Global Tariff : ट्रम्प का 10% ग्लोबल टैरिफ लागू, सुप्रीम कोर्ट फैसले के बाद भारत को राहत
Global Tariff : डोनाल्ड ट्रम्प ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के तीन घंटे बाद 10% ग्लोबल टैरिफ लागू किया। भारत पर 18% टैरिफ घटकर 10% हुआ। सेक्शन 122 के तहत अस्थायी टैरिफ लागू। 200 अरब डॉलर वसूली पर रिफंड सस्पेंस, कानूनी विवाद जारी।
Global Tariff : ट्रम्प ने 10% ग्लोबल टैरिफ लागू किया, सुप्रीम कोर्ट फैसले के बाद नई रणनीति; भारत को राहत
इससे पहले Supreme Court of the United States ने 6-3 के बहुमत से राष्ट्रपति द्वारा लगाए गए पूर्व टैरिफ को अवैध करार देते हुए रद्द कर दिया था। कोर्ट ने कहा कि संविधान के तहत टैक्स और टैरिफ लगाने का अधिकार कांग्रेस को है, राष्ट्रपति को नहीं।
भारत को 18% से 10% पर राहत
रिपोर्ट्स के मुताबिक, जिन देशों के साथ अमेरिका के व्यापार समझौते हैं—जिनमें भारत, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ शामिल हैं—उन्हें अब 10% के समान ग्लोबल टैरिफ का सामना करना होगा।
इसका अर्थ यह है कि भारत पर लागू 18% टैरिफ घटकर 10% रह जाएगा। हालांकि यह राहत सीमित है, क्योंकि नया टैरिफ सभी देशों पर समान रूप से लागू होगा।
ट्रम्प ने भारत के साथ व्यापार डील पर कहा कि इसमें कोई बदलाव नहीं होगा और उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को अपना “अच्छा दोस्त” बताया।
कोर्ट का फैसला और राष्ट्रपति की प्रतिक्रिया
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि IEEPA (International Emergency Economic Powers Act) के तहत राष्ट्रपति को इतने व्यापक स्तर पर टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं है।
फैसले के बाद ट्रम्प ने जजों की आलोचना करते हुए कहा कि यह निर्णय “बहुत निराशाजनक” है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ जजों में देश के लिए सही काम करने की हिम्मत नहीं है।
हालांकि तीन जज—जस्टिस सैमुअल एलिटो, क्लेरेंस थॉमस और ब्रेट कैवनॉ—ने फैसले से असहमति जताई।
सेक्शन 122 के तहत नया टैरिफ
नए 10% टैरिफ को लागू करने के लिए ट्रम्प प्रशासन ने Trade Act of 1974 के सेक्शन 122 का सहारा लिया है।
यह प्रावधान राष्ट्रपति को अस्थायी रूप से (आमतौर पर 150 दिनों तक) टैरिफ लगाने की अनुमति देता है, यदि देश को अचानक व्यापार घाटे या आर्थिक संकट का खतरा हो।
विशेषज्ञों का कहना है कि सेक्शन 122 का पहले कभी बड़े पैमाने पर उपयोग नहीं किया गया, इसलिए इसे अदालत में चुनौती दी जा सकती है।
किन उत्पादों को मिली छूट?
प्रशासन ने कुछ उत्पादों को 10% टैरिफ से छूट दी है, जिनमें शामिल हैं:
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कुछ कृषि उत्पाद (बीफ, टमाटर, संतरा)
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महत्वपूर्ण खनिज
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दवाइयां
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कुछ इलेक्ट्रॉनिक्स
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पैसेंजर वाहन
इसके अलावा, स्टील और एल्युमिनियम पर लगे टैरिफ अलग कानूनों के तहत लागू हैं, इसलिए वे जारी रहेंगे।
200 अरब डॉलर की वसूली और रिफंड पर सस्पेंस
रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रम्प प्रशासन ने पिछले वर्ष की शुरुआत से अब तक 200 अरब डॉलर से अधिक का टैरिफ वसूला है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्या सरकार कंपनियों को वसूली गई रकम लौटाएगी। ट्रम्प ने संकेत दिया है कि रिफंड नहीं दिया जाएगा, लेकिन यह मामला आगे अदालत में जा सकता है।
1971 में निक्सन ने भी लगाया था 10% टैरिफ
इतिहास में 1971 में राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन ने भी वैश्विक व्यापार असंतुलन के दौरान 10% ग्लोबल टैरिफ लगाया था। बाद में 1974 में ट्रेड एक्ट पारित किया गया ताकि भविष्य में आपात स्थिति से निपटने के लिए राष्ट्रपति को सीमित अधिकार मिल सकें।
ट्रम्प के खिलाफ 12 राज्यों का मुकदमा
टैरिफ के खिलाफ एरिजोना, कोलोराडो, कनेक्टिकट, डेलावेयर, इलिनॉय, मेन, मिनेसोटा, नेवादा, न्यू मेक्सिको, न्यूयॉर्क, ओरेगन और वर्मोंट सहित 12 राज्यों ने मुकदमा दायर किया था।
निचली अदालतों ने पहले ही टैरिफ को गैरकानूनी करार दिया था, जिसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।
आगे क्या?
विश्लेषकों का मानना है कि 10% का समान टैरिफ कुछ देशों के लिए राहत और कुछ के लिए अतिरिक्त बोझ साबित होगा।
भारत के लिए 18% से 10% पर आना राहत है, लेकिन वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता बनी रहेगी। यदि सेक्शन 122 के तहत लगाए गए टैरिफ को अदालत में चुनौती दी जाती है, तो आने वाले महीनों में कानूनी और राजनीतिक टकराव जारी रह सकता है।

