सोबती बिल्डर GST फर्जीवाड़ा मामले में जांच तेज
सोबती बिल्डर GST फर्जीवाड़ा मामले में बरेली में जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। निर्माण कारोबार से जुड़े सोबती ग्रुप की कुछ फर्मों का नाम कथित फर्जी बिलिंग और जीएसटी से जुड़े लेनदेन की जांच में सामने आया है। जांच टीम अब इन फर्मों के दस्तावेज, जीएसटी रिकॉर्ड और वित्तीय लेनदेन की पड़ताल कर रही है।
यह मामला उस नेटवर्क की जांच से जुड़ा है, जिस पर फर्जी और बोगस फर्मों के जरिए जीएसटी चोरी तथा इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के कथित दुरुपयोग का आरोप है। मामले में गिरफ्तार फरजान हाशमी से पूछताछ के बाद जांच एजेंसियों को कई अहम जानकारियां मिलने की बात सामने आई है।
हालांकि, किसी फर्म या व्यक्ति की वास्तविक भूमिका जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। फिलहाल सामने आए नामों और दस्तावेजों का तकनीकी साक्ष्यों से मिलान किया जा रहा है।

Table of Contents
- फर्जी फर्मों के नेटवर्क की जांच
- SSP के निर्देश पर गठित हुई SIT
- फरजान हाशमी से पूछताछ में क्या सामने आया?
- सोबती ग्रुप की फर्मों का नाम जांच में क्यों आया?
- दूसरी प्रतिष्ठित फर्में भी जांच के घेरे में
- सोबती से जुड़ी अन्य फर्मों की भी पड़ताल
- करोड़ों की GST धोखाधड़ी की आशंका
- फर्मों के मालिकों और लेनदेन की जांच
- आगे क्या हो सकता है?
फर्जी फर्मों के नेटवर्क की जांच
जांच एजेंसियों के अनुसार, पूरे मामले में फर्जी या बोगस फर्मों के जरिए कथित तौर पर जीएसटी से जुड़ी अनियमितताओं को अंजाम दिए जाने की आशंका है। जांच का एक प्रमुख हिस्सा यह पता लगाना है कि किन फर्मों के बीच बिलिंग हुई और उन बिलों के आधार पर किस तरह के टैक्स क्रेडिट का इस्तेमाल किया गया।
GST व्यवस्था में पात्र कारोबारी इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ ले सकते हैं। GST पोर्टल पर पंजीकृत करदाताओं की कई कारोबारी जानकारियां भी सत्यापित की जा सकती हैं।
इस मामले में SIT कथित फर्जी बिलों, फर्मों के पंजीकरण, बैंकिंग गतिविधियों और आपसी लेनदेन को जोड़कर पूरे नेटवर्क की तस्वीर तैयार करने में जुटी है।
SSP के निर्देश पर गठित हुई SIT
मामले की गंभीरता को देखते हुए SSP अनुराग आर्य के निर्देश पर SP क्राइम मनीष कुमार सोनकर के नेतृत्व में SIT गठित की गई है।
SIT ने किला थाने में दर्ज मामले की जांच के दौरान पहले सद्दाम और समद को गिरफ्तार किया था। इसके बाद बड़ा बाजार निवासी फरजान हाशमी को भी गिरफ्तार किया गया।
जांच के मुताबिक, फरजान पर नेपाल में संदीप नाम से रहकर कथित तौर पर नेटवर्क संचालित करने का आरोप है। SIT अब उसकी गतिविधियों और नेटवर्क से जुड़े लोगों की भूमिका की जानकारी को अन्य तकनीकी साक्ष्यों के साथ मिलाने में जुटी है।
फरजान हाशमी से पूछताछ में क्या सामने आया?
फरजान हाशमी से पूछताछ को जांच में महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है। SIT को पूछताछ के दौरान फर्जी GST नेटवर्क से जुड़े लोगों और फर्मों के बारे में जानकारी मिलने की बात सामने आई है।
जांच टीम इन बयानों को केवल आधार बनाकर कार्रवाई करने के बजाय उपलब्ध तकनीकी और दस्तावेजी साक्ष्यों से उनका सत्यापन कर रही है।
SIT की जांच में अगर किसी व्यक्ति या फर्म की भूमिका प्रमाणित होती है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
सोबती ग्रुप की फर्मों का नाम जांच में क्यों आया?
