताई खुशी
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत के रूस से तेल आयात घटाने पर प्रतिक्रिया दी है। ट्रम्प ने कहा कि भारत ने यह कदम उन्हें खुश करने के लिए लिया, क्योंकि वे रूस से भारत की बढ़ती तेल खरीद से नाखुश थे।
यूक्रेन युद्ध के बाद भारत रूस का सबसे बड़ा तेल खरीदार बन गया था। अमेरिकी अधिकारियों ने आरोप लगाया था कि भारत रूस से तेल खरीदकर यूक्रेन पर हो रहे हमलों को फंड कर रहा है। इस वजह से ट्रम्प प्रशासन ने भारत पर 25% टैरिफ भी लगाया था।
Russia India Oil Import :भारत ने 4 साल बाद रूस से तेल आयात घटाया
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रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, भारत का रूसी तेल आयात नवंबर 2025 में लगभग 17.7 लाख बैरल प्रति दिन था, जो दिसंबर में घटकर लगभग 12 लाख बैरल प्रति दिन रह गया। भविष्य में यह 10 लाख बैरल प्रति दिन से भी नीचे जा सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जनवरी में आने वाले आंकड़े भारत के रूस से तेल आयात में और अधिक गिरावट दिखा सकते हैं।
Russia India Oil Import :अमेरिकी प्रतिबंध और टैरिफ का असर

नवंबर 2021 से रूस की प्रमुख तेल कंपनियों रोसनेफ्ट और लुकोइल पर अमेरिकी प्रतिबंध लागू हुए। इसके बाद भारत का रूस से तेल आयात घटने लगा।
ट्रंप प्रशासन ने भारत पर कुल 50% टैरिफ लगाया है, जिसमें से:
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25% ‘रेसिप्रोकल टैरिफ’ (जैसे को तैसा)
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25% रूसी तेल खरीदने की वजह से
इन टैरिफों ने भारत के अमेरिका में निर्यात को प्रभावित किया है। दोनों देशों के बीच अब व्यापार वार्ता चल रही है, जिसमें भारत चाहता है कि कुल 50% टैरिफ को घटाकर 15% किया जाए और रूस से तेल पर अतिरिक्त 25% पेनाल्टी पूरी तरह खत्म हो।
Russia India Oil Import : रूस ने तेल डिस्काउंट घटाया

यूक्रेन युद्ध के बाद रूस ने 20-25 डॉलर प्रति बैरल सस्ता क्रूड ऑयल बेचना शुरू किया। उस समय अंतरराष्ट्रीय मार्केट में कच्चे तेल की कीमत 130 डॉलर प्रति बैरल थी।
हालांकि अब तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमत घटकर 63 डॉलर प्रति बैरल हो गई है। रूस ने अपनी छूट घटाकर 1.5-2 डॉलर प्रति बैरल कर दी। इसके चलते भारत को रूस से तेल खरीदने में पहले जैसा लाभ नहीं मिल रहा।
ऊपर से शिपिंग और बीमा खर्च भी बढ़ गया है। यही कारण है कि भारत अब सऊदी अरब, UAE और अमेरिका जैसे स्थिर और भरोसेमंद सप्लायर्स से तेल खरीदने लगा है।
भारत की ऊर्जा सुरक्षा और रणनीति
भारत का कदम ऊर्जा सुरक्षा और विविध सप्लाई चैनल सुनिश्चित करने के दृष्टिकोण से अहम है। रूस से तेल पर छूट कम होने और अमेरिका से टैरिफ दबाव के बीच भारत ने रणनीतिक रूप से आपूर्ति स्रोतों में विविधता अपनाई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत का यह कदम अंतरराष्ट्रीय मार्केट में भारत की भूमिका को और मजबूत करेगा।
अमेरिका-भारत ट्रेड वार्ता
अमेरिका के साथ टैरिफ विवाद को सुलझाने के लिए नई व्यापार वार्ता चल रही है। भारत चाहता है कि:
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रूस से तेल पर अतिरिक्त टैरिफ हटाया जाए
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कुल अमेरिकी टैरिफ 15% तक सीमित किया जाए
यदि ये वार्ता सफल होती है, तो यह भारत के निर्यात और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर सकारात्मक असर डालेगी।
भविष्य की संभावनाएं
विश्लेषकों के अनुसार, आने वाले महीनों में:
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रूस से तेल आयात में और कमी आ सकती है
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भारत के सऊदी, UAE और अमेरिका से तेल आयात बढ़ सकते हैं
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अमेरिका और भारत के बीच टैरिफ में कमी व्यापार को नया आयाम दे सकती है
इस तरह भारत ने ऊर्जा सुरक्षा, आर्थिक रणनीति और अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच संतुलन बनाने का प्रयास किया है।
निष्कर्ष:
भारत ने रूस से तेल आयात घटाकर न केवल अंतरराष्ट्रीय दबाव को ध्यान में रखा, बल्कि अपनी ऊर्जा रणनीति और सप्लाई चैनल विविधता सुनिश्चित की। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति ट्रम्प के बयान से साफ है कि भारत का कदम वैश्विक राजनीति में ध्यान आकर्षित कर रहा है।

