Jaipur | Family Court Orders : हाई-प्रोफाइल पति पत्नी को हर महीने 2 लाख भरण-पोषण देगा

Jaipur | Family Court Orders : जयपुर फैमिली कोर्ट ने हाई-प्रोफाइल लाइफ जीने वाले पति को पत्नी को हर माह 2 लाख रुपये भरण-पोषण देने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि पत्नी को पति के समान जीवन स्तर मिलना चाहिए। आदेश में देरी पर 6% ब्याज देने के निर्देश भी शामिल हैं।
Jaipur | Family Court Orders : जयपुर फैमिली कोर्ट का बड़ा फैसला
जयपुर की फैमिली कोर्ट ने एक अहम मामले में पति को पत्नी को हर महीने 2 लाख रुपए भरण-पोषण भत्ता देने का आदेश दिया है।
यह आदेश फैमिली कोर्ट जयपुर मेट्रो-प्रथम के जज पवन कुमार गर्ग द्वारा दिया गया।

पति की आय 22 लाख प्रति माह मानी गई
कोर्ट ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पति की मासिक आय करीब 22 लाख रुपए मानी।
इसके आधार पर पत्नी को हर महीने 2 लाख रुपए भरण-पोषण भत्ता देने का निर्देश दिया गया।
साथ ही आदेश में यह भी कहा गया कि यह राशि हर महीने की 10 तारीख तक पत्नी को देनी होगी।
देरी होने पर देना होगा ब्याज
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि पति समय पर भुगतान नहीं करता है या देरी करता है, तो उसे 6 प्रतिशत ब्याज के साथ राशि देनी होगी।
यह आदेश पत्नी द्वारा दायर अंतरिम भरण-पोषण याचिका पर दिया गया है।
पति हाई-प्रोफाइल लाइफ जीता है: कोर्ट
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि रिकॉर्ड में यह साबित होता है कि पति हाई-प्रोफाइल जीवनशैली जीता है।
- उसके पास पर्सनल सेक्रेटरी है
- वह विदेश यात्राएं करता है
- उसका लाइफस्टाइल काफी महंगा है
ऐसे में पत्नी को भी उसी स्तर का जीवन जीने का अधिकार है।
पत्नी को समान जीवन स्तर का अधिकार
कोर्ट ने कहा कि यदि पत्नी शिक्षित है या पहले नौकरी कर चुकी है, लेकिन वर्तमान में उसकी आय का कोई स्रोत नहीं है, तब भी वह पति से भरण-पोषण लेने की हकदार है।
यह निर्णय महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करने वाला माना जा रहा है।
सोशल मीडिया विवाद से शुरू हुआ मामला
मामले की शुरुआत एक पारिवारिक विवाद से हुई।
पत्नी ने अपनी याचिका में बताया कि उसकी शादी फरवरी 2022 में एक ज्वैलरी कारोबारी से हुई थी।
शादी के बाद पति का व्यवहार ठीक नहीं रहा।
- पत्नी ने सोशल मीडिया पर मैरिड स्टेटस लगाया
- इस पर पति नाराज हो गया
- उसने कहा कि वह अपने बिजनेस में यह बात जाहिर नहीं करना चाहता
घर से निकाला, गर्भपात का आरोप
पत्नी ने यह भी आरोप लगाया कि पति ने उसे घर से निकाल दिया, जिसके कारण उसका गर्भपात हो गया।
वहीं पति ने कोर्ट में जवाब देते हुए कहा कि पत्नी उच्च शिक्षित है और पहले एक निजी यूनिवर्सिटी में नौकरी कर चुकी है।
कोर्ट ने माना क्रूरता का मामला
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने माना कि:
- पति ने पत्नी के साथ मानसिक और शारीरिक क्रूरता की
- इसी कारण वैवाहिक विवाद उत्पन्न हुआ
कोर्ट ने यह भी कहा कि पति अपने कानूनी दायित्व से बच नहीं सकता।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला
विशेषज्ञों के अनुसार यह फैसला रजनेश कुमार बनाम नेहा मामला के सिद्धांतों के अनुरूप है।
इस केस में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि:
- पत्नी को पति के समान जीवन स्तर मिलना चाहिए
- अलग रहने की स्थिति में भी भरण-पोषण का अधिकार बना रहता है
विशेषज्ञों की राय
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करता है।
इससे यह स्पष्ट होता है कि आर्थिक रूप से मजबूत पति अपनी जिम्मेदारियों से बच नहीं सकता।
निष्कर्ष
जयपुर फैमिली कोर्ट का यह फैसला समाज में एक महत्वपूर्ण संदेश देता है कि विवाह के बाद पत्नी को सम्मानजनक जीवन जीने का अधिकार है।
चाहे वह अलग रह रही हो या आर्थिक रूप से निर्भर हो, उसे पति के समान जीवन स्तर मिलना चाहिए।

