अनहद श्रृंखला की पाँचवी प्रस्तुति में डॉ. अश्विनी भिड़े करेंगी शास्त्रीय संगीत का जादू
जयपुर में शनिवार, 10 जनवरी को अनहद श्रृंखला की पाँचवी प्रस्तुति में डॉ. अश्विनी भिड़े अपनी मधुर आवाज़ में शास्त्रीय संगीत से शाम को महका देंगी। कार्यक्रम में हारमोनियम पर ध्यानेश्वर सोनावणे और तबले पर प्रणव गुरव संगत करेंगे। प्रवेश निशुल्क है।
अनहद श्रृंखलाकी पाँचवी प्रस्तुति: डॉ. अश्विनी भिड़े-देशपांडे के सुरों से महकेगी कार्तिक की सांस्कृतिक शाम
जयपुर : राजस्थान की सांस्कृतिक राजधानी जयपुर एक बार फिर शास्त्रीय संगीत की मधुर स्वरलहरियों से सराबोर होने जा रही है। राजस्थान पर्यटन विभाग और स्पिकमैके (SPIC MACAY) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित की जा रही “अनहद” संगीत श्रृंखला की पाँचवी प्रस्तुति शनिवार, 10 जनवरी को जवाहर कला केंद्र में आयोजित की जाएगी। इस विशेष संध्या में देश की सुप्रसिद्ध शास्त्रीय गायिका डॉ. अश्विनी भिड़े-देशपांडे अपने स्वर-साधना से श्रोताओं को भारतीय शास्त्रीय संगीत की गहराइयों में ले जाएंगी।
“अनहद” श्रृंखला का उद्देश्य केवल संगीत प्रस्तुति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से शास्त्रीय संगीत की परंपरा, साधना और दर्शन को आम जनमानस तक पहुंचाना भी है। यही कारण है कि इस श्रृंखला ने कम समय में ही जयपुर के सांस्कृतिक कैलेंडर में अपनी विशिष्ट पहचान बना ली है।
जवाहर कला केंद्र में सजेगी सुरों की महफिल
श्रृंखला की संयोजक अनु चंडोक और हिमानी खींची ने जानकारी दी कि यह कार्यक्रम जवाहर कला केंद्र के मध्यवर्ती प्रांगण में शाम 6 बजे से आयोजित होगा और यह पूरी तरह निशुल्क रहेगा। यह आयोजन शास्त्रीय संगीत प्रेमियों के साथ-साथ युवा पीढ़ी को भी भारतीय संगीत की समृद्ध परंपरा से जोड़ने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
कार्यक्रम स्थल को शास्त्रीय संगीत की गरिमा के अनुरूप सजाया जाएगा, जहां खुला वातावरण, ऐतिहासिक स्थापत्य और संगीत का संगम एक अलग ही अनुभूति प्रदान करेगा। आयोजकों के अनुसार, “अनहद” का मंच कलाकार और श्रोता के बीच किसी औपचारिक दूरी को नहीं रखता, बल्कि संवाद और अनुभूति का माध्यम बनता है।
संगत कलाकारों की भूमिका
इस संगीतमय संध्या में डॉ. अश्विनी भिड़े के साथ
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हारमोनियम पर ध्यानेश्वर सोनावणे
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तबले पर प्रणव गुरव
संगत करेंगे। ये दोनों कलाकार अपनी-अपनी विधाओं में सिद्धहस्त माने जाते हैं और शास्त्रीय गायन के साथ उनकी संगत प्रस्तुति को एक नई ऊंचाई प्रदान करती है। शास्त्रीय संगीत में संगत की भूमिका केवल साथ निभाने तक सीमित नहीं होती, बल्कि वह गायन के भाव, लय और विस्तार को दिशा देती है।
जयपुर-अतरोली घराने की सशक्त प्रतिनिधि
डॉ. अश्विनी भिड़े-देशपांडे जयपुर-अतरोली घराने की प्रमुख और प्रतिष्ठित गायिकाओं में गिनी जाती हैं। यह घराना भारतीय शास्त्रीय संगीत में अपनी जटिल राग संरचनाओं, दुर्लभ रागों और सुदृढ़ बंदिशों के लिए जाना जाता है। डॉ. भिड़े ने इस परंपरा को न केवल सहेजा है, बल्कि उसे समकालीन श्रोताओं के लिए सहज और ग्राह्य भी बनाया है।
