ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई को अंतिम विदाई, 100 से अधिक देशों के प्रतिनिधि हुए शामिल
ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की अंतिम विदाई की रस्में शुक्रवार से आधिकारिक रूप से शुरू हो गईं। राजधानी तेहरान में आयोजित इस ऐतिहासिक समारोह में देश की राजनीतिक, धार्मिक और सैन्य नेतृत्व ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान समेत सरकार के कई वरिष्ठ मंत्री, सैन्य अधिकारी और धार्मिक नेता अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे। पूरे तेहरान में सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए गए और हजारों सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया।
श्रद्धांजलि समारोह में बड़ी संख्या में आम नागरिक भी शामिल हुए। लोग अपने पूर्व सर्वोच्च नेता को अंतिम विदाई देने के लिए सुबह से ही सड़कों पर उमड़ पड़े। कई स्थानों पर लोगों ने हाथों में ईरानी झंडे और धार्मिक प्रतीक लेकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। राजधानी की प्रमुख सड़कों पर सुरक्षा जांच के बाद ही लोगों को समारोह स्थल तक पहुंचने की अनुमति दी गई।
सुरक्षा कारणों के चलते अयातुल्लाह अली खामेनेई के बेटे मुजतबा खामेनेई इस सार्वजनिक कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए। ईरानी अधिकारियों ने उनकी अनुपस्थिति पर कोई विस्तृत टिप्पणी नहीं की, लेकिन सूत्रों के अनुसार सुरक्षा एजेंसियों ने संभावित खतरों को देखते हुए उन्हें सार्वजनिक कार्यक्रम से दूर रहने की सलाह दी थी। इस कारण समारोह के दौरान उनकी गैरमौजूदगी चर्चा का विषय बनी रही।

अंतिम संस्कार के कार्यक्रम में दुनिया भर से आए प्रतिनिधियों की मौजूदगी ने इसे अंतरराष्ट्रीय महत्व का आयोजन बना दिया। ईरान के अनुसार 100 से अधिक देशों के प्रतिनिधि इस अवसर पर तेहरान पहुंचे। कई देशों ने अपने विशेष दूत, विदेश मंत्री या अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को भेजकर श्रद्धांजलि अर्पित की। इससे स्पष्ट हुआ कि क्षेत्रीय और वैश्विक राजनीति में ईरान की भूमिका को देखते हुए इस आयोजन पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई थी।
हालांकि कई बड़े देशों के शीर्ष नेताओं ने इस समारोह में व्यक्तिगत रूप से हिस्सा नहीं लिया। रूस, चीन, भारत और तुर्किये जैसे देशों ने अपने राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री को भेजने के बजाय निचले स्तर के प्रतिनिधियों को समारोह में शामिल किया। इन देशों ने ईरान के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल भेजा, लेकिन शीर्ष नेतृत्व की अनुपस्थिति ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक हलकों में कई तरह की चर्चाओं को जन्म दिया।
भारत की ओर से विदेश राज्य मंत्री पबित्र मार्गेरिटा और बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया। दोनों नेताओं ने ईरानी नेतृत्व से मुलाकात कर भारत सरकार की ओर से संवेदना व्यक्त की और श्रद्धांजलि अर्पित की। भारत और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे ऐतिहासिक और रणनीतिक संबंधों को देखते हुए भारतीय प्रतिनिधिमंडल की उपस्थिति को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
दूसरी ओर पाकिस्तान, इराक, आर्मेनिया, ताजिकिस्तान और जॉर्जिया जैसे देशों के शीर्ष नेता स्वयं तेहरान पहुंचे। इन नेताओं ने अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ-साथ ईरानी नेतृत्व के साथ मुलाकात भी की। समारोह के दौरान कई द्विपक्षीय बैठकों के आयोजन की भी जानकारी सामने आई, जिनमें क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और पश्चिम एशिया की वर्तमान स्थिति पर चर्चा होने की संभावना जताई गई।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह आयोजन केवल एक अंतिम संस्कार नहीं, बल्कि ईरान की राजनीतिक और कूटनीतिक स्थिति को भी दर्शाता है। बड़ी संख्या में विदेशी प्रतिनिधियों की मौजूदगी से यह संकेत मिलता है कि पश्चिम एशिया की राजनीति में ईरान की भूमिका आने वाले समय में भी महत्वपूर्ण बनी रहेगी। वहीं, शीर्ष नेताओं की अनुपस्थिति को कई विश्लेषक अलग-अलग देशों की विदेश नीति और कूटनीतिक प्राथमिकताओं के संदर्भ में भी देख रहे हैं।
फिलहाल तेहरान में अंतिम संस्कार से जुड़े धार्मिक और राजकीय कार्यक्रम जारी हैं। सुरक्षा एजेंसियां पूरे आयोजन पर कड़ी नजर बनाए हुए हैं, जबकि दुनिया भर की निगाहें ईरान में होने वाले अगले राजनीतिक घटनाक्रम और नेतृत्व से जुड़े फैसलों पर टिकी हुई हैं। यह समारोह न केवल ईरान के इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय माना जा रहा है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भी इसके दूरगामी प्रभाव देखने को मिल सकते हैं।

