Jaipur News : बसंत पंचमी पर गोविंददेवजी मंदिर में पाटोत्सव, पीली पोशाक, भोग और महाआरती के दर्शन
Jaipur News : जयपुर के आराध्य श्री गोविंददेवजी मंदिर में बसंत पंचमी पर पाटोत्सव मनाया जा रहा है। ठाकुरजी को पीली पोशाक पहनाई गई, पंचामृत अभिषेक, मावा पेड़े का भोग और महाआरती हुई। बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे।
Jaipur News : बसंत पंचमी पर गोविंददेवजी मंदिर में पाटोत्सव का भव्य आयोजन
जयपुर के आराध्य श्री गोविंददेवजी महाराज के मंदिर में शुक्रवार को बसंत पंचमी के पावन अवसर पर पाटोत्सव बड़े श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। सुबह से ही मंदिर परिसर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है। कीर्तन, मंगल गीत और बधाई गान के साथ पूरे मंदिर परिसर में उत्सव का माहौल बना हुआ है।
बसंत पंचमी को ठाकुर श्री गोविंददेवजी महाराज के पुनः प्राकट्य की तिथि माना जाता है, इसी कारण इस दिन पाटोत्सव की विशेष परंपरा निभाई जाती है। श्रद्धालु सुबह तड़के से ही मंदिर पहुंचकर विशेष झांकियों और आरतियों के दर्शन कर रहे हैं।

Jaipur News : ठाकुर श्रीजी का विशेष अभिषेक और भव्य श्रृंगार
बसंत पंचमी के अवसर पर ठाकुर श्रीजी का प्राकट्य उत्सव विधिविधान के साथ मनाया गया। प्रातः ब्रह्ममुहूर्त में विशेष अभिषेक किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पंचामृत से ठाकुर श्रीजी का अभिषेक संपन्न हुआ, जिसमें दूध, दही, घी, शहद और शक्कर का प्रयोग किया गया।
अभिषेक के पश्चात ठाकुर श्रीजी को बसंत पंचमी की परंपरा अनुसार विशेष पीली पोशाक पहनाई गई। पीला रंग बसंत ऋतु, ज्ञान और उल्लास का प्रतीक माना जाता है। इसके साथ ही सुंदर अलंकारों से ठाकुरजी का भव्य श्रृंगार किया गया, जिसने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।
Jaipur News : बसंत पंचमी को क्यों मनाया जाता है पाटोत्सव

भक्तिरत्नाकर ग्रंथ के अनुसार माघ सुदी पंचमी, संवत 1582 (1525 ईस्वी) को श्रीधाम वृंदावन के गोमाटीला योगपीठ से ठाकुर श्री गोविंददेवजी महाराज का पुनः प्राकट्य हुआ था। यह प्राकट्य श्री कृष्ण चैतन्य महाप्रभु के प्रथम शिष्य और षड् गोस्वामियों में प्रमुख श्रील रूप गोस्वामी के माध्यम से हुआ।
इसी ऐतिहासिक और धार्मिक घटना की स्मृति में हर वर्ष बसंत पंचमी के दिन गोविंददेवजी मंदिर में पाटोत्सव मनाने की परंपरा चली आ रही है, जिसे वैष्णव परंपरा में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
Jaipur News : ब्रह्ममुहूर्त में मंगला आरती से हुई दिन की शुरुआत
बसंत पंचमी की सुबह मंदिर में विशेष धार्मिक कार्यक्रमों की शुरुआत ब्रह्ममुहूर्त में हुई। सुबह 4 बजे मंगला आरती संपन्न हुई, जिसके दर्शन 4 से 4:15 बजे तक कराए गए। इसके बाद सुबह 5 से 5:15 बजे तक पाटोत्सव अभिषेक के दर्शन भक्तों के लिए खोले गए।
इस दौरान मंदिर के कीर्तनियों और परिकर जनों ने मंगल गीतों का गायन किया, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।
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मावा पेड़े का भोग और महाआरती
अभिषेक और श्रृंगार के बाद ठाकुर श्रीजी को मावा पेड़े का विशेष भोग अर्पित किया गया। इसके पश्चात महाआरती हुई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
भक्तों का मानना है कि बसंत पंचमी पर ठाकुर श्रीजी को मावा पेड़े का भोग अर्पित करने से सुख-समृद्धि और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।
धूप झांकी और बेसन के लड्डू का भोग
सुबह 8:30 से 9:45 बजे तक धूप झांकी के दर्शन हुए। इस दौरान पहले अधिवास पूजन किया गया और फिर धूप आरती संपन्न हुई। धूप झांकी में ठाकुर श्रीजी को बेसन के लड्डू का भोग अर्पित किया गया।
पीली पोशाक में सजे ठाकुर श्रीजी के दर्शन कर श्रद्धालु भाव-विभोर नजर आए।
राजभोग झांकी में गुलाल और पुष्प माला अर्पित
श्रृंगार झांकी के दर्शन सुबह 10:15 से 10:45 बजे तक कराए गए। इसके बाद सुबह 11:15 बजे राजभोग झांकी के दर्शन खोले गए।
बसंतोत्सव की परंपरा के अनुसार ठाकुर श्रीजी को पांच प्रकार का गुलाल, इत्र और पुष्प माला अर्पित की गई। इस दौरान चंवर सेवा की गई और फिर राजभोग आरती संपन्न हुई। राजभोग झांकी के दर्शन 11:45 बजे तक खुले रहे।
श्रद्धालुओं में दिखा खास उत्साह
बसंत पंचमी और पाटोत्सव के अवसर पर गोविंददेवजी मंदिर में श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा है। दूर-दराज से आए भक्तों ने ठाकुर श्रीजी के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया। मंदिर प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं।
धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
गोविंददेवजी मंदिर का पाटोत्सव न केवल धार्मिक बल्कि सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। यह उत्सव जयपुर की धार्मिक परंपराओं और वैष्णव संस्कृति को जीवंत रूप में प्रस्तुत करता है।

