Venu Srinivasan Resignation : वेणु श्रीनिवासन ने टाटा ट्रस्ट से इस्तीफा दिया, नियुक्ति विवाद और योग्यता सवाल उठे
Venu Srinivasan Resignation : वेणु श्रीनिवासन ने ‘बाई हीराबाई चैरिटेबल ट्रस्ट’ के ट्रस्टी पद से इस्तीफा दिया। पूर्व ट्रस्टी मेहली मिस्त्री ने उनकी और विजय सिंह की नियुक्ति पर योग्यता की शर्तों को पूरा न करने का आरोप लगाया। ट्रस्ट में पारदर्शिता और सदस्यों की वैधता को लेकर विवाद बढ़ा।
Venu Srinivasan Resignation : वेणु श्रीनिवासन ने टाटा ट्रस्ट से इस्तीफा दिया
टाटा ग्रुप के सात ट्रस्टों के वाइस चेयरमैन और TVS मोटर्स के चेयरमैन एमेरिटस वेणु श्रीनिवासन ने शनिवार, 4 अप्रैल को ‘बाई हीराबाई चैरिटेबल ट्रस्ट’ (टाटा ट्रस्ट) के ट्रस्टी पद से इस्तीफा दे दिया। न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक, श्रीनिवासन ने इस्तीफे के पीछे अन्य व्यावसायिक प्रतिबद्धताओं और समय की कमी का हवाला दिया।
इस्तीफा विवाद के बीच आया
श्रीनिवासन का इस्तीफा उस समय आया, जब ठीक एक दिन पहले टाटा ग्रुप के तीन प्रमुख ट्रस्टों के पूर्व ट्रस्टी मेहली मिस्त्री ने उनकी और विजय सिंह की पात्रता को चुनौती दी थी। मिस्त्री ने ट्रस्ट बोर्ड के कुछ सदस्यों को ट्रस्ट डीड की शर्तों के अनुसार अयोग्य बताया और उनके निर्णयों की वैधता पर सवाल उठाया।
मेहली मिस्त्री ने क्या सवाल उठाए?

पूर्व ट्रस्टी मेहली मिस्त्री ने ‘बाई हीराबाई जमशेदजी टाटा नवसारी चैरिटेबल इंस्टीट्यूशन’ के बोर्ड में शामिल नए सदस्यों की नियुक्ति को चुनौती दी। उनका कहना था कि वर्तमान बोर्ड के दो सदस्य—वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह—पारसी जोरोस्ट्रियन धर्म के नहीं हैं और मुंबई या नवसारी के स्थायी निवासी भी नहीं हैं।
ट्रस्ट डीड की शर्तें और विवाद
मिस्त्री ने 7 दिसंबर 1923 की ट्रस्ट डीड का हवाला दिया, जिसमें ट्रस्टी बनने के दो अनिवार्य शर्तें तय की गई थीं:
- सभी ट्रस्टी पारसी जोरोस्ट्रियन होने चाहिए।
- वे बॉम्बे प्रेसीडेंसी-नवसारी क्षेत्राधिकार के स्थायी निवासी होने चाहिए।
मिस्त्री का आरोप है कि श्रीनिवासन और विजय सिंह इन शर्तों को पूरी तरह से पूरा नहीं करते। उन्होंने कहा कि यदि ये दोनों अयोग्य हैं, तो उनके द्वारा लिए गए कोई भी निर्णय कानूनी रूप से मान्य नहीं हैं।
नियुक्ति और वोटिंग विवरण
मिस्त्री को 29 अक्टूबर 2022 से तीन साल के कार्यकाल के लिए ट्रस्टी नियुक्त किया गया था। अक्टूबर 2025 में उनके कार्यकाल को बढ़ाने का प्रस्ताव आया, जिसे ट्रस्ट के बोर्ड ने नामंजूर कर दिया।
वोटिंग विवरण:
- विरोध में (रिन्यूअल नहीं चाहते थे): नोएल एन. टाटा, वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह
- पक्ष में (रिन्यूअल चाहते थे): जहांगीर सी. जहांगीर और डारियस खंबाटा
- कोई जवाब नहीं दिया: जिमी एन. टाटा
मिस्त्री का तर्क है कि यदि अयोग्य ट्रस्टियों के वोटों को हटा दिया जाए, तो उनका कार्यकाल बढ़ाने वाला प्रस्ताव स्वतः गिर जाएगा।
पिछले दो साल में ट्रस्ट की बैठकें नहीं हुईं
मिस्त्री ने ट्रस्ट के कामकाज पर भी सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि पिछले दो साल में ट्रस्ट की कोई आधिकारिक बैठक नहीं हुई, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही पर असर पड़ा। उन्होंने चैरिटी कमिश्नर से ट्रस्ट रिकॉर्ड और मिनट बुक की जांच और सभी सदस्यों से हलफनामा लेने की मांग की।
ट्रस्ट के अस्तित्व पर संकट
मिस्त्री ने याचिका में यह भी कहा कि यदि अयोग्य ट्रस्टियों को हटाया जाता है, तो ट्रस्ट में न्यूनतम पांच सदस्यों की आवश्यकता पूरी नहीं होगी। ऐसी स्थिति में उन्होंने एक प्रशासक नियुक्त करने की मांग की, ताकि ट्रस्ट के मूल उद्देश्य और पारसी समुदाय के हित सुरक्षित रहें।
वेणु श्रीनिवासन का टाटा ग्रुप में कद
श्रीनिवासन टाटा ग्रुप के भरोसेमंद सहयोगियों में शामिल हैं। वे कई ट्रस्टों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं और रतन टाटा के करीबी भी माने जाते हैं। उनके इस्तीफे को कॉर्पोरेट जगत में बड़े घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है।
हीराबाई चैरिटेबल ट्रस्ट का महत्व
यह ट्रस्ट नवसारी (गुजरात) के पारसी समुदाय के कल्याण और धार्मिक कार्यों के लिए स्थापित किया गया था। ट्रस्ट डीड बहुत सख्त है और केवल पारसी समुदाय के सदस्यों को इसके प्रबंधन का अधिकार देती है। ट्रस्ट का उद्देश्य शिक्षा, धर्म और सामाजिक कल्याण कार्यों के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना है।
निष्कर्ष
वेणु श्रीनिवासन का इस्तीफा और ट्रस्ट की पात्रता विवाद से यह स्पष्ट हुआ कि पारदर्शिता और योग्यता के मानक सुनिश्चित करना आवश्यक है। ट्रस्ट के मूल उद्देश्य, पारसी समुदाय के हित और बोर्ड सदस्यों की वैधता को लेकर आगामी कार्रवाई पर सभी की निगाहें लगी हैं।

