खो-नागोरियान पटाखा फैक्ट्री ब्लास्ट जांच में बड़ा खुलासा, विस्फोट वाले दिन दिल्ली से पहुंचा था बारूद का जखीरा
जयपुर। राजधानी जयपुर के खो-नागोरियान क्षेत्र में हुए भीषण पटाखा फैक्ट्री ब्लास्ट मामले की जांच में लगातार नए खुलासे हो रहे हैं। अब पुलिस जांच में सामने आया है कि जिस दिन विस्फोट हुआ था, उसी दिन तड़के करीब चार बजे दिल्ली से भारी मात्रा में बारूद और पटाखा निर्माण में इस्तेमाल होने वाला अन्य सामान जयपुर लाया गया था। इस खुलासे के बाद जांच एजेंसियों को मामले में कई महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं और अवैध पटाखा कारोबार के बड़े नेटवर्क की आशंका भी जताई जा रही है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, दिल्ली से लाया गया यह सामान चार बंद लोडिंग टेम्पो में भरकर जयपुर पहुंचा था। शुरुआती जांच में पता चला है कि इन वाहनों में बारूद, पटाखा निर्माण में प्रयुक्त रासायनिक सामग्री तथा अन्य आवश्यक सामान लोड था। जयपुर पहुंचने के बाद यह सामग्री उन चार अवैध पटाखा फैक्ट्रियों में उतारी गई, जिनका हाल ही में पुलिस ने खुलासा किया था।

जांच में सामने आया है कि सभी टेम्पो अलग-अलग फैक्ट्रियों तक पहुंचे और वहां निर्धारित मात्रा में सामान उतारने के बाद तुरंत वापस दिल्ली के लिए रवाना हो गए। पुलिस अब इन वाहनों के रूट, ड्राइवरों और माल भेजने वालों की पहचान करने में जुटी है। सीसीटीवी फुटेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं।
मामले की जांच में एक और अहम तथ्य सामने आया है। पुलिस के अनुसार, फिरोज नामक व्यक्ति अपनी वैगनआर कार के जरिए इन टेम्पो को फैक्ट्रियों तक पहुंचाने और रास्ता दिखाने का काम कर रहा था। जांच में यह संकेत मिले हैं कि वह पूरे नेटवर्क की गतिविधियों से भली-भांति परिचित था और सामान को सुरक्षित तरीके से फैक्ट्री तक पहुंचाने में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका थी।
हालांकि जांच में यह भी पता चला है कि ब्लास्ट वाली जगह स्थित फिरोज की फैक्ट्री में अन्य स्थानों की तुलना में सबसे कम मात्रा में बारूद उतारा गया था। पुलिस के अनुसार, यहां करीब 25 कट्टे बारूद के उतारे गए थे। इसके अलावा पटाखों के निर्माण में उपयोग होने वाली नलकियों के कार्टन भी इसी फैक्ट्री में खाली किए गए थे। अधिकारियों का मानना है कि यह सामग्री अवैध रूप से पटाखा निर्माण के लिए उपयोग की जा रही थी।
पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि दिल्ली से लाई गई सामग्री के लिए आवश्यक अनुमति और लाइसेंस मौजूद थे या नहीं। प्रारंभिक जांच में कई अनियमितताओं के संकेत मिले हैं। यदि यह साबित होता है कि बिना वैध अनुमति के विस्फोटक सामग्री का परिवहन और भंडारण किया गया था, तो मामले में कई और लोगों के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।
गौरतलब है कि खो-नागोरियान क्षेत्र में हुए इस भीषण विस्फोट ने पूरे शहर को झकझोर दिया था। धमाका इतना शक्तिशाली था कि आसपास के इलाके में दहशत फैल गई थी और कई मकानों को भी नुकसान पहुंचा था। घटना के बाद प्रशासन और पुलिस ने व्यापक जांच शुरू की थी, जिसमें एक के बाद एक कई अवैध पटाखा फैक्ट्रियों का खुलासा हुआ।
जांच एजेंसियों का मानना है कि यह केवल एक फैक्ट्री तक सीमित मामला नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक संगठित नेटवर्क काम कर रहा था। दिल्ली से विस्फोटक सामग्री की सप्लाई, स्थानीय स्तर पर उसका भंडारण और अवैध उत्पादन की गतिविधियां कई लोगों की मिलीभगत की ओर संकेत कर रही हैं।
फिलहाल पुलिस मामले से जुड़े सभी पहलुओं की गहन जांच कर रही है। संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ की जा रही है और दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस नए खुलासे ने पटाखा फैक्ट्री ब्लास्ट मामले को और अधिक गंभीर बना दिया है।

