NEET पेपर लीक केस में CBI ने कोचिंग डायरेक्टर को किया गिरफ्तार
देशभर में चर्चा का विषय बने NEET-UG पेपर लीक मामला में जांच एजेंसी सीबीआई को एक और बड़ी सफलता मिली है। सोमवार को इस मामले में 10वीं गिरफ्तारी की गई। सीबीआई ने महाराष्ट्र के लातूर से केमिस्ट्री कोचिंग संचालक शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी के अनुसार मोटेगांवकर संगठित पेपर लीक गिरोह का अहम सदस्य है और वह परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र व आंसर की हासिल कर उसे आगे फैलाने में शामिल था।

सीबीआई अधिकारियों के मुताबिक रविवार को लातूर में की गई तलाशी के दौरान मोटेगांवकर के मोबाइल फोन से NEET UG का कथित लीक पेपर बरामद हुआ। जांच में सामने आया है कि आरोपी ने अन्य साथियों के साथ मिलकर 23 अप्रैल को ही प्रश्नपत्र और उत्तर कुंजी हासिल कर ली थी। इसके बाद यह सामग्री कई लोगों तक पहुंचाई गई। सीबीआई का दावा है कि यह पूरा नेटवर्क संगठित तरीके से काम कर रहा था और मेडिकल प्रवेश परीक्षा को प्रभावित करने की साजिश रची गई थी।
जानकारी के अनुसार सीबीआई ने 15 मई को भी मोटेगांवकर से उसके घर पर करीब आठ घंटे तक पूछताछ की थी। जांच एजेंसी को उसके जवाबों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में कई संदिग्ध जानकारियां मिली थीं। इसके बाद जांच को आगे बढ़ाते हुए रविवार को रेणुकाई केमिस्ट्री क्लासेस के मुख्य कार्यालय पर छापा मारा गया। इस दौरान कई दस्तावेज, कंप्यूटर, मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए गए हैं।
शिवराज मोटेगांवकर का महाराष्ट्र के लातूर समेत सात जिलों में रेणुकाई केमिस्ट्री क्लासेस नाम से बड़ा कोचिंग नेटवर्क संचालित होता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस कोचिंग सेंटर का सालाना टर्नओवर करीब 100 करोड़ रुपए बताया जा रहा है। सीबीआई को शक है कि कोचिंग संस्थान के माध्यम से कई NEET अभ्यर्थियों को लीक प्रश्नपत्र के सवाल उपलब्ध कराए गए थे। जांच एजेंसी यह भी पता लगाने में जुटी है कि किन छात्रों और अभिभावकों तक यह पेपर पहुंचाया गया।
सूत्रों के अनुसार सीबीआई को यह भी जानकारी मिली है कि लातूर के कुछ डॉक्टरों ने कथित तौर पर लीक पेपर खरीदा था। हालांकि इस संबंध में अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन एजेंसी पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
NEET-UG देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में से एक है। हर साल लाखों छात्र डॉक्टर बनने के सपने के साथ इस परीक्षा में शामिल होते हैं। ऐसे में पेपर लीक की खबर सामने आने के बाद छात्रों और अभिभावकों में भारी नाराजगी देखने को मिली थी। परीक्षा की पारदर्शिता और सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठे थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार ने जांच सीबीआई को सौंप दी थी।
अब तक इस मामले में कुल 10 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जिनमें से 6 आरोपी महाराष्ट्र से हैं। सीबीआई लगातार विभिन्न राज्यों में छापेमारी और पूछताछ कर रही है। जांच एजेंसी इलेक्ट्रॉनिक डेटा, कॉल रिकॉर्ड और वित्तीय लेनदेन की भी जांच कर रही है ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके।
इस मामले ने देशभर में कोचिंग संस्थानों की भूमिका पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। कई शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए सख्त निगरानी और कड़े कानूनों की जरूरत है। फिलहाल सीबीआई की जांच जारी है और आने वाले दिनों में इस केस में कई बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

