बिलासपुर रेल हादसे में लापरवाही उजागर: साइको टेस्ट में फेल पायलट को सौंपी ट्रेन की जिम्मेदारी, 15 नवंबर तक CRS रिपोर्ट
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर रेल हादसे में बड़ी लापरवाही सामने आई है। साइको टेस्ट में फेल लोको पायलट को जोन अफसरों ने पैसेंजर ट्रेन चलाने की अनुमति दी। CRS बी.के. मिश्रा ने 29 अधिकारियों से पूछताछ की, 15 नवंबर तक रिपोर्ट रेल मंत्रालय को सौंपी जाएगी। रेलवे सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल।
बिलासपुर रेल हादसे की जांच में चौंकाने वाले तथ्य
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छत्तीसगढ़ के बिलासपुर रेल हादसे में कमिशन ऑफ रेलवे सेफ्टी (CRS) की जांच पूरी हो चुकी है। तीन दिन चली इस जांच में 29 से अधिक अधिकारियों और कर्मचारियों से पूछताछ की गई। जांच में यह खुलासा हुआ कि हादसे वाली ट्रेन के लोको पायलट को साइकोलॉजिकल टेस्ट में फेल होने के बावजूद पैसेंजर ट्रेन चलाने की अनुमति दी गई थी।
सूत्रों के अनुसार, जोन स्तर के अधिकारियों ने रेलवे नियमों को दरकिनार कर लोको पायलट को जिम्मेदारी सौंपी थी। अब सवाल उठ रहे हैं कि आखिर नियमों की अनदेखी क्यों की गई और किसके दबाव में यह निर्णय लिया गया।
CRS बी.के. मिश्रा ने पूरी की जांच, रिपोर्ट 15 नवंबर तक
सीआरएस बी.के. मिश्रा ने 6 नवंबर से अपनी जांच शुरू की थी। उन्होंने घटनास्थल, सिग्नलिंग सिस्टम, डेटा लॉगर और कंट्रोल रूम की बारीकी से जांच की।
शनिवार, 8 नवंबर की शाम को वे जांच पूरी कर कोलकाता रवाना हो गए। मिश्रा अब 10 दिनों के भीतर, यानी 15 नवंबर तक अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट रेलवे मंत्रालय को सौंपेंगे।
साइको टेस्ट में फेल पायलट कैसे चला रहा था ट्रेन
रेलवे की प्रारंभिक जांच में सामने आया कि लोको पायलट विद्यासागर पहले मालगाड़ी चला रहे थे, लेकिन हाल ही में उन्हें पैसेंजर ट्रेन चलाने की पदोन्नति दी गई थी।
प्रमोशन के दौरान वे साइकोलॉजिकल टेस्ट में फेल हो गए थे, फिर भी उन्हें ट्रेन संचालन की अनुमति दी गई।
अधिकारियों के अनुसार, हादसे के समय विद्यासागर ने संभवतः दूसरी लाइन के सिग्नल को देखकर ट्रेन की स्पीड बढ़ा दी, और जब सामने मालगाड़ी दिखी, तब तक स्पीड कम करने में देर हो चुकी थी।
हादसे वाली जगह पर ट्रैक में तीखा मोड़ (कर्व) होने से स्थिति और जटिल हो गई।
सिग्नल रूम और रिकॉर्ड्स की बारीकी से जांच
CRS जांच टीम ने सिग्नल ऑपरेटिंग कंट्रोल रूम का पूरा डेटा खंगाला।
उन्होंने डेटा लॉगर, ट्रेन मूवमेंट रिकॉर्ड, सिग्नल इंटरलॉकिंग सिस्टम और लोको पायलटों की ड्यूटी शीट्स जब्त कीं।
साथ ही, हादसे के दौरान ड्यूटी पर मौजूद सभी कर्मचारियों से पूछताछ कर उनके बयान दर्ज किए।
जांच के दौरान पता चला कि जोन अफसर की मंजूरी के बिना यह पदोन्नति नहीं दी जा सकती थी। इसलिए जोनल स्तर पर जिम्मेदारी तय करने के संकेत मिले हैं।
29 से अधिक अधिकारियों से पूछताछ, एक कर्मचारी बयान देने में असमर्थ
सीआरएस मिश्रा ने 29 से ज्यादा अफसरों और कर्मचारियों से पूछताछ की।
हालांकि असिस्टेंट लोको पायलट रश्मि राज का बयान नहीं लिया जा सका, क्योंकि वे हादसे में गंभीर रूप से घायल हैं और अपोलो अस्पताल में भर्ती हैं।
उनकी हालत फिलहाल बयान देने लायक नहीं बताई जा रही है।
लोको रनिंग स्टाफ एसोसिएशन (एलारसा) की हस्तक्षेप
8 नवंबर को ऑल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ एसोसिएशन (एलारसा) के पदाधिकारियों ने CRS बी.के. मिश्रा से मुलाकात की।
उन्होंने लोको पायलटों की काम के दबाव, मानसिक थकान और सुरक्षा उपायों से जुड़ी समस्याओं को लेकर लिखित दस्तावेज प्रस्तुत किए।
एसोसिएशन का कहना है कि ट्रेन संचालन के दौरान पर्याप्त आराम और सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन अनिवार्य होना चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।
जांच रिपोर्ट में इन बिंदुओं पर रहेगा फोकस
CRS की रिपोर्ट में निम्न बिंदुओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा —
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लोको पायलट को साइको टेस्ट फेल होने के बाद भी ट्रेन संचालन की अनुमति कैसे मिली।
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किस अधिकारी ने प्रमोशन और ट्रेन संचालन के आदेश जारी किए।
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हादसे के वक्त सिग्नलिंग सिस्टम ने सही काम किया या नहीं।
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क्या रेलवे जोन स्तर पर लापरवाही या दबाव की भूमिका रही।
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भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए क्या सुधार आवश्यक हैं।
रेल मंत्रालय को सौंपी जाएगी रिपोर्ट
बी.के. मिश्रा अब 10 दिन में रेल मंत्रालय को रिपोर्ट सौंपेंगे, जिसकी एक प्रति रेलवे बोर्ड और जोनल मुख्यालय को भी भेजी जाएगी।
इस रिपोर्ट के आधार पर जिम्मेदार अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की संभावना है।
रेलवे सूत्रों के अनुसार, यदि जोन-अफसर की गलती साबित होती है, तो सस्पेंशन या बर्खास्तगी तक की कार्रवाई हो सकती है।
समापन: सुधारों की राह पर रेलवे
बिलासपुर हादसे ने एक बार फिर रेलवे की सुरक्षा प्रणाली और मानव संसाधन प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
रेलवे बोर्ड अब यह सुनिश्चित करने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है कि साइको टेस्ट फेल या अस्थिर मानसिक स्थिति वाले लोको पायलटों को किसी भी हाल में पैसेंजर ट्रेन की जिम्मेदारी न सौंपी जाए।
रेल यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए मंत्रालय ने कहा है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद बड़े बदलाव किए जाएंगे।
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