HFSS Food Ban: स्कूलों के बाहर जंक फूड पर रोक, बच्चों को हेल्दी ईटिंग की आदत सिखाने के 8 आसान टिप्स
HFSS Food: स्कूलों के बाहर जंक फूड पर रोक, बच्चों को हेल्दी ईटिंग की आदत सिखाने के 8 आसान टिप्स
HFSS Food यानी ऐसे खाद्य पदार्थ जिनमें फैट, शुगर या नमक की मात्रा अधिक होती है, बच्चों की डाइट को लेकर लगातार चर्चा में हैं। वड़ा पाव, समोसा, बर्गर, पिज्जा, फ्रेंच फ्राइज, चिप्स, पेस्ट्री, मीठे पेय और इसी तरह के कई फूड आइटम बच्चों के बीच काफी लोकप्रिय हैं। समस्या तब बढ़ती है जब ऐसे खाद्य पदार्थ बच्चों की रोजमर्रा की डाइट का हिस्सा बन जाते हैं।
महाराष्ट्र में स्कूलों और उनके आसपास जंक फूड की उपलब्धता को सीमित करने को लेकर कदम उठाए गए हैं। इसके पीछे उद्देश्य बच्चों के आसपास ऐसा फूड एनवायर्नमेंट तैयार करना है, जहां उन्हें आसानी से पौष्टिक और संतुलित भोजन मिल सके।

दरअसल, FSSAI के Food Safety and Standards (Safe food and balanced diets for children in school) Regulations, 2020 में स्कूलों में और स्कूल गेट से 50 मीटर के दायरे में HFSS खाद्य पदार्थों की बिक्री और उनके प्रचार को प्रतिबंधित करने का प्रावधान है।
ऐसे में सवाल यह है कि HFSS Food आखिर क्या है और बच्चों को इससे कितना बचाना चाहिए? साथ ही माता-पिता बच्चों में स्वस्थ खानपान की आदत कैसे विकसित कर सकते हैं?
HFSS Food क्या होता है?
HFSS का पूरा नाम High Fat, Sugar and Salt है। सामान्य तौर पर इस शब्द का इस्तेमाल ऐसे खाद्य पदार्थों के लिए किया जाता है जिनमें फैट, शुगर, नमक या इनमें से एक से अधिक पोषक घटक अधिक मात्रा में हो सकते हैं और जिनका बार-बार सेवन संतुलित आहार की जगह ले सकता है।
आम तौर पर जंक और अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड की कई चीजें इस चर्चा में आती हैं, जैसे—
- समोसा
- वड़ा पाव
- पिज्जा
- बर्गर
- फ्रेंच फ्राइज
- चिप्स
- पैकेज्ड नमकीन
- केक और पेस्ट्री
- चॉकलेट
- मीठे सॉफ्ट ड्रिंक्स
- अन्य शुगर-स्वीटेंड बेवरेज
हालांकि किसी खास उत्पाद को HFSS मानने के लिए उसकी वास्तविक पोषण संरचना और लागू नियमों को देखना जरूरी है।
स्कूलों के आसपास HFSS Food पर फोकस क्यों?
बच्चे स्कूल के आसपास आसानी से मिलने वाले स्नैक्स और ड्रिंक्स को जल्दी अपना लेते हैं। अगर स्कूल गेट के पास लगातार ऐसे विकल्प उपलब्ध हों, तो बच्चों के लिए स्वस्थ विकल्प चुनना मुश्किल हो सकता है।
FSSAI के नियमों का उद्देश्य स्कूलों में बच्चों को सुरक्षित और संतुलित भोजन उपलब्ध कराने के साथ ऐसे खाद्य पदार्थों की बिक्री और मार्केटिंग को सीमित करना है, जो बच्चों की डाइट के लिए उचित नहीं माने जाते।
इसका मतलब यह नहीं है कि केवल किसी एक खाद्य पदार्थ को हटाने से बच्चों की पूरी डाइट स्वस्थ हो जाएगी। घर का खाना, शारीरिक गतिविधि, नींद, पानी का सेवन और परिवार की खानपान संबंधी आदतें भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
50 मीटर की सीमा क्यों महत्वपूर्ण है?
