ईरान-अमेरिका शांति समझौते की खबरों से शेयर बाजार में जोरदार उछाल, सेंसेक्स 1200 अंक चढ़ा
मुंबई। वैश्विक स्तर पर ईरान और अमेरिका के बीच संभावित शांति समझौते की खबरों का सकारात्मक असर भारतीय शेयर बाजार पर देखने को मिला। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार को घरेलू बाजार ने शानदार शुरुआत की और प्रमुख सूचकांकों में मजबूत बढ़त दर्ज की गई। निवेशकों की खरीदारी के चलते सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में डेढ़ प्रतिशत से अधिक की तेजी देखने को मिली।

बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स करीब 1200 अंक यानी 1.50 प्रतिशत की बढ़त के साथ 76,700 के स्तर पर कारोबार करता नजर आया। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी भी 350 अंक यानी 1.53 प्रतिशत की मजबूती के साथ 23,985 के स्तर पर पहुंच गया। बाजार में आई इस तेजी से निवेशकों की संपत्ति में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई।
विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम होने की संभावनाओं ने वैश्विक निवेशकों की चिंताओं को कम किया है। मध्य-पूर्व क्षेत्र में लंबे समय से जारी भू-राजनीतिक तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और निवेश माहौल पर पड़ता रहा है। ऐसे में यदि दोनों देशों के बीच किसी प्रकार का समझौता होता है तो इससे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में स्थिरता आने की उम्मीद बढ़ जाती है।
बाजार में सबसे अधिक खरीदारी ऑटो, बैंकिंग और रियल्टी सेक्टर के शेयरों में देखने को मिली। ऑटोमोबाइल कंपनियों के शेयरों में मजबूत मांग रही, जबकि बैंकिंग शेयरों को निवेशकों का अच्छा समर्थन मिला। रियल एस्टेट सेक्टर के शेयरों में भी तेजी का माहौल रहा। निवेशकों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां बेहतर होने से आर्थिक गतिविधियों को गति मिल सकती है, जिसका लाभ इन क्षेत्रों को मिलेगा।
इसी बीच कच्चे तेल के बाजार से भी राहत भरी खबर सामने आई है। होर्मुज स्ट्रेट को खोले जाने की खबरों के बाद ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में करीब 4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। कच्चा तेल घटकर 83 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि तेल की कीमतों में गिरावट का यह रुझान जारी रहता है तो भारत जैसे आयातक देशों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।
भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में कच्चे तेल की कीमतों में कमी आने से देश का आयात बिल घट सकता है। इसके अलावा महंगाई पर भी दबाव कम होगा और सरकार को वित्तीय प्रबंधन में राहत मिल सकती है। तेल कीमतों में नरमी का असर परिवहन, विनिर्माण और अन्य उद्योगों की लागत पर भी पड़ता है।
विश्लेषकों का मानना है कि बाजार की मौजूदा तेजी केवल घरेलू कारकों की वजह से नहीं बल्कि वैश्विक संकेतों से भी प्रेरित है। विदेशी निवेशकों की खरीदारी, मजबूत आर्थिक संकेतक और अंतरराष्ट्रीय तनाव में संभावित कमी ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है। यही कारण है कि बाजार में व्यापक खरीदारी देखने को मिल रही है।
हालांकि बाजार विशेषज्ञ निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह भी दे रहे हैं। उनका कहना है कि भू-राजनीतिक घटनाक्रम तेजी से बदल सकते हैं और किसी भी नई स्थिति का असर बाजार पर पड़ सकता है। इसलिए निवेशकों को केवल अल्पकालिक खबरों के आधार पर निवेश निर्णय लेने से बचना चाहिए और लंबी अवधि की रणनीति अपनानी चाहिए।
फिलहाल बाजार में सकारात्मक माहौल बना हुआ है। सेंसेक्स और निफ्टी की मजबूत बढ़त ने निवेशकों के चेहरे पर मुस्कान लौटा दी है। अब निवेशकों की नजर ईरान-अमेरिका संबंधों से जुड़ी आगे की घटनाओं, वैश्विक बाजारों की दिशा और कच्चे तेल की कीमतों पर बनी रहेगी, जो आने वाले दिनों में बाजार की चाल तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

