सलमान खान की ‘मातृभूमि’ पर सेंसर बोर्ड की रोक, CBFC ने क्लियरेंस सर्टिफिकेट अगले आदेश तक रोका
बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘मातृभूमि’ एक बार फिर चर्चा में आ गई है। इस बार वजह फिल्म की रिलीज नहीं, बल्कि सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) का बड़ा फैसला है। सेंसर बोर्ड ने फिल्म को क्लियरेंस सर्टिफिकेट जारी करने की प्रक्रिया फिलहाल रोक दी है। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि अगले आदेश तक फिल्म को प्रमाणपत्र नहीं दिया जाएगा। इस फैसले के बाद फिल्म की अगस्त में प्रस्तावित रिलीज पर भी अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं।

यह फिल्म भारत और चीन के बीच वर्ष 2020 में गलवान घाटी में हुई सैन्य झड़प की पृष्ठभूमि पर आधारित बताई जा रही है। गलवान संघर्ष भारतीय सेना के इतिहास की महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक माना जाता है, जिसमें भारतीय सैनिकों ने कठिन परिस्थितियों में अदम्य साहस का परिचय दिया था। इसी संवेदनशील विषय को बड़े पर्दे पर दिखाने की तैयारी की गई थी।
फिल्म का नाम पहले ‘बैटल ऑफ गलवान’ रखा गया था। बाद में निर्माताओं ने इसका नाम बदलकर ‘मातृभूमि’ कर दिया। माना जा रहा है कि नाम बदलने का उद्देश्य फिल्म को व्यापक भावनात्मक और देशभक्ति के दृष्टिकोण से प्रस्तुत करना था। हालांकि, नाम बदलने के बावजूद फिल्म अब सेंसर बोर्ड की प्रक्रिया में अटक गई है।
सूत्रों के अनुसार, फिल्म को पहले 17 अप्रैल को ईद के अवसर पर रिलीज करने की योजना थी। सलमान खान की फिल्मों की ईद रिलीज लंबे समय से दर्शकों के बीच खास आकर्षण रही है। लेकिन विभिन्न कारणों से फिल्म की रिलीज आगे बढ़ा दी गई और बाद में इसे अगस्त में सिनेमाघरों में लाने का फैसला किया गया। अब CBFC द्वारा क्लियरेंस सर्टिफिकेट रोके जाने के बाद अगस्त में रिलीज होना भी मुश्किल माना जा रहा है।
हालांकि सेंसर बोर्ड की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि प्रमाणपत्र रोके जाने के पीछे कौन-कौन से विशिष्ट कारण हैं। फिल्म के कुछ हिस्सों, विषयवस्तु या अन्य तकनीकी पहलुओं की समीक्षा की जा रही है या नहीं, इस संबंध में भी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। फिल्म निर्माता भी फिलहाल इस मामले पर विस्तृत टिप्पणी करने से बच रहे हैं।
फिल्म उद्योग के जानकारों का मानना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा, सैन्य अभियान और अंतरराष्ट्रीय संबंधों से जुड़े विषयों पर बनी फिल्मों की समीक्षा सामान्य फिल्मों की तुलना में अधिक सावधानी से की जाती है। ऐसे मामलों में यह सुनिश्चित किया जाता है कि फिल्म में दिखाई गई घटनाएं किसी भी तरह से राष्ट्रीय हितों या संवेदनशील तथ्यों को प्रभावित न करें। यही कारण है कि कई बार ऐसी फिल्मों की सेंसर प्रक्रिया अपेक्षाकृत अधिक समय लेती है।
सलमान खान की इस फिल्म को लेकर दर्शकों में पहले से ही काफी उत्साह था। फिल्म के पोस्टर और शुरुआती जानकारी सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर व्यापक चर्चा हुई थी। देशभक्ति और सैन्य पृष्ठभूमि वाली फिल्मों को भारतीय दर्शक हमेशा पसंद करते रहे हैं, इसलिए इस फिल्म से भी काफी उम्मीदें लगाई जा रही थीं।
यदि फिल्म को जल्द क्लियरेंस नहीं मिलता है, तो निर्माताओं को नई रिलीज डेट घोषित करनी पड़ सकती है। फिल्म की रिलीज टलने से इसके प्रमोशनल प्लान, थिएटर बुकिंग और मार्केटिंग रणनीति पर भी असर पड़ सकता है। साथ ही अगस्त में रिलीज होने वाली अन्य फिल्मों के साथ बॉक्स ऑफिस की प्रतिस्पर्धा का समीकरण भी बदल सकता है।
फिल्म से जुड़े कलाकारों और तकनीकी टीम ने इस प्रोजेक्ट पर लंबे समय तक काम किया है। अब सभी की निगाहें सेंसर बोर्ड के अगले फैसले पर टिकी हैं। यदि CBFC आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद प्रमाणपत्र जारी कर देता है, तो फिल्म नई रिलीज डेट के साथ सिनेमाघरों में आ सकती है।
फिलहाल ‘मातृभूमि’ का भविष्य सेंसर बोर्ड के अंतिम निर्णय पर निर्भर है। दर्शकों और फिल्म उद्योग दोनों को अब इंतजार है कि CBFC इस फिल्म पर कब और क्या अंतिम फैसला लेता है। यदि क्लियरेंस जल्द मिल जाता है, तो फिल्म इस वर्ष बड़े पर्दे पर दस्तक दे सकती है, लेकिन यदि प्रक्रिया लंबी चली तो इसकी रिलीज अगले कुछ महीनों के लिए और आगे बढ़ सकती है।