FSSAI के स्कूल फूड नियमों में स्कूल गेट से 50 मीटर के क्षेत्र को भी ध्यान में रखा गया है। उद्देश्य यह है कि स्कूल परिसर के बाहर थोड़ी दूरी पर ऐसे खाद्य पदार्थों की उपलब्धता के जरिए नियमों को आसानी से दरकिनार न किया जाए।
FSSAI की आधिकारिक जानकारी के अनुसार स्कूल परिसर और गेट से 50 मीटर के दायरे में HFSS खाद्य पदार्थों की बिक्री तथा बच्चों के लिए ऐसे उत्पादों के विज्ञापन/प्रचार को लेकर प्रतिबंध का प्रावधान है।
पैकेट पर ‘हेल्दी’ लिखा हो तो क्या वह सच में हेल्दी है?
जरूरी नहीं।
कई पैकेज्ड फूड पर “बेक्ड”, “मल्टीग्रेन”, “लो फैट”, “हाई फाइबर” या “हेल्दी” जैसे शब्द लिखे होते हैं। लेकिन किसी उत्पाद को खरीदने से पहले उसके पैकेट पर दी गई Nutrition Information और ingredients list देखना ज्यादा उपयोगी है।
माता-पिता को खासतौर पर इन चीजों पर नजर रखनी चाहिए—
- Added sugar
- Sodium/Salt
- Saturated fat
- Trans fat
- कुल कैलोरी
- फाइबर
- प्रोटीन
सिर्फ पैकेट के सामने लिखे दावों के आधार पर किसी उत्पाद को रोज खाने योग्य मानना सही नहीं है।
ज्यादा HFSS Food खाने से बच्चों पर क्या असर पड़ सकता है?
अगर बच्चा बार-बार ज्यादा कैलोरी, नमक, चीनी और फैट वाले खाद्य पदार्थ खाता है, तो उसकी पूरी डाइट का संतुलन बिगड़ सकता है। ऐसे भोजन की वजह से फल, सब्जियां, दाल, साबुत अनाज और दूसरे पोषक खाद्य पदार्थों के लिए जगह कम हो सकती है।
बच्चों के लिए संतुलित भोजन इसलिए जरूरी है क्योंकि बढ़ती उम्र में शरीर और दिमाग के विकास के लिए पर्याप्त प्रोटीन, विटामिन, मिनरल्स, फाइबर और अन्य पोषक तत्वों की जरूरत होती है।
लंबे समय तक असंतुलित खानपान और कम शारीरिक गतिविधि वजन बढ़ने तथा आगे चलकर कई गैर-संचारी बीमारियों के जोखिम से जुड़ सकती है। इसलिए बचपन से ही खाने की आदतों पर ध्यान देना जरूरी है।
बच्चों को जंक फूड से दूर रखने के 8 आसान तरीके
1. घर में हेल्दी स्नैक्स उपलब्ध रखें
बच्चे भूख लगने पर वही चीज खाते हैं जो आसानी से मिलती है। इसलिए घर में फल, दही, मखाना, भुना चना, मूंगफली, घर का बना पोहा या दूसरे पौष्टिक विकल्प उपलब्ध रखें।
2. जंक फूड को पूरी तरह ‘बैन’ न करें
हर बच्चे को हर समय जंक फूड से दूर रखना व्यावहारिक नहीं है। इसके बजाय इसे कभी-कभार और सीमित मात्रा में रखने की आदत डालें।
जब किसी चीज पर पूरी तरह रोक लगाई जाती है, तो कई बच्चों में उसे लेकर ज्यादा आकर्षण भी पैदा हो सकता है।
3. माता-पिता खुद उदाहरण बनें
बच्चे अक्सर वही आदतें सीखते हैं जो वे घर में देखते हैं। अगर माता-पिता रोजाना सॉफ्ट ड्रिंक, चिप्स या फास्ट फूड खाते हैं, तो बच्चे को हेल्दी खाने के लिए समझाना मुश्किल हो सकता है।
इसलिए परिवार मिलकर स्वस्थ भोजन की आदत अपनाए।
4. बच्चों को भोजन चुनना सिखाएं
बच्चों को सिर्फ यह न कहें कि “यह मत खाओ।” उन्हें यह भी समझाएं कि किसी खाने में क्या है और शरीर को उसकी जरूरत क्यों है।
