Ujjain Updates : उज्जैन में गंगा आरती की तर्ज पर भव्य शिप्रा आरती, सिंहस्थ से पहले रामघाट का कायाकल्प
Ujjain Updates : उज्जैन में सिंहस्थ कुंभ से पहले रामघाट का कायाकल्प किया जाएगा। शिप्रा आरती को वाराणसी की गंगा आरती की तर्ज पर भव्य और अनुशासित स्वरूप मिलेगा। जिला प्रशासन ने स्वच्छता, सुरक्षा और श्रद्धालु प्रबंधन को लेकर विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है।
Ujjain Updates : उज्जैन में गंगा आरती की तर्ज पर होगी शिप्रा आरती
उज्जैन :
उज्जैन में मंदिरों के विकास के बाद अब शिप्रा नदी और रामघाट के कायाकल्प की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। वर्ष 2028 में प्रस्तावित सिंहस्थ कुंभ से पहले रामघाट पर होने वाली शिप्रा आरती को वाराणसी की गंगा आरती की तर्ज पर भव्य, अनुशासित और व्यवस्थित स्वरूप दिया जाएगा। इसके लिए जिला प्रशासन ने विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर ली है और संबंधित विभागों को दिशा-निर्देश जारी किए जा रहे हैं।
धार्मिक पर्यटन को मिलेगी नई पहचान
उज्जैन पहले से ही महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के कारण देश-विदेश में धार्मिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र है। अब प्रशासन का लक्ष्य है कि शिप्रा नदी और रामघाट को भी वैश्विक धार्मिक पहचान दिलाई जाए।
रोजाना रामघाट पर होने वाली शिप्रा आरती को इस तरह विकसित किया जाएगा कि यह न सिर्फ श्रद्धालुओं बल्कि पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बने।
वाराणसी की गंगा आरती की तर्ज पर होगी व्यवस्था

जिला प्रशासन की योजना के अनुसार—
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आरती का समय, अनुशासन और संचालन तय प्रोटोकॉल के अनुसार होगा
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आरती में शामिल पुजारियों की वेशभूषा एकरूप और पारंपरिक होगी
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मंत्रोच्चार, शंखनाद और दीपदान से आध्यात्मिक वातावरण तैयार किया जाएगा
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श्रद्धालुओं के लिए दर्शन की स्पष्ट व्यवस्था होगी, जिससे अव्यवस्था न हो
प्रशासन चाहता है कि शिप्रा आरती भी आने वाले समय में गंगा आरती की तरह अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाए।
रामघाट पर होंगे संरचनात्मक बदलाव

श्रद्धालुओं की लगातार बढ़ती संख्या को देखते हुए रामघाट के भौतिक ढांचे में भी सुधार किया जाएगा। योजना के तहत—
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घाट पर नए पत्थर लगाए जाएंगे
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क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत की जाएगी
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घाट की सजावट और सौंदर्यीकरण किया जाएगा
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श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बैठने और आवागमन की व्यवस्था सुधारी जाएगी
इससे रामघाट अधिक सुरक्षित, मजबूत और आकर्षक स्वरूप में नजर आएगा।
सिंहस्थ कुंभ 2028 को ध्यान में रखकर तैयारी
प्रशासन के अनुसार वर्ष 2028 के सिंहस्थ कुंभ में—
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देश-विदेश से करीब 40 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है
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रामघाट प्रमुख स्नान और आरती स्थलों में शामिल रहेगा
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भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा, स्वच्छता और ट्रैफिक मैनेजमेंट पर विशेष फोकस रहेगा
इसी वजह से अभी से रामघाट और शिप्रा आरती से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता पर लिया गया है।
स्वच्छता और सुरक्षा पर रहेगा विशेष जोर
शिप्रा आरती स्थल पर—
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नियमित सफाई व्यवस्था
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कचरा प्रबंधन के लिए अलग-अलग ज़ोन
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CCTV कैमरे और सुरक्षा कर्मियों की तैनाती
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आपात स्थिति के लिए त्वरित रिस्पॉन्स टीम
जैसी व्यवस्थाएं की जाएंगी, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
लाइटिंग और मंच व्यवस्था होगी आकर्षक

रामघाट पर आरती के दौरान—
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विशेष डेकोरेटिव लाइटिंग
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आरती के लिए स्थायी और सुरक्षित मंच
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दीपदान के लिए सुव्यवस्थित स्थान
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फोटोग्राफी और लाइव कवरेज के लिए निर्धारित ज़ोन
तैयार किए जाएंगे, जिससे आरती का दृश्य और भी भव्य व दिव्य नजर आए।
शिप्रा नदी की महिमा को पुनर्स्थापित करने की कोशिश
इस योजना का उद्देश्य सिर्फ घाट का सौंदर्यीकरण नहीं, बल्कि—
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शिप्रा नदी की धार्मिक और सांस्कृतिक महिमा को पुनर्स्थापित करना
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स्थानीय लोगों को नदी से जोड़ना
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युवाओं में संस्कृति और परंपरा के प्रति जागरूकता बढ़ाना
भी है।
प्रशासन का लक्ष्य: सिंहस्थ से पहले सभी काम पूरे हों
जिला प्रशासन का स्पष्ट लक्ष्य है कि—
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सिंहस्थ कुंभ से पहले रामघाट विकास और शिप्रा आरती से जुड़े सभी कार्य पूरे कर लिए जाएं
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उज्जैन को एक विश्वस्तरीय धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में स्थापित किया जाए
निष्कर्ष
उज्जैन में शिप्रा आरती को गंगा आरती की तर्ज पर विकसित करने की योजना धार्मिक पर्यटन, सांस्कृतिक संरक्षण और श्रद्धालु सुविधा—तीनों दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
सिंहस्थ कुंभ 2028 से पहले रामघाट का कायाकल्प न केवल उज्जैन की पहचान को नई ऊंचाई देगा, बल्कि शिप्रा नदी को भी उसका गौरवपूर्ण स्थान दिलाएगा।