सोबती बिल्डर GST फर्जीवाड़ा जांच में सोबती इंफ्रा और सोबती इन्फ्राटेक नाम की फर्मों का उल्लेख सामने आने की बात कही गई है।
अब SIT यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इन फर्मों का वास्तविक स्वामित्व और संचालन किन लोगों के हाथ में है। इसके साथ ही कथित फर्जी बिलिंग और GST से जुड़े लेनदेन में इनकी भूमिका की भी जांच की जा रही है।
जांच टीम फर्मों के GST पंजीकरण, दस्तावेज, बिलिंग रिकॉर्ड और संबंधित वित्तीय लेनदेन की जानकारी जुटा रही है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि किसी फर्म का जांच में नाम सामने आना अपने आप में अपराध साबित नहीं करता। संबंधित फर्म या व्यक्ति की भूमिका जांच के निष्कर्षों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही तय होगी।
दूसरी प्रतिष्ठित फर्में भी जांच के घेरे में
जांच का दायरा केवल सोबती ग्रुप तक सीमित नहीं बताया जा रहा है। शहर की कई अन्य फर्मों के नाम भी जांच में सामने आने की बात कही गई है।
इनमें एफएक्स ट्रेडर्स, सिद्धि विनायक इंटरप्राइजेज, मां इंटरप्राइजेज, नाइट स्टार, आर्ट लाइफ हुडा, आर्ट लाइफ एसोसिएट और अरहम एग्रो फूड्स सहित अन्य नाम शामिल बताए गए हैं।
SIT अब इन फर्मों के दस्तावेजों और लेनदेन की जांच कर रही है। खासतौर पर यह देखा जा रहा है कि कथित फर्जी बिल कहां से जारी हुए, उनका इस्तेमाल किस कारोबारी लेनदेन में किया गया और उनसे किसी प्रकार का ITC लाभ लिया गया या नहीं।
सोबती से जुड़ी अन्य फर्मों की भी पड़ताल
जांच में कुछ अन्य फर्मों के नाम भी सामने आने की बात कही गई है। इनमें सिंडिकेट एनडी रेलवे, सोबती इंफ्रा, सोबती इन्फ्राटेक, पावर एंड कंस्ट्रक्शन, यशी इंटरप्राइजेज, पेटा स्टार, मिनी गुप्ता और श्रीनाथ जी इंटरप्राइजेज शामिल हैं।
SIT इन फर्मों से संबंधित दस्तावेजों और कथित व्यापारिक बिलों की जांच कर रही है।
जांच एजेंसी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि अलग-अलग फर्मों के बीच वास्तव में माल या सेवाओं की आपूर्ति हुई थी या केवल दस्तावेजी लेनदेन के जरिए बिल जारी किए गए।
करोड़ों की GST धोखाधड़ी की आशंका
जांच एजेंसियों को आशंका है कि पूरा मामला बड़े स्तर पर GST से जुड़ी वित्तीय अनियमितताओं से संबंधित हो सकता है। हालांकि, घोटाले की वास्तविक रकम और प्रत्येक फर्म या व्यक्ति की भूमिका जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
SIT तकनीकी साक्ष्यों, फर्मों के रिकॉर्ड, बिलों और आरोपियों से मिली जानकारी का मिलान कर रही है।
GST व्यवस्था में ITC से संबंधित लेनदेन और रिटर्न रिकॉर्ड महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। GST पोर्टल के आधिकारिक दस्तावेजों के मुताबिक, GSTR-9 में खरीद, बिक्री और ITC समेत कई जानकारियां दर्ज होती हैं।
GST से संबंधित आधिकारिक जानकारी के लिए: GST पोर्टल
फर्मों के मालिकों और लेनदेन की जांच
अब SIT का एक बड़ा फोकस यह पता लगाने पर है कि सोबती नाम से संचालित या उससे जुड़ी बताई जा रही फर्मों के वास्तविक मालिक और अधिकृत संचालक कौन हैं।
इसके लिए फर्मों के GST पंजीकरण, कारोबार का पता, रिटर्न, बिलिंग रिकॉर्ड और उपलब्ध वित्तीय दस्तावेजों की जांच की जा रही है।
GST पोर्टल की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, GSTIN/UIN के जरिए किसी पंजीकृत करदाता की कुछ बुनियादी जानकारी देखी जा सकती है, जिसमें कानूनी नाम, ट्रेड नाम, कारोबार का स्वरूप, पंजीकरण की तारीख और कारोबार के प्रमुख स्थान जैसी जानकारी शामिल है।
इसी तरह की जानकारी और अन्य दस्तावेजों को आपस में मिलाकर SIT कथित नेटवर्क में शामिल लोगों की भूमिका तय करने की कोशिश कर रही है।
आगे क्या हो सकता है?
SIT की जांच अभी जारी है। जांच टीम फरजान हाशमी से मिली जानकारी को दस्तावेजों और तकनीकी साक्ष्यों से सत्यापित कर रही है।
अगर जांच में किसी फर्म या व्यक्ति की कथित GST धोखाधड़ी में भूमिका के पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं, तो आगे गिरफ्तारी या अन्य कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
फिलहाल सोबती बिल्डर GST फर्जीवाड़ा मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि सामने आई फर्मों का वास्तविक नियंत्रण किसके पास था और कथित फर्जी बिलिंग से किसे आर्थिक लाभ मिला।
जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इस नेटवर्क का वास्तविक आकार कितना बड़ा है और इसमें कितने लोग या फर्म शामिल हैं।
निष्कर्ष
बरेली में कथित फर्जी GST बिलिंग नेटवर्क की जांच अब बड़े कारोबारी नामों और फर्मों तक पहुंचती दिखाई दे रही है। फरजान हाशमी से पूछताछ के बाद SIT को मिली जानकारी के आधार पर जांच का दायरा बढ़ाया जा रहा है।
सोबती ग्रुप से जुड़ी बताई जा रही फर्मों के नाम सामने आने के बाद उनके GST रिकॉर्ड, दस्तावेज और लेनदेन की जांच की जा रही है। हालांकि, अंतिम जिम्मेदारी और किसी भी आरोप की पुष्टि जांच पूरी होने तथा सक्षम एजेंसी की कार्रवाई के बाद ही मानी जाएगी।
नोट: इस रिपोर्ट में जिन व्यक्तियों और फर्मों के नाम जांच के संदर्भ में आए हैं, उनके संबंध में अंतिम निष्कर्ष जांच एजेंसी की रिपोर्ट और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही तय होगा।
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