उन्हें फल, सब्जियां, दाल, दूध/दही, साबुत अनाज और प्रोटीन वाले खाद्य पदार्थों के फायदे सरल भाषा में बताएं।
5. पैकेट का लेबल पढ़ने की आदत डालें
बच्चे जब थोड़े बड़े हो जाएं तो उन्हें पैकेट पर Nutrition Information पढ़ना सिखाया जा सकता है।
उन्हें समझाएं कि ज्यादा चीनी, नमक या सैचुरेटेड फैट वाले उत्पादों को रोज खाने के बजाय सीमित रखना बेहतर है।
6. स्कूल के लिए घर से स्नैक दें
स्कूल जाते समय बच्चे को घर से हेल्दी स्नैक या टिफिन देने से स्कूल के बाहर मिलने वाले अनहेल्दी विकल्पों पर निर्भरता कम हो सकती है।
टिफिन में फल, सब्जियों से बना स्नैक, दही, पोहा, इडली, उपमा या घर का बना अन्य संतुलित विकल्प शामिल किया जा सकता है।
7. पानी को प्राथमिकता दें
मीठे पेय बच्चों को आकर्षित करते हैं, लेकिन रोजाना शुगर-स्वीटेंड ड्रिंक्स लेने की आदत से बचना बेहतर है। सामान्य परिस्थितियों में पानी को प्राथमिक पेय बनाना अच्छी आदत है।
8. खाने के साथ शारीरिक गतिविधि भी जरूरी
हेल्दी डाइट के साथ बच्चों का रोज सक्रिय रहना भी महत्वपूर्ण है। खेलना, पैदल चलना, साइकिल चलाना और उम्र के अनुसार शारीरिक गतिविधियां बच्चों की स्वस्थ जीवनशैली का हिस्सा होनी चाहिए।

क्या दुबले बच्चे भी HFSS Food से बचें?
हां। केवल शरीर का वजन देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि बच्चे का खानपान स्वस्थ है या नहीं।
कोई बच्चा दुबला दिखाई दे सकता है, लेकिन उसकी डाइट में जरूरी पोषक तत्वों की कमी हो सकती है। इसलिए लक्ष्य केवल वजन कम या ज्यादा करना नहीं, बल्कि संतुलित और पौष्टिक आहार देना होना चाहिए।
क्या बच्चों को जंक फूड पूरी तरह बंद कर देना चाहिए?
जरूरी नहीं। जंक या HFSS Food को रोजाना की डाइट का हिस्सा बनाने से बचना ज्यादा महत्वपूर्ण है। कभी-कभार सीमित मात्रा में पसंद का भोजन दिया जा सकता है, लेकिन उसकी जगह रोजाना फल, सब्जियां, दालें, साबुत अनाज और घर के बने स्नैक्स को प्राथमिकता देना बेहतर है।
पॉकेट मनी से बढ़ सकती है जंक फूड की आदत?
अगर बच्चा रोजाना मिलने वाली पॉकेट मनी से स्कूल के बाहर चिप्स, नमकीन, मीठे पेय या फास्ट फूड खरीदता है, तो यह उसकी नियमित आदत बन सकती है।
इसलिए बच्चों को पॉकेट मनी देने के साथ सही फूड चॉइस और पैसे के समझदारी से इस्तेमाल के बारे में भी समझाना चाहिए।
निष्कर्ष
HFSS Food को लेकर स्कूल स्तर पर नियम बनाना बच्चों के आसपास बेहतर फूड एनवायर्नमेंट बनाने की दिशा में एक कदम है। FSSAI के स्कूल फूड नियम भी स्कूलों में सुरक्षित और संतुलित आहार को बढ़ावा देने पर जोर देते हैं।
लेकिन बच्चों की खाने की आदत सिर्फ स्कूल से तय नहीं होती। घर का माहौल, माता-पिता की आदतें, टिफिन, पॉकेट मनी, शारीरिक गतिविधि और बच्चों को दी जाने वाली फूड एजुकेशन भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
इसलिए जंक फूड पर केवल रोक लगाने के बजाय बच्चों को स्वस्थ विकल्प चुनना सिखाना ज्यादा प्रभावी दीर्घकालिक रणनीति हो सकती है।

