Spicejet Crisis : स्पाइसजेट संकट में: 20% स्टाफ छंटनी, सैलरी रुकी, बेड़े में केवल 13 विमान बचे

Spicejet Crisis : स्पाइसजेट गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रही है। 20% स्टाफ की छंटनी, सीनियर कर्मचारियों को महीनों से सैलरी नहीं और बेड़े में केवल 13 विमान बचे हैं। कंपनी पर टैक्स बकाया भी बढ़ा। जानिए एयरलाइन की वित्तीय स्थिति और घाटे की पूरी कहानी।
Spicejet Crisis : गंभीर संकट में स्पाइसजेट, 20% स्टाफ पर छंटनी की तलवार
देश की प्रमुख लो-कॉस्ट एयरलाइन स्पाइसजेट इन दिनों गहरे वित्तीय संकट से जूझ रही है।
कंपनी ने अपनी परिचालन क्षमता घटने के चलते करीब 20% स्टाफ कम करने का फैसला लिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 500 से ज्यादा कर्मचारियों को बिना वेतन छुट्टी (लीव विदाउट पे) पर भेजा जा सकता है।
एयरलाइन में कुल करीब 6,800 कर्मचारी कार्यरत हैं, जिससे यह निर्णय बड़ी संख्या में कर्मचारियों को प्रभावित करेगा।

सैलरी में देरी, सीनियर अधिकारियों को महीनों से भुगतान नहीं
कंपनी के हालात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सीनियर अधिकारियों को जनवरी से अब तक वेतन नहीं मिला है।
वहीं अन्य कर्मचारियों को भी 2-3 महीने की देरी से सैलरी दी जा रही है।
इसके अलावा कंपनी पर जीएसटी, टीडीएस और पीएफ का 100 करोड़ रुपए से अधिक बकाया बताया जा रहा है, जो वित्तीय दबाव को और बढ़ा रहा है।
बेड़े में केवल 13 अपने विमान बचे
स्पाइसजेट के पास अब केवल 13 अपने विमान बचे हैं, जिनमें:
- 10 बोइंग विमान
- 3 Q400 विमान
इसके अलावा कंपनी 14 विमानों को वेट-लीज (क्रू सहित) पर चला रही है, जिससे ऑपरेशनल लागत और बढ़ रही है।

मार्केट शेयर में अकासा से भी पिछड़ी
घरेलू एविएशन मार्केट में स्पाइसजेट की स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है।
इसकी बाजार हिस्सेदारी घटकर महज 3.9% रह गई है।
वहीं नई एयरलाइन अकासा एयर ने तेजी से बढ़त बनाते हुए 4.9% मार्केट शेयर हासिल कर लिया है।
अकासा के पास 37 विमान और करीब 5,000 कर्मचारी हैं, जो स्पाइसजेट से बेहतर स्थिति को दर्शाता है।
इंजीनियरों और कर्मचारियों में नाराजगी
कंपनी ने कई इंजीनियरों के तीन महीने के नोटिस पीरियड को अचानक खत्म कर दिया है।
31 मार्च के आदेश के बाद इन कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से नौकरी छोड़ने को कहा गया।
इसके अलावा पुराने कर्मचारियों का फुल एंड फाइनल सेटलमेंट नहीं होने के कारण भी असंतोष बढ़ता जा रहा है।
पायलटों की सैलरी में कटौती, काम के नए नियम
पायलटों के लिए कंपनी ने नया नियम लागू किया है, जिसके तहत उन्हें:
- 21 दिन काम
- 9 दिन छुट्टी
दी जाएगी।
इस बदलाव के कारण कैप्टन की मासिक सैलरी ₹7.5 लाख से घटकर करीब ₹6 लाख रह जाएगी।
तिमाही घाटा ₹621 करोड़ तक पहुंचा
वित्तीय स्थिति की बात करें तो जुलाई-सितंबर तिमाही (Q2FY26) में कंपनी का घाटा बढ़कर ₹621 करोड़ हो गया है।
यह पिछले साल की समान तिमाही के ₹458 करोड़ के मुकाबले 35% ज्यादा है।
वहीं ऑपरेशनल रेवेन्यू भी 13% घटकर ₹792 करोड़ रह गया, जो पिछले साल ₹915 करोड़ था।
घाटे के पीछे तीन बड़े कारण
1. ऑपरेटिंग कॉस्ट में बढ़ोतरी
पुराने विमानों की मरम्मत, इंजन बदलाव और नई फ्लाइट्स जोड़ने के कारण खर्च बढ़ा।
2. मानसून में यात्रा की मांग घटी
जुलाई-सितंबर में यात्रियों की संख्या कम रही, जिससे टिकट बिक्री प्रभावित हुई।
3. सप्लाई चेन की समस्या
इंजन और पार्ट्स की कमी के कारण कई विमान ग्राउंडेड रहे, जिससे ऑपरेशन प्रभावित हुआ।
क्या है स्पाइसजेट का इतिहास?
स्पाइसजेट भारत की एक लो-कॉस्ट एयरलाइन है, जो देश के 48 डेस्टिनेशन और कुछ अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर उड़ान भरती है।
इस ब्रांड की शुरुआत 2004 में हुई थी, जबकि इसकी पहली उड़ान 24 मई 2005 को दिल्ली से मुंबई के बीच संचालित की गई थी।
निष्कर्ष
स्पाइसजेट इस समय अपने सबसे कठिन दौर से गुजर रही है।
स्टाफ छंटनी, सैलरी में देरी, बढ़ता घाटा और घटती मार्केट हिस्सेदारी कंपनी के लिए बड़े संकेत हैं।
अब यह देखना अहम होगा कि कंपनी इस संकट से कैसे उबरती है और क्या आने वाले समय में अपनी स्थिति सुधार पाती है या नहीं।

