Trump बोले- ईरान के तेल पर कब्जा मेरी पसंदीदा चीज

अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को लेकर एक बार फिर विवादित बयान दिया है। रविवार को फाइनेंशियल टाइम्स को दिए इंटरव्यू में ट्रम्प ने कहा कि उन्हें ईरान के तेल पर कब्जा करना “सबसे पसंदीदा काम” लगता है। उन्होंने ईरान के खार्ग द्वीप का भी जिक्र किया और दावा किया कि अमेरिका इसे आसानी से अपने नियंत्रण में ले सकता है।
ट्रम्प ने अपने इंटरव्यू में स्पष्ट किया, “सच कहूं तो मेरी पसंदीदा चीज है ईरान का तेल लेना। इसके लिए अमेरिका के पास कई विकल्प मौजूद हैं।” उनके अनुसार, अमेरिका में कुछ लोग इस कदम को लेकर सवाल उठाते हैं, लेकिन उनका मानना है कि यह सोच गलत और “बेवकूफाना” है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अमेरिका की सैन्य ताकत ईरान पर दबाव बनाने में सक्षम है।
ट्रम्प ने खार्ग द्वीप का जिक्र करते हुए कहा, “हो सकता है हम खार्ग द्वीप ले लें, हो सकता है नहीं।” उन्होंने दावा किया कि इस द्वीप की सुरक्षा उतनी मजबूत नहीं है और अमेरिका इसे आसानी से अपने नियंत्रण में ले सकता है। यह बयान मध्यपूर्व में अमेरिकी और ईरानी तनाव को बढ़ा सकता है, क्योंकि खार्ग द्वीप ईरान के सबसे महत्वपूर्ण तेल निर्यात बिंदुओं में से एक है।
हालांकि ट्रम्प ने कहा कि युद्ध की संभावना पूरी तरह से समाप्त नहीं हुई है और ईरान के साथ बातचीत के जरिये समाधान भी निकाला जा सकता है। उन्होंने इस बात की भी पुष्टि की कि अगर ईरान अमेरिका के प्रस्ताव को मानता है, तो जल्द ही दोनों पक्षों के बीच समझौता हो सकता है। लेकिन उन्होंने चेतावनी भी दी कि अगर तेहरान ने अमेरिका के शर्तों को नहीं माना, तो उनके देश पर विनाशकारी कार्रवाई की संभावना बनी रहेगी। ट्रम्प ने अपने अंदाज में कहा, “अगर समझौता नहीं हुआ, तो ईरान ही नहीं बचेगा।”
विश्लेषकों के अनुसार, ट्रम्प के इस बयान से क्षेत्रीय राजनीति में तनाव बढ़ सकता है। खार्ग द्वीप ईरान के तेल निर्यात का महत्वपूर्ण केंद्र है और इसे अमेरिकी नियंत्रण में लेने का जिक्र अंतरराष्ट्रीय समुदाय में चिंता पैदा कर सकता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इस तरह के बयान न केवल अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ाते हैं, बल्कि तेल बाजार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी प्रभाव डाल सकते हैं।
ईरान और अमेरिका के बीच पहले भी कई बार तनाव बढ़ चुके हैं। विशेष रूप से जब अमेरिका ने 2018 में ईरान के साथ हुए परमाणु समझौते (JCPOA) से बाहर निकलने का निर्णय लिया था, तब से दोनों देशों के बीच राजनीतिक और सैन्य तनाव लगातार बना हुआ है। ट्रम्प का यह बयान उसी पुराने रुख की पुष्टि करता है, जिसमें उन्होंने ईरान पर दबाव बनाने और इसके तेल संसाधनों पर नियंत्रण पाने के पक्ष में रुख अपनाया है।
इस बयान को लेकर ईरानी अधिकारियों की प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है, लेकिन संभावना है कि तेहरान इसे गंभीरता से ले और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसका कड़ा विरोध करे। क्षेत्रीय सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई गंभीर वैश्विक परिणाम ला सकती है।
ट्रम्प के इस इंटरव्यू से स्पष्ट होता है कि उनकी विदेश नीति में ईरान के खिलाफ आक्रामक रुख अभी भी कायम है। उन्होंने अपने बयान में यह भी बताया कि अमेरिका के पास विकल्प हैं, और जरूरत पड़ने पर वह खार्ग द्वीप और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर नियंत्रण कर सकते हैं। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि युद्ध से बचने के लिए समझौते का विकल्प अभी भी खुला है।
अंतरराष्ट्रीय मीडिया और विश्लेषकों की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि ईरान इस बयान पर क्या प्रतिक्रिया देता है। मध्यपूर्व में तेल निर्यात और सुरक्षा की दृष्टि से यह बयान बेहद संवेदनशील माना जा रहा है।
निष्कर्ष
ट्रम्प का बयान न केवल अमेरिकी-ईरान संबंधों में नई हलचल ला सकता है, बल्कि वैश्विक तेल बाजार और क्षेत्रीय सुरक्षा को भी प्रभावित कर सकता है। यह स्पष्ट है कि अगर समझौता नहीं हुआ, तो ट्रम्प के शब्दों के अनुसार ईरान के अस्तित्व पर भी गंभीर असर पड़ सकता है।
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