उज्जैन जिले में तकनीकी खामी के चलते सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) पूरी तरह प्रभावित हो गई है। सर्वर में आई खराबी के कारण जिले की सभी 800 उचित मूल्य दुकानों पर राशन वितरण ठप हो गया है। सुबह से दुकानों पर पहुंच रहे सैकड़ों लोग घंटों इंतजार के बाद भी खाली हाथ लौटने को मजबूर हैं।
बताया जा रहा है कि ऐसी ही स्थिति प्रदेश के अन्य जिलों में भी देखने को मिल रही है, जिससे पूरे मध्यप्रदेश में लाखों कार्डधारक प्रभावित हैं।
सुबह से लग रही लंबी कतारें, नहीं मिल रहा राशन
हर दिन की तरह उपभोक्ता सुबह से राशन दुकानों पर पहुंच रहे हैं। कई जगहों पर महिलाएं और बुजुर्ग घंटों लाइन में खड़े रहते हैं, लेकिन सर्वर चालू नहीं होने के कारण वितरण शुरू नहीं हो पा रहा।
कई मामलों में बायोमेट्रिक सत्यापन सफल होने के बाद भी सिस्टम आगे नहीं बढ़ रहा। इससे दुकानदारों और उपभोक्ताओं के बीच बहस और विवाद की स्थिति बन रही है। तकनीकी समस्या के चलते मशीनें ट्रांजैक्शन स्वीकार नहीं कर पा रहीं।
15 तारीख तक वितरण का नियम, इस बार नहीं हुआ पालन
सरकारी नियमों के अनुसार हर महीने की 15 तारीख तक सभी राशन कार्डधारकों को उनका निर्धारित राशन मिल जाना चाहिए। लेकिन इस बार 12 फरवरी तक भी वितरण प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी है।
ऐसे में गरीब और जरूरतमंद परिवारों को खुले बाजार से महंगा गेहूं और चावल खरीदना पड़ रहा है। इससे उनके मासिक बजट पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
800 दुकानें और लाखों उपभोक्ता प्रभावित

उज्जैन जिले में करीब 800 राशन दुकानें संचालित हैं। पूरे मध्यप्रदेश में इनकी संख्या लगभग 25 हजार बताई जाती है।
प्रत्येक दुकान से हर महीने 600 से 1000 कार्डधारकों को राशन वितरित किया जाता है। योजना के तहत प्रति व्यक्ति 5 किलोग्राम राशन (4 किलो गेहूं और 1 किलो चावल) दिया जाता है।
यदि औसत आंकड़ों के आधार पर अनुमान लगाया जाए तो उज्जैन जिले में ही लाखों उपभोक्ता इस तकनीकी खराबी से प्रभावित हो रहे हैं।
दुकानदार भी परेशान, लगातार कर रहे शिकायत
जिला भंडार संघ के अध्यक्ष मनोज शर्मा ने बताया कि फरवरी महीने की शुरुआत से ही सर्वर की समस्या बनी हुई है।
उन्होंने कहा कि रोजाना दुकानदारों के फोन आ रहे हैं और वे अधिकारियों से संपर्क कर रहे हैं, लेकिन अब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका है। बायोमेट्रिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी मशीन आगे नहीं बढ़ती, जिससे पूरा वितरण ठप है।
दुकानदारों का कहना है कि वे उपभोक्ताओं के गुस्से का सामना कर रहे हैं, जबकि तकनीकी खराबी उनके नियंत्रण से बाहर है।
प्रशासन ने माना तकनीकी संकट, एनआईसी से समन्वय
जिला आपूर्ति नियंत्रक शालू वर्मा के अनुसार सर्वर समस्या को लेकर एनआईसी के साथ लगातार समन्वय किया जा रहा है। प्रदेश स्तर पर भी तकनीकी खामी की जानकारी दे दी गई है।
पिछले छह दिनों से सर्वर सुधार का प्रयास जारी है। फिलहाल तकनीकी टीम ने सिस्टम को अस्थायी रूप से बंद कर समस्या दूर करने का काम शुरू किया है।
डिजिटल सिस्टम पर निर्भरता बनी चुनौती

पिछले कुछ वर्षों में राशन वितरण प्रणाली को पूरी तरह डिजिटल और बायोमेट्रिक आधारित बनाया गया है। इसका उद्देश्य पारदर्शिता और फर्जीवाड़े पर रोक लगाना था।
लेकिन जब सर्वर या नेटवर्क में तकनीकी खराबी आती है, तो पूरी व्यवस्था ठप हो जाती है। ऐसे में यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध होनी चाहिए, ताकि जरूरतमंदों को राशन के लिए इंतजार न करना पड़े।
गरीब परिवारों पर बढ़ता आर्थिक दबाव
राशन वितरण में देरी का सीधा असर निम्न और मध्यम आय वर्ग के परिवारों पर पड़ता है। कई परिवार पूरी तरह सरकारी राशन पर निर्भर रहते हैं।
जब समय पर अनाज नहीं मिलता, तो उन्हें बाजार से ऊंचे दाम पर खाद्यान्न खरीदना पड़ता है। इससे घरेलू खर्च बढ़ जाता है और आर्थिक संतुलन बिगड़ जाता है।
कब तक सुधरेगा सर्वर?
प्रशासन का दावा है कि तकनीकी टीम समस्या को जल्द दूर कर लेगी। हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि सर्वर पूरी तरह कब तक चालू हो पाएगा।
जब तक सर्वर ठीक नहीं होता, तब तक लाखों उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
अब सभी की नजर प्रशासन और तकनीकी टीम पर टिकी है कि वे इस संकट का समाधान कब तक निकालते हैं और राशन वितरण व्यवस्था कब पटरी पर लौटती है।