उनके गायन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे राग की शुद्धता से कोई समझौता किए बिना भावात्मक प्रस्तुति करती हैं। उनके स्वर में गहराई, ठहराव और साधना की स्पष्ट झलक मिलती है, जो उन्हें भीड़ से अलग पहचान दिलाती है।
बाल्यावस्था से संगीत साधना तक का सफर
डॉ. अश्विनी भिड़े ने मात्र 11 वर्ष की आयु में संगीत विशारद की उपाधि प्राप्त कर ली थी, जो उनकी असाधारण प्रतिभा और कठोर रियाज़ का प्रमाण है। इसके बाद उन्होंने खयाल, तराना, द्रुत और विलंबित बंदिशों सहित शास्त्रीय गायन के विविध पक्षों में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई।
उनकी शिक्षा और साधना केवल मंच तक सीमित नहीं रही। उन्होंने संगीत को एक शैक्षणिक अनुशासन के रूप में भी अपनाया और पीएचडी की उपाधि प्राप्त कर शास्त्रीय संगीत के सैद्धांतिक पक्ष को भी मजबूती दी।
गायन की विशेषताएं
डॉ. अश्विनी भिड़े के गायन में
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राग की गहराई
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भाव की कोमलता
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लय की शुद्धता
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स्वर की स्थिरता
का अद्भुत संतुलन देखने को मिलता है। वे जटिल रागों को भी इस प्रकार प्रस्तुत करती हैं कि शास्त्रीय संगीत का सामान्य श्रोता भी उससे जुड़ाव महसूस कर सके। यही कारण है कि उनके कार्यक्रमों में पारंपरिक श्रोताओं के साथ युवा वर्ग की भी बड़ी उपस्थिति रहती है।
“अनहद” श्रृंखला: एक सांस्कृतिक आंदोलन
राजस्थान पर्यटन विभाग और स्पिकमैके की “अनहद” श्रृंखला केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक आंदोलन के रूप में उभर रही है। यह श्रृंखला हर दूसरे शनिवार को आयोजित की जाती है, जिसमें देश के प्रतिष्ठित शास्त्रीय कलाकार जयपुर आकर अपनी प्रस्तुतियां देते हैं।
इसका उद्देश्य है—
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शास्त्रीय कला को आम जनता के करीब लाना
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युवा पीढ़ी में भारतीय संगीत के प्रति रुचि विकसित करना
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जयपुर को सांस्कृतिक पर्यटन के रूप में और सशक्त बनाना
पर्यटन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस प्रकार के आयोजनों से न केवल स्थानीय कलाकारों और श्रोताओं को लाभ मिलता है, बल्कि देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को भी राजस्थान की जीवंत सांस्कृतिक परंपरा से जुड़ने का अवसर मिलता है।
जयपुर की सांस्कृतिक पहचान को नई ऊर्जा
जयपुर पहले से ही साहित्य, संगीत, नृत्य और कला का प्रमुख केंद्र रहा है। “अनहद” जैसी श्रृंखलाएं इस विरासत को समकालीन संदर्भ में पुनर्जीवित कर रही हैं। जवाहर कला केंद्र जैसे प्रतिष्ठित मंच पर जब शास्त्रीय संगीत की गूंज सुनाई देती है, तो यह शहर की सांस्कृतिक आत्मा को और सशक्त बनाती है।
श्रोताओं के लिए खुला निमंत्रण
आयोजकों ने सभी संगीत प्रेमियों, विद्यार्थियों, शोधार्थियों और आम नागरिकों से इस कार्यक्रम में शामिल होने की अपील की है। चूंकि कार्यक्रम निशुल्क है, इसलिए बड़ी संख्या में श्रोताओं के पहुंचने की संभावना है।
यह संध्या न केवल मनोरंजन का साधन होगी, बल्कि भारतीय शास्त्रीय संगीत की गहराई को समझने और महसूस करने का एक दुर्लभ अवसर भी प्रदान करेगी